बिहार में गिरता भूजल स्तर बना चिंता का विषय, गर्मी में हो जा सकता है गंभीर पेयजल संकट

By एस पी सिन्हा | Updated: January 4, 2026 16:20 IST2026-01-04T16:20:20+5:302026-01-04T16:20:26+5:30

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की चिंता यह है कि अक्टूबर-नवंबर में ये हालात हैं तो गर्मी के दिनों में भूजल स्तर और भी नीचे जा सकता है। कहा जा रहा है कि पिछले 50 वर्षों में राज्य का भूजल स्तर औसतन तीन गुना तक नीचे गया है। 

Falling groundwater levels in Bihar have become a cause for concern | बिहार में गिरता भूजल स्तर बना चिंता का विषय, गर्मी में हो जा सकता है गंभीर पेयजल संकट

बिहार में गिरता भूजल स्तर बना चिंता का विषय, गर्मी में हो जा सकता है गंभीर पेयजल संकट

पटना:बिहार में अभी ठंड के मौसम में ही भूजल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। ऐसे में गर्मी के मौसम में भारी पेयजल संकट होने की संभावना व्यक्त की जाने लगी है। हालांकि पिछले वर्षों की अपेक्षा बिहार में इस बार अच्छी बारिश हुई है। इसके बाद भी कई जिलों का औसत भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। पिछले साल की तुलना में 10 फीट तक भूजल स्तर नीचे गया है। 2019 से तुलना करें तो इस बार की स्थिति और भी खराब है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) की चिंता यह है कि अक्टूबर-नवंबर में ये हालात हैं तो गर्मी के दिनों में भूजल स्तर और भी नीचे जा सकता है। कहा जा रहा है कि पिछले 50 वर्षों में राज्य का भूजल स्तर औसतन तीन गुना तक नीचे गया है। 

पीएचईडी की जांच के बाद यह बात सामने आई है कि कई इलाकों में भूजल इतना नीचे चला गया है कि बड़ी संख्या में जल स्रोतों का अस्तित्व ही खत्म हो गया है। पीएचईडी की ओर से भूजल के गिरते स्तर को देखते हुए नदियों के पानी को पेयजल के रूप में उपयोग किये जाने की योजना को और विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। इसके लिए 1795 करोड़ की योजना की मंजूरी केंद्र सरकार से मांगी गई है। मई जून की बात तो दूर अभी से ही कई जिलों में पेजयल की समस्या उत्पन्न हो गई है। ऐसे में लोगों को पेयजल की चिंता सताने लगी है। जानकारों की मानें तो नदियों के संकटग्रस्त होने का सबसे बुरा प्रभाव भूजल स्तर पर पड़ रहा है। 

राज्य में करीब पांच दर्जन नदियों का अस्तित्व या तो समाप्त हो गया है या फिर समाप्त होने के कगार पर है। ऐसे में नदियों के लगातार सिकुड़ने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। जहां कभी 10-20 फीट पर पानी उपलब्ध हो जाता था, वहां अब 80 से 300 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है। इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव खेती, पशुपालन, पेयजल व्यवस्था और नदी आधारित पारंपरिक रोजगार पर पड़ा है। नालंदा के बिहारशरीफ और नूरसराय में पहले 30 से 70 फीट पर पानी उपलब्ध था। अब 300 फीट गहरी सबमर्सिबल लगाना पड़ रहा है। 

भोजपुर जिले में पिछले दो दशकों में भूगर्भ जलस्तर लगभग दस फीट नीचे चला गया है। सहार प्रखंड के पतरिहां गांव निवासी 80 वर्षीय रामपूजन सिंह बताते हैं कि फरवरी के बाद चापाकल जवाब देने लगते हैं। ऐसी स्थिति पहले नही थी। पिछले साल गर्मी में तो अधिकतर चापाकल फेल हो गये थे। रामपूजन सिंह ने कहा कि पहले बारिश के कुछ ही दिनों में पानी भर जाता था। अब पूरी बरसात के बाद भी जलस्तर ऊपर नहीं आता। लेकिन नदियों के सूखने से भूजल पुनर्भरण कम हुआ है। जिससे पेयजल और सिंचाई संकट बढ़ा है। 

उधर सीतामढ़ी की जीवनदायिनी लखनदेई अतिक्रमण के कारण नाले का रूप ले चुकी है, जिससे कृषि और पेयजल दोनों प्रभावित हुए हैं। मधुबनी में भी भूजल स्तर 15 फीट से अधिक नीचे चला गया है। पश्चिम चंपारण में चंद्रावत, कोहड़ा और बांसी जैसी नदियां सिकुड़ चुकी हैं। बेतिया में भूजल स्तर 15-20 फीट तक गिर गया है। गोपालगंज में 50 वर्ष पहले नदियों में सालों भर बहाव रहता था। लेकिन अभी से ही नदियां नाले के रूप में दिखने लगी हैं। जानकार बताते हैं कि एक व्यक्ति द्वारा स्नान से लेकर दैनिक क्रिया क्रम में औसतन 145 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। इस हिसाब से सूबे की जनसंख्या को देखते हुए हर दिन होने वाली पानी की खपत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

इसके आलावा पशुओं, उद्योग के साथ सिंचाई के लिए भी भूमिगत जल का ही दोहन किया जाता है। वहीं भूमिगत जल का रिचार्ज इस हिसाब से नहीं हो पाता है। लोग भूमिगत के रिचार्ज के लिए संजीदगी नहीं दिखा रहे हैं। सिर्फ वर्षा जल के भरोसे ही भूमिगत जल का रिचार्ज होता है। ऐसे में निचे जाता भूजल स्तर लोगों के जीवन के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।  

इस संबंध में पीएचईडी विभाग के मंत्री संजय सिंह ने बताया कि रिपोर्ट आने के बाद विभाग के द्वारा कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं। इसके लिए केन्द्र सरकार को भी प्रस्ताव भेजकर नदियों के पानी को पीने लायक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ भूजल स्तर कैसे बढ़े इसपर भी मंथन किया जा रहा है। लोगों से पानी का दुरुपयोग रोकने की भी सलाह दी जा रही है।

Web Title: Falling groundwater levels in Bihar have become a cause for concern

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