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Sukhvinder Singh Sukhu: एनएसयूआई से शुरुआत, राहुल गांधी के करीबी, जानें आखिर कौन हैं सुखविंदर सिंह सुक्खू

By सतीश कुमार सिंह | Updated: December 10, 2022 20:30 IST

Sukhvinder Singh Sukhu: सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हैं। संगठन में अपने मजबूत दबदबे के लिए जाने जाने वाले चार बार के विधायक हैं।

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ठळक मुद्देकल सुबह 11 बजे शपथ लेंगे। पांच बार के विधायक मुकेश अग्निहोत्री उपमुख्यमंत्री होंगे।छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विरोधी के रूप में जाना जाता था।

शिमलाः हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रचार समिति के प्रमुख सुखविंदर सिंह सुक्खू राज्य के अगले मुख्यमंत्री होंगे। 58 वर्षीय सुक्खू हमीरपुर जिले के नादौन से विधायक हैं। वह कल सुबह 11 बजे शपथ लेंगे। पांच बार के विधायक मुकेश अग्निहोत्री उपमुख्यमंत्री होंगे।

सुखविंदर सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हैं। संगठन में अपने मजबूत दबदबे के लिए जाने जाने वाले सुक्खू चार बार के विधायक हैं। सुक्खू को पार्टी नेता राहुल गांधी के करीबी माना जाता है। उन्हें कांग्रेस के दिग्गज नेता और छह बार के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के विरोधी के रूप में जाना जाता था।

इसका मतलब है कि वह उस लॉबी का हिस्सा नहीं हैं, जो राज्य पार्टी प्रमुख प्रतिभा सिंह को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है। शिक्षा से वकील सुक्खू कांग्रेस विंग नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया में भी काम किया हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में एक कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया।

1980 के दशक के अंत में एनएसयूआई राज्य इकाई का नेतृत्व किया। उन्होंने 2000 के दशक में राज्य युवा कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है। सुक्खू शिमला में दो बार नगर निगम का चुनाव जीत चुके हैं। बाद में, उन्हें 2008 में राज्य इकाई का सचिव बनाया गया, अंततः वे राज्य इकाई के शीर्ष पर पहुंचे।

सुक्खू को विधायक दल का नेता चुना गया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं चार बार के विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू छात्र राजनीति से उभरकर पार्टी में विभिन्न पदों पर रहते हुए आज हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे हैं। सुक्खू अब हिमाचल प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे। शिमला में कांग्रेस विधायक दल की बैठक में सुक्खू को विधायक दल का नेता चुना गया।

सुक्खू को पार्टी के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह का आलोचक माना जाता था जिन्होंने पांच दशक से अधिक समय तक हिमाचल प्रदेश की राजनीति पर अपना दबदबा कायम रखा था। सिंह का पिछले साल निधन हो गया था। वीरभद्र सिंह की करिश्माई मौजूदगी के बिना इस राज्य में पार्टी की पहली जीत के साथ, सुक्खू को इस शीर्ष पद पर विराजमान करना यह स्पष्ट करता है कि पार्टी आगे बढ़ने के लिए तैयार है।

छोटा शिमला में दूध का काम किया करते थे

मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में वीरभद्र सिंह की पत्नी एवं पार्टी की राज्य इकाई की अध्यक्ष प्रतिभा सिंह भी शामिल थी लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने 58 वर्षीय सुक्खू के नाम पर रजामंदी दी। सुक्खू एक सामान्य परिवार से संबंध रखते हैं। उनके पिता सड़क परिवहन निगम में चालक के पद पर कार्यरत थे। सुक्खू अपने शुरुआती दिनों में छोटा शिमला में दूध का काम किया करते थे।

छह बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह के साथ अक्सर टकराव होने के बावजूद सुक्खू 2013 से 2019 तक रिकॉर्ड छह साल तक पार्टी की राज्य इकाई के अध्यक्ष बने रहे। हाल में संपन्न विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सत्ता छीनने के बाद सुक्खू और प्रतिभा सिंह दोनों ने मुख्यमंत्री पद के लिए दावा पेश किया था।

68 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं

सुक्खू शीर्ष पद पर काबिज होने वाले निचले हिमाचल के पहले कांग्रेसी नेता होंगे। भाजपा के प्रेम कुमार धूमल के बाद वह हमीरपुर जिले से दूसरे मुख्यमंत्री होंगे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले और कांग्रेस प्रचार समिति के प्रमुख रहे नादौन सीट से विधायक सुक्खू को शनिवार को सर्वसम्मति से कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया।

वह रविवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी का आलाकमान का सुक्खू पर विश्वास तभी जाहिर हो गया था जब उन्हें कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था और बड़ी संख्या में उनके समर्थकों को पार्टी का टिकट मिला था। उन्होंने कहा कि राज्य कांग्रेस प्रमुख के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत किया और कार्यकर्ताओं तथा विधायकों के साथ उनके तालमेल ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रबल दावेदार बना दिया। राज्य की 68 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के पास 40 विधायक हैं।

2017 और 2022 में जीत दर्ज की

राज्य में विधानसभा चुनाव 12 नवंबर को हुए थे और नतीजों की घोषणा बृहस्पतिवार को की गई। जुलाई 2021 में वीरभद्र सिंह के निधन के बाद से राज्य में यह पहला चुनाव था। सुक्खू कांग्रेस से संबद्ध नेशनल स्टूडेन्ट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की राज्य इकाई के महासचिव थे।

उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से एमए और एलएलबी की थी। जमीनी स्तर पर काम करते हुए वह दो बार शिमला नगर निगम के पार्षद चुने गए थे। उन्होंने 2003 में नादौन से पहली बार विधानसभा चुनाव जीता और 2007 में सीट बरकरार रखी लेकिन 2012 में वह चुनाव हार गए थे। इसके बाद 2017 और 2022 में उन्होंने फिर से जीत दर्ज की।

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