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उत्तर प्रदेश से कोरोना को लेकर आई अच्छी खबर, 18 जिलों के इन 72 गांवों में हुआ टेस्ट, कोई नहीं मिला संक्रमित

By गुणातीत ओझा | Updated: June 8, 2020 18:19 IST

उत्तर प्रदेश के सैकड़ों गांवों में भारी संख्या में पहुंचे प्रवासी मजदूरों से लोगों को कोरोना का डर सताने लगा था। इस क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से व्यापक स्तर पर कोरोना टेस्ट कराया जा रहा है।

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ठळक मुद्देउत्तर प्रदेश के 18 जिलों में 72 गांवों के 1,686 सामान्य निवासियों की कोरोना वायरस संक्रमण के लिए जांच की गयी, उनमें से कोई भी संक्रमित नहीं है।प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने सोमवार को बताया कि जिन जिलों में हमारे प्रवासी श्रमिक और कामगार काफी अधिक संख्या में आये हैं, ऐसे 18 जिलों के चार-चार गांवों का चयन किया गया और जांच कराई गई।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 18 जिलों में 72 गांवों के 1,686 सामान्य निवासियों की कोरोना वायरस संक्रमण के लिए जांच की गयी, उनमें से कोई भी संक्रमित नहीं है। ये वे जिले हैं, जहां देश के अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में कामगार और श्रमिक लौटे हैं। प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद ने सोमवार को बताया कि जिन जिलों में हमारे प्रवासी श्रमिक और कामगार काफी अधिक संख्या में आये हैं, ऐसे 18 जिलों के चार-चार गांवों का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि ये जिले झांसी, कौशाम्बी, प्रयागराज, आजमगढ, बहराइच, बलरामपुर, बांदा, बस्ती, चित्रकूट, जालौन, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, महाराजगंज, मिर्जापुर, संत कबीर नगर, शाहजहांपुर, सिद्धार्थनगर और श्रावस्ती हैं।

प्रसाद ने बताया कि इन जिलों में चार-चार ऐसे गांवों का चयन किया गया है, जिनमें प्रवासी कामगार 50 या उससे अधिक संख्या में लौटे हैं और उन्हें लौटे हुए 15 दिन से अधिक का समय हो चुका है। उन्होंने कहा, ‘‘वहां से हमने बीस—बीस या पच्चीस—पच्चीस लोगों का नमूना सैम्पल। ये वे लोग थे, जो उन गांवों के सामान्य निवासी हैं।'' उन्होंने कहा, ''हम ये देखना चाहते थे कि ग्राम निगरानी समितियों ने गृह पृथक-वास के लिए कितना प्रयास किया और प्रवासी कामगारों ने उसका कितना मजबूती से पालन किया।'' प्रमुख सचिव ने कहा, ''72 गांवों में नमूने लेकर जांच करायी गयी। इस बात की खुशी है कि जितने भी नमूने सामान्य नागरिकों के लिये गये, उनमें से कोई संक्रमित नहीं है, यानी कुल 1686 नमूनों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव आयी है।’’

उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि ग्राम निगरानी समितियों की भूमिका काफी अच्छी और सराहनीय रही। प्रवासी कामगारों ने भी अपने सामाजिक दायित्व को समझा और पृथक-वास का पालन किया। प्रसाद ने बताया कि जब प्रवासी बहुत बड़ी संख्या में आ रहे थे तो हम देख रहे थे कि अधिक से अधिक मामले प्रवासियों के निकल रहे थे लेकिन अब प्रवासियों का आना लगभग समाप्त हो गया है। इस समय ज्यादा मामले पश्चिम उत्तर प्रदेश खासकर मेरठ में देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में आवश्यक है कि शहरी क्षेत्र के लोग सतर्क रहकर, सावधान रहकर संक्रमण से बचें और दूसरों को भी संक्रमित होने से बचायें। उन्होंने कहा, ''अब सारी गतिविधियां चूंकि खुल गयी हैं। गांवों में ग्राम निगरानी समितियां गृह पृथक-वास का पालन करा रही हैं लेकिन शहरों में आबादी अधिक होती है इसलिए एक दूसरे से मिलने की संभावना अधिक रहती है।

ऐसे में शहरों की मोहल्ला निगरानी समितियों को भी उतनी ही मजबूती से कार्य करना होगा, जितनी मजबूती से ग्राम निगरानी समितियां कर रही हैं।'' प्रसाद ने कहा कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का 'कैरियर' मच्छर है लेकिन कोरोना वायरस का कैरियर मनुष्य है, जितना अधिक संपर्क बढेगा, उतना अधिक संक्रमण का खतरा होगा। उन्होंने कहा कि सिविल डिफेंस और एनएसएस जैसी सामाजिक संस्थाएं भी लगातार लोगों को सतर्क करें तथा कोरोना से बचाव को लेकर अधिक से अधिक प्रचार करें।

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