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किसान आंदोलन का 27वां दिन, सरकार के प्रस्ताव पर किसानों की आज बड़ी बैठक

By विनीत कुमार | Updated: December 22, 2020 08:00 IST

Farmers Protest: दिल्ली की सीमा पर किसान आंदोलन का आज 27वां दिन है। कड़ाके की ठंड के बावजूद किसान डटे हुए हैं और फिलहाल ये गतिरोध खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।

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ठळक मुद्देकिसानों ने सोमवार से शुरू की थी क्रमिक भूख हड़ताल, आज भी रहेगा जारी सिंघु बॉर्डर पर किसान यूनियन की आज दिन में अहम बैठक, सरकार के प्रस्ताव पर होगी बातसरकार ने दोबारा बैठक बुलाने का प्रस्ताव भेजा है, कानून को लेकर सभी आशंकाओं के बारे में भी किसानों को बताने को कहा गया है

कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान अब अगला क्या कदम उठाते हैं, इसे लेकर तस्वीर आज साफ हो सकती है। किसान यूनियन सरकार की ओर बातचीत के दिए गए ताजा प्रस्ताव को लेकर मंगलवार को अहम बैठक करेंगे।

किसान पहले ही सोमवार से क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर चुके हैं। दूसरी ओर महाराष्ट्र के विभिन्न संगठन भी दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिये आज मुंबई में मार्च आयोजित करेंगे।

सरकार ने बातचीत की तारीख पर दिया है नया प्रस्ताव

कृषि मंत्रालय की ओर से करीब 40 किसान यूनियन को रविवार देर रात चिट्ठी भेजी गई थी। मंत्रालय ने इसमें किसानों से बातचीत को लेकर नई तारीख तय करने की गुजारिश की थी। साथ ही कृषि कानूनों की किन बातों से किसान नाराज हैं, इसे लेकर भी विस्तृत सूची की मांग किसानों से की गई है।

किसानों और केंद्र सरकार के बीच पांचवें दौर की बातचीत के बाद नौ दिसंबर की बातचीत स्थगित हो गई थी क्योंकि किसान यूनियनों ने कानूनों में संशोधन तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य जारी रखने का लिखित आश्वासन दिए जाने के केंद्र के प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया था। 

किसान नेता अभिमन्यु कोहार के अनुसार, ‘सरकार के पत्र में कुछ भी नया नहीं है। नए कृषि कानूनों को संशोधित करने का सरकार का प्रस्ताव हम पहले ही खारिज कर चुके हैं। अपने पत्र में सरकार ने प्रस्ताव पर हमें चर्चा करने और वार्ता के अगले चरण की तारीख बताने को कहा है।’

सुप्रीम कोर्ट ने कही है समिति बनाने की बात

गौरतलब है कि 9 दिसंबर को केंद्र की ओर से किसान यूनियनों को एक ड्राफ्ट भेजा गया था जिसमें 8 मुद्दों की पहचान कर कृषि कानूनों में कुछ संशोधन की बात कही गई थी। किसान यूनियनों ने हालांकि इन प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इनकी मांग थी नए कानून को सरकार पहले वापस ले।

माना जा रहा है कि किसान यूनियन सुप्रीम कोर्ट को अपना जवाब देने के लिए वकीलों की भी सलाह ले रहे हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की ओर से पिछले हफ्ते इस पूरे मुद्दे पर सुलह के लिए एक कमेटी बनाने की बात कही गई थी।

टॅग्स :किसान आंदोलनFarmer Agitation
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