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चुनाव आयोग को पत्र लिख कर एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पर ठोका दावा, सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई आज

By शिवेंद्र राय | Updated: July 20, 2022 12:40 IST

शिवसेना किसकी होगी और पार्टी का चुनाव चिन्ह धनुष बाण किसको मिलेगा, अब सारी लड़ाई इसी बात की है। एकनाथ शिंदे गुट का कहना है कि दो तिहाई जनप्रतिनिधि उनके साथ हैं इसलिए शिवसेना उनकी है। ठाकरे गुट का कहना है कि कार्यकारिणी का बहुमत उनके पास है, इसलिए पार्टी उनकी है।

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ठळक मुद्देशिवसेना पर अधिकार की लड़ाई तेज हुईसुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई शिंदे गुट ने चुनाव आयोग में ठोका पार्टी पर दावा

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक शह और मात के खेल के बीच एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर आखिरी हमले की तैयारी कर ली है। एकनाथ शिंदे गुट अब शिवसेना पर पूरी तरह से अपना अधिकार बनाने की कोशिशों में जुट गया है। इसी क्रम में एकनाथ शिंदे ने भारत के चुनाव आयोग से संपर्क किया है और खुद को असली शिवसेना बताते हुए पार्टी पर दावा ठोका है। एकनाथ शिंदे के इस कदम को शिवसेना को पूर्ण रूप से अपने अधिकार में लेने की कोशिश का आखिरी कदम माना जा रहा है।

एकनाथ शिंदे गुट ने चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी में कहा है कि शिवसेना के दो तिहाई से ज्यादा नेता उनके साथ हैं और उन्होंने उद्धव ठाकरे द्वारा नियुक्त इकाई को भंग करने के बाद नई पार्टी इकाई का गठन किया है। शिवसेना सांसदों के एक समूह ने एकनाथ शिंदे की अध्यक्षता में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की एक वर्चुअल बैठक में हिस्सा भी लिया। बागी समूह द्वारा बुलाई इस बैठक में एकनाथ शिंदे को शिवसेना का मुख्य नेता चुना गया। 

सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई 

शिवसेना पर अधिकार की लड़ाई के बीच आज सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले पर सुनवाई होगी। चीफ जस्टिस एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली बेंच मामले की सुनवाई करेगी जिसमें जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली भी शामिल हैं। शिवसेना उद्धव ठाकरे की रहेगी या एकनाथ शिंदे की हो जाएगी इसका फैसला अब सर्वोच्च न्यायालय के हाथ में है। शिंदे का दावा है कि पार्टी के दो तिहाई से ज्यादा विधायक उनके साथ हैं। इतना ही नहीं शिंदे का दावा है कि शिवसेना के 19 में 18 सांसद उनके साथ हैं। एकनाथ शिंदे ने अपने दावे को मजबूती देने के लिए 12 सांसदों की लोकसभा अध्यक्ष के सामने परेड भी कराई थी। ठाकरे गुट का कहना है कि कोई बागी गुट पार्टी पर दावा नहीं कर सकता। ऐसे में ये लड़ाई बेहद दिलचस्प हो गई है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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