Gaganyaan mission: भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान गगनयान 2025 में अंतरिक्ष के लिए रवाना होगी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अनुसार गगनयान का पहला परीक्षण वाहन मिशन 21 अक्टूबर को सुबह 7 बजे से 9 बजे के बीच होगा। गगनयान मिशन की शुरुआत 2006 में हुई। मार्च 2008 में गगनयान डिजाइन को अंतिम रूप दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने गगनयान की पहली प्रदर्शन उड़ान की तैयारियों की समीक्षा की है। वैज्ञानिकों से शुक्र ऑर्बिटर मिशन, मंगल लैंडर पर काम करने को कहा है। भारत को 2040 तक चंद्रमा पर मनुष्य को भेजने का, 2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का लक्ष्य रखना चाहिए। फरवरी 2009 में इसके लिए पैसा दिया गया।
इसरो ने गगनयान परियोजना के तहत मानव दल को पृथ्वी की 400 किलोमीटर की कक्षा में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करके उसे भारतीय समुद्री सतह पर उतारकर पृथ्वी पर सुरक्षित रूप से वापस लाने की यान की क्षमता का आंकलन करने और मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता का प्रदर्शन करने की परिकल्पना की है।
इसरो ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ मिशन गगनयान : टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान 21 अक्टूबर, 2023 को सुबह सात बजे से नौ बजे के बीच श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निर्धारित है। ’’ इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा था कि 21 अक्टूबर को टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान के बाद गगनयान कार्यक्रम के तहत तीन और परीक्षण यान मिशन शुरू किए जाएंगे।
परीक्षण यान की उड़ान (टीवी-डी1) का उद्देश्य क्रू मॉड्यूल (सीएम) का परीक्षण करना है जो अगले साल के अंत में मानव अंतरिक्ष उड़ान के दौरान भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाएगा। टीवी-डी1 परीक्षण उड़ान में मानव रहित क्रू मॉड्यूल को बाहरी अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करना, इसे पृथ्वी पर वापस लाना और बंगाल की खाड़ी में उतरने के बाद इसे पुनर्प्राप्त करना शामिल है। क्रू मॉड्यूल को मध्य-उड़ान क्रू एस्केप सिस्टम का परीक्षण करने के लिए 17 किमी की ऊंचाई तक ले जाया जाएगा।