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दिल्ली का संकट मोचन मंदिर आश्रमः यहीं बनी थी राम मंदिर की योजना, खुशी का माहौल

By भाषा | Updated: August 5, 2020 13:55 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राम मंदिर शिलापट्ट का अनावरण किया। इस दौरान उनके साथ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गापेाल दास, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे।

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ठळक मुद्देइसी आश्रम में वह कार्यालय है जहां राम मंदिर आंदोलन की योजनाओं का खाका बना और उन्हें अमलीजामा पहनाया गया। अशोक सिंघल, विष्णु हरि डालमिया, चंपत राय जैसे दिग्गजों, विहिप कार्यकर्ताओं ने साधु संतों के निर्देश के अनुरूप आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया।देशभर के वरिष्ठतम संत, महापुरुष, अध्यात्मिक गुरु आते जाते रहे और जिन्होंने भगवान श्रीराम की जन्मस्थली को मुक्त कराने के लिये आजीवन संघर्ष किया।

नई दिल्लीः अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन को लेकर जब पूरा देश आल्हादित है तब यहां दिल्ली के आर के पुरम स्थित संकट मोचन मंदिर आश्रम में भी खुशी का माहौल है।

दरअसल इसी आश्रम में वह कार्यालय है जहां राम मंदिर आंदोलन की योजनाओं का खाका बना और उन्हें अमलीजामा पहनाया गया। आर के पुरम स्थित संकट मोचन मंदिर परिसर में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) का यह कार्यालय आमतौर पर कम चहल पहल वाला दिखता है, लेकिन मंदिर आंदोलन के इतिहास के पन्नों के टटोला जाए तब यह कार्यालय राम मंदिर आंदोलन से बहुत करीबी से जुड़ा हुआ है जिसका ‘‘ध्यान कक्ष’’ ऐसी बैठकों का केंद्र हुआ करता था।

विहिप के संयुक्त महामंत्री सुरेन्द्र जैन ने ‘‘भाषा’’ को बताया, ‘‘इसी स्थान से राम मंदिर से जुड़ी तमाम योजनाओं को आगे बढ़ाया गया। यहीं पर अशोक सिंघल, विष्णु हरि डालमिया, चंपत राय जैसे दिग्गजों, विहिप कार्यकर्ताओं ने साधु संतों के निर्देश के अनुरूप आंदोलन को आगे बढ़ाने का काम किया। ’’

भगवान श्रीराम की जन्मस्थली को मुक्त कराने के लिये आजीवन संघर्ष किया

उन्होंने बताया कि संकट मोचन मंदिर आश्रम वह पवित्र स्थान है जहां पर देशभर के वरिष्ठतम संत, महापुरुष, अध्यात्मिक गुरु आते जाते रहे और जिन्होंने भगवान श्रीराम की जन्मस्थली को मुक्त कराने के लिये आजीवन संघर्ष किया।

विहिप के पदाधिकारियों ने बताया कि राम मंदिर आंदोलन में विष्णु हरि डालमिया की भूमिक मार्गदर्शक की रही, जबकि अशोक सिंघल मुख्य भूमिका में रहे और चंपत राय ने पर्दे के पीछे रहकर सतत रूप से काम किया । विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने बताया, ‘‘ यह पूरा आंदोलन 80 के दशक के मध्य में शुरू हुआ था, तब आंदोलन की कमान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद ने इसकी संभाली।

आंदोलन के दौरान अप्रैल 1984 में सरयू नदी के किनारे हुई धर्म संसद अहम पड़ाव थी। इसी धर्म संसद में राम मंदिर को लेकर निर्णायक आंदोलन शुरू करने का फैसला हुआ। 21 जुलाई, 1984 को अयोध्या के वाल्मीकि भवन में बैठक कर विहिप ने रामजन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन किया। ’’

बंसल ने बताया कि इसके बाद 1984 के अगस्त माह से ही संकट मोचन मंदिर आश्रम ही बैठकों का केंद्र बन गया। साधु संतों के आदेश को क्रियान्वित करने की रूपरेखा इसी दफ्तर में तैयार की जाती थी । उन्होंने बताया, ‘‘ प्रारंभ से ही कार्यालय में तीन ‘ध्यान कक्ष’हैं जिसमें एक बड़ा और दो छोटे कक्ष हैं।

अशोक सिंघल, विष्णु हरि डालमिया, चंपत राय आदि साधु संतों के साथ विचार विमर्श करते थे

बड़ी बैठकें बड़े ध्यान कक्ष में आयोजित की जाती थी जिसमें अशोक सिंघल, विष्णु हरि डालमिया, चंपत राय आदि साधु संतों के साथ विचार विमर्श करते थे। छोटी बैठकें या वन टू वन मीटिंग छोटे ध्यान कक्ष में हुआ करती थी । देश भर के साधु-संतों के साथ में मिलकर लगातार योजनाएं बनाना, बातचीत करना और उनको किस तरीके से मूर्त रूप देना है, उस पर भी लगातार विचार-विमर्श होता था।’’

विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय कार्यालय में अशोक सिंघल का कमरा पहली मंजिल पर जस का तस बना हुआ है। यहां पर आज भी एक चौकी है और साथ में ही वहां एक उनका अपना छोटा सा मंदिर भी मौजूद है। पदाधिकारियों ने बताया कि अशोक सिंघल जी के निर्देश पर एक सभागार भागवन राम और राम मंदिर के रिकार्ड रूम के रूप समर्पित किया गया और यहां आज भी राम जन्मभूमि आंदोलन और अदालती मामलों से जुड़े कागजात और रिकार्ड मौजूद हैं।

उन्होंने बताया कि संकट मोचन मंदिर आश्रम स्थित कार्यालय में अशोक सिंघल के मार्गदर्शन में दिनचर्या एकदम निर्धारित रूप से चलती थी। सुबह पांच बजे सभी स्वयंसेवक, कर्मचारी आदि मंदिर प्रांगण में आ जाते थे तथा योग, ध्यान करते थे तथा प्रतिदिन शाखा लगती थी। उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम जन्मभूमि स्थान और आर के पुरम स्थित संकट मोचन मंदिर आश्रम में एक समानता भी है और दोनों स्थानों पर प्रवेश करने के साथ ही हनुमान दरबार है। 

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