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SC ने अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े मामले में बंबई हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका की खारिज, कहा- अदालत के माध्यम से राजनीति मत चलाइए

By भाषा | Updated: June 3, 2020 21:08 IST

सुप्रीम कोर्ट ने एक सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े मामले में याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालत के माध्यम से अपनी राजनीति मत चलाइए।

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ठळक मुद्देसुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका खारिज करते हुए कहा कि अदालत के माध्यम से अपनी राजनीति मत चलाइए।एक सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े मामले में याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालत के माध्यम से अपनी राजनीति मत चलाइए। शीर्ष न्यायालय ने एक सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े मामले में बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ उच्च न्यायालय के मार्च में दिए फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उच्च न्यायालय ने एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी थी, जो उस वक्त सरपंच था। याचिका एक आदेश के खिलाफ थी जिसमें उसके खिलाफ पारित अविश्वास प्रस्ताव को बरकरार रखा गया था। अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में छह वोट पड़े जबकि एक वोट विरोध में पड़ा।

न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हृषिकेष रॉय की पीठ ने याचिकाकर्ता की तरफ से पेश वकील से कहा, ‘‘आप उस निकाय का हिस्सा क्यों रहना चाहते हैं, जो आपको नहीं रखना चाहता?’’ मामले की वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘‘अदालत के माध्यम से अपनी राजनीति मत चलाइए।’’

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘सुन लिया। इस याचिका पर सुनवाई का कोई कारण नहीं है। इसी मुताबिक विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है।’’ उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया था कि उसके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप ‘‘अस्पष्ट’’ हैं और महज इसलिये कि सरपंच के कामकाज से अधिकतर सदस्य खुश नहीं थे, यह उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का आधार नहीं हो सकता है।

उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए खंडपीठ के एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए कहा कि अगर अविश्वास प्रस्ताव आवश्यक बहुमत के साथ वैध रूप से पारित हुआ है तो कोई हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता, जब तक कि कानून के तहत आवश्यक प्रक्रियाओं का उल्लंघन नहीं हुआ हो।

टॅग्स :सुप्रीम कोर्टबॉम्बे हाई कोर्ट
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