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ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी केस: मुस्लिम पक्ष बोला- कानूनी सलाह लेंगे, वाराणसी में धारा 144 लागू, जानें सोहन लाल आर्य ने क्या कहा, देखें वीडियो

By सतीश कुमार सिंह | Updated: September 12, 2022 19:28 IST

Gyanvapi Case: वाराणसी के पुलिस आयुक्त ए. सतीश गणेश ने बताया कि ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में जिला अदालत द्वारा सोमवार को फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर एहतियाती कदम के तहत वाराणसी कमिश्नरेट में धारा 144 लागू करने का निर्देश जारी कर दिया गया है।

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ठळक मुद्देधर्म गुरुओं के साथ संवाद करने का निर्देश दिया गया है। सभी सेक्टरों में आवश्यकतानुसार पुलिस बल की तैनाती की गई है।संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च और पैदल गश्त का निर्देश दिया गया है।

वाराणसीः ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी मामले में दायर याचिका पर वाराणसी की अदालत ने अपना फैसला सुना दी। हिंदू पक्ष की पैरवी कर रहे वकील ने कहा ने कहा कि वाराणसी जिला न्यायाधीश ने ज्ञानवापी मस्जिद-श्रृंगार गौरी मामले को सुनवाई योग्य माना है। मुस्लिम पक्ष ने कहा कि हम कानूनी सलाह जल्द लेंगे।

वाराणसी की अदालत ने ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में मुस्लिम पक्ष की मामले की पोषणीयता संबंधी याचिका खारिज करते हुए कहा कि सुनवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई 22 सितंबर को है। जिला न्यायाधीश ए के विश्वेश ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इस मामले में पिछले महीने आदेश 12 सितंबर तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।

ज्ञानवापी मामले में हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने वाराणसी में कहा कि कोर्ट ने हमारी बहस को मान लिया है। मुस्लिम पक्ष के आवेदन को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याचिका सुनवाई योग्य है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

ज्ञानवापी मामले में याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने वाराणसी में कहा कि ये हिंदू समुदाय की जीत है। अगली सुनवाई 22 सितंबर को है। आज का दिन ज्ञानवापी मंदिर के लिए शिलान्यास का दिन है। हम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हैं।

ज्ञानवापी मामले में आए फैसले पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि हम फैसले का सम्मान करते हैं, हम ज्ञानवापी का भी सम्मान करते हैं। अगली सुनवाई में भी हमें कानून पर भरोसा है। हम कानून का सम्मान करते हैं और कानून के साथ हैं।

पांच महिलाओं ने कथित तौर पर ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों की प्रतिदिन पूजा अर्चना करने की मंजूरी संबंधी याचिका अदालत में दाखिल की थी। निचली अदालत के आदेश पर मई में ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराया गया था।

वाराणसी के पुलिस आयुक्त ए. सतीश गणेश ने रविवार को बताया था कि ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में जिला अदालत द्वारा सोमवार को फैसला सुनाए जाने के मद्देनजर एहतियाती कदम के तहत वाराणसी कमिश्नरेट में धारा 144 लागू करने का निर्देश जारी कर दिया गया है।

सभी पुलिस अधिकारियों को अपने क्षेत्रों के धर्म गुरुओं के साथ संवाद करने का निर्देश दिया गया है। गणेश ने बताया था कि पूरे शहर को सेक्टर में विभाजित कर सभी सेक्टर में आवश्यकतानुसार पुलिस बल की तैनाती की गई है। संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च और पैदल गश्त का निर्देश दिया गया है।

जिले के संवेदनशील इलाकों में त्वरित कार्रवाई बल तैनात करने को कहा गया है। जिले के सीमाओं पर चेकिंग और सतर्कता बढ़ाने का निर्देश जारी किया गया है। होटलों, धर्मशालाओं और गेस्ट हाउसों में चेकिंग के साथ ही सोशल मीडिया के मंचों पर लगातर नजर रखने का निर्देश जारी किया गया है।

दिल्ली की राखी सिंह तथा वाराणसी की निवासी चार महिलाओं ने ज्ञानवापी मस्जिद की बाहरी दीवार पर स्थित हिंदू देवी देवताओं की प्रतिदिन पूजा अर्चना का आदेश देने के आग्रह वाली एक याचिका पिछले साल सिविल जज सीनियर डिविजन रवि कुमार दिवाकर की अदालत में दाखिल की थी। उसके आदेश पर पिछली मई में ज्ञानवापी परिसर का वीडियोग्राफी सर्वे कराया गया था।

इसी बीच, मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे को उपासना अधिनियम 1991 का उल्लंघन करार देते हुए इस पर रोक लगाने के आग्रह वाली एक याचिका उच्चतम न्यायालय में दाखिल की थी। हालांकि न्यायालय ने वीडियोग्राफी सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, मगर मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।

ज्ञानवापी सर्वे की रिपोर्ट पिछली 19 मई को जिला अदालत में पेश की गई थी। सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में शिवलिंग मिलने का दावा किया था जबकि मुस्लिम पक्ष ने उसे फव्वारा बताया था। मुस्लिम पक्ष ने इस मामले को उपासना स्थल अधिनियम के खिलाफ बताते हुए कहा था कि यह मामला सुनवाई के योग्य नहीं है।

जिला जज ने इस सिलसिले में दायर याचिका पर पहले सुनवाई करने का निर्णय लिया था। इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुस्लिम पक्ष बहुत पुराने दस्तावेज पेश कर रहा है जो इस मामले से संबंधित नहीं है। 

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