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एक्सक्लूसिव: ज्योतिरादित्य सिंधिया की झुंझलाहट के पीछे राज्यसभा की सीट! भाजपा है स्वागत करने को तैयार

By हरीश गुप्ता | Updated: November 27, 2019 08:21 IST

ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह अहसास हो चला है कि अगले साल वह राज्यसभा में स्थान हासिल नहीं कर पाएंगे और राज्य की राजनीति में भी उनकी अहम भूमिका नहीं रहने वाली है

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ठळक मुद्देभाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने सिंधिया के भाजपा प्रवेश के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस बावत निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व को लेना है.सबसे लिए दरवाजे खुले'रखने वाली भाजपा ज्योतिरादित्य की पार्टी में आमद के खिलाफ भी नहीं है.

मध्यप्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के ट्विटर अकाउंट के मामले को लेकर उठे राजनीतिक तूफान और इससे सामने आई उनकी झुंझलाहट के पीछे पार्टी के बड़े नेताओं से चल रही उनकी खींचतान और राज्यसभा की एक सीट को वजह माना जा रहा है. सिंधिया के असंतोष से भाजपा को आनंद मिल रहा है,और वह इसे हवा दे रही है. मौका आने पर वह उनका स्वागत करने को भी तैयार है.

अप्रैल 2020 में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के तहत मध्यप्रदेश में तीन सीटों के चुनाव होने हैं. 230 सदस्यीय सदन में 115 विधायकों के साथ कांग्रेस और 107 सदस्यों वाली भाजपा को एक-एक सीट मिलना तय है लेकिन तीसरी सीट के लिए कड़ा संघर्ष होगा.यह तीसरी सीट दोनों में से किसी एक के पक्ष में जा सकती है. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अप्रैल 2020 में राज्यसभा सदस्यता से अवकाश ग्रहण कर रहे हैं.स्वाभाविक रूप से इस सीट पर पुनर्नामांकन के लिए उनका दावा बनता है.

मुख्यमंत्री कमलनाथ भी नहीं चाहेंगे कि उनका टिकट काटा जाए. तीन सीटों में से दो सीटों के लिए प्रत्याशी चयन हालांकि कांग्रेस आलाकमान को करना है लेकिन राज्य की उलझी राजनीतिक परिस्थितियों के मद्देनजर आलाकमान चाहेगा कि यह मसला राज्य नेतूत्व पर छोड़ दिया जााए.

ज्योतिरादित्य सिंधिया को यह अहसास हो चला है कि अगले साल वह राज्यसभा में स्थान हासिल नहीं कर पाएंगे और राज्य की राजनीति में भी उनकी अहम भूमिका नहीं रहने वाली है,वह अपने को अलग -थलग महसूस कर रहे हैं. राहुल गांधी के भी नेपथ्य में जाने के कारण अखिल भारतीय कांग्रेस स्तर पर भी उनका महत्व घट गया है.

इस पृष्ठभूमि में यह अफवाह चल पड़ी कि असंतुष्ट सिंधिया कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में शमिल हो सकते हैं. राज्य के मुख्यमंंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री से उनकी राजनीतिक अदावत के चलते उन्हे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का पद तक हासिल नहीं हो पाया. खफा सिंधिया ने ट्विटर पर अपना प्रोफाइल बदल कर कांग्रेस के साथ अपने पुराने संबंधों का उल्लेख हटा लिया. हालांकि इस बारे में चर्चा सरगर्म होने पर उन्होने स्पष्टीकरण जारी किया कि यह परिवर्तन एक माह पूर्व किया गया था और इसका राजनीति से कोई लेना देना नहीं है. 

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने सिंधिया के भाजपा प्रवेश के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इस बावत निर्णय केन्द्रीय नेतृत्व को लेना है. फिलहाल तो राज्य के नेताओं की ओर से भी ऐसी कोई सिफारिश नहीं आई है. उनकी दो बुआ वसुंधरा राजे और यशेधरा राजे पहले से ही भाजपा में अहम भूमिका में हैं . सबसे लिए दरवाजे खुले'रखने वाली भाजपा ज्योतिरादित्य की पार्टी में आमद के खिलाफ भी नहीं है.

टॅग्स :ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधियाराज्य सभाकांग्रेसमहाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2019
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