लाइव न्यूज़ :

हिमाचल प्रदेश में अयोग्य ठहराए गए विधायकों को नहीं मिलेगी पेंशन, दलबदलुओं पर शिकंजा कसने के लिए विधेयक पास

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: September 4, 2024 17:28 IST

Himachal Pradesh : नए विधेयक का उद्देश्य विधायकों की पेंशन बंद करके उन्हें दल बदलने से रोकना और हतोत्साहित करना है। विधेयक के अनुसार, "कोई व्यक्ति अधिनियम के तहत पेंशन का हकदार नहीं होगा यदि उसे संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी समय अयोग्य घोषित कर दिया गया हो।"

Open in App
ठळक मुद्देसंविधान की दसवीं अनुसूची में 'दलबदल विरोधी कानून' का जिक्र हैहिमाचल प्रदेश विधानसभा में संशोधित विधेयक पारित नए विधेयक का उद्देश्य विधायकों की पेंशन बंद करके उन्हें दल बदलने से रोकना और हतोत्साहित करना

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित सदस्यों की पेंशन रोकने के लिए एक संशोधित विधेयक पारित किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश विधान सभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधेयक, 2024 पेश किया था। इसका मकसद दलबदलुओं पर शिकंजा है। 

नए विधेयक का उद्देश्य विधायकों की पेंशन बंद करके उन्हें दल बदलने से रोकना और हतोत्साहित करना है। विधेयक के अनुसार, "कोई व्यक्ति अधिनियम के तहत पेंशन का हकदार नहीं होगा यदि उसे संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी समय अयोग्य घोषित कर दिया गया हो।" विधेयक में उन विधायकों द्वारा ली गई पेंशन की वसूली के प्रावधान भी शामिल हैं जो इस संशोधन के तहत हकदार नहीं हैं।

अधिनियम की धारा 6 बी के तहत प्रत्येक विधायक जिसने पांच साल तक की किसी भी अवधि के लिए सेवा की है वह प्रति माह 36,000 रुपये की पेंशन का हकदार है। धारा 6(ई) में आगे कहा गया है कि प्रत्येक विधायक को पहले कार्यकाल की अवधि से अधिक प्रत्येक वर्ष के लिए 1,000 रुपये प्रति माह की अतिरिक्त पेंशन दी जाएगी।

बता दें कि संविधान की दसवीं अनुसूची में 'दलबदल विरोधी कानून' का जिक्र है। यह राजनीतिक दलबदल को रोकने के लिए बनाई गई है। दलबदल विरोधी कानून 1985 में संसद द्वारा पारित किया गया था।

कुछ महीने पहले कांग्रेस के छह विधायकों - सुधीर शर्मा, रवि ठाकुर, राजिंदर राणा, इंदर दत्त लखनपाल, चेतन्य शर्मा और देविंदर कुमार ने पाला बदल लिया था। इसके बाद सबको दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया था, क्योंकि उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए सदन से अनुपस्थित रहे थे। 

बता दें कि हिमाचल प्रदेश इस समय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और सरकार खर्चों में कटौती करने की हर संभावित कोशिश कर रही है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण भी राज्य को काफी नुकसान हुआ है। 

टॅग्स :हिमाचल प्रदेशसुखविंदर सिंह सुक्खूकांग्रेसBJP
Open in App

संबंधित खबरें

भारततमिलनाडु चुनावों के लिए BJP का टिकट न मिलने के बाद अन्नामलाई ने दिया अपना स्पष्टीकरण

कारोबारकेरलम विधानसभा चुनावः वृद्ध आबादी 16.5 प्रतिशत?, पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षा सबसे बड़े चुनावी मुद्दे?, देखिए किस दल ने क्या दिया तोहफा?

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

ज़रा हटकेVIDEO: असम में योगी का बड़ा बयान, 'घुसपैठियों को बाहर करना ही होगा'

भारतTamil Nadu Polls: बीजेपी कैंडिडेट्स की लिस्ट में अन्नामलाई का नाम नहीं, 'सिंघम' किए गए साइडलाइन या नई जिम्मेदारी की तैयारी

भारत अधिक खबरें

भारत'Three Allegations, Zero Truth': आम आदमी पार्टी द्वारा राज्यसभा की भूमिका से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा का जवाब

भारतMadhya Pradesh: अनूपपुर ज़िले में चार-मंज़िला होटल गिरने से मलबे में कई लोगों के फँसे होने की आशंका, एक की मौत

भारतलखनऊ सहित यूपी के 17 शहरों में कूड़े का अंबार?, मतदान करने असम गए हजारों सफाईकर्मी, 12 अप्रैल को लौंटेगे?

भारतबारामती विधानसभा सीटः सुनेत्रा पवार के खिलाफ प्रत्याशी ना उतारें?, सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा- निर्विरोध जिताएं, सभी दलों से की अपील

भारत'एकनाथ शिंदे और बलात्कार के आरोपी अशोक खरात के बीच 17 बार फोन पर बातचीत हुई', अंजलि दमानिया का आरोप