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जहांगीरपुरी हिंसा: CJI को पत्र लिख मामले पर स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध, कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

By विशाल कुमार | Updated: April 18, 2022 09:02 IST

एक वकील अमृतपाल सिंह खालसा की पत्र याचिका में शीर्ष अदालत से अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने और दंगों की निष्पक्ष जांच करने के लिए शीर्ष अदालत के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का आग्रह किया गया है।

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ठळक मुद्देदिल्ली पुलिस की जांच आंशिक, सांप्रदायिक और सीधे तौर पर दंगाईयों का बचाव करने वाली रही है।पत्र में कहा गया है कि 2020 के दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका ने उन्हें कमजोर किया है।याचिका में कहा गया है कि यह दूसरी बार है जब राजधानी में दंगे भड़के हैं।

नई दिल्ली: बीते शनिवार को राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुए सांप्रदायिक दंगों को लेकर सीजेआई एनवी रमना को एक पत्र लिखा गया है और मामले पर संज्ञान लेने की मांग की गई है।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, एक वकील अमृतपाल सिंह खालसा की पत्र याचिका में शीर्ष अदालत से अपने अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने और दंगों की निष्पक्ष जांच करने के लिए शीर्ष अदालत के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का आग्रह किया गया है।

वकील ने आरोप लगाया है कि दिल्ली पुलिस की अब तक की जांच, आंशिक, सांप्रदायिक और सीधे तौर पर दंगाईयों का बचाव करने वाली रही है।

पत्र में कहा गया है कि 2020 के दंगों में दिल्ली पुलिस की भूमिका ने उन्हें कमजोर किया है और लोगों का उन पर विश्वास कमजोर किया है। याचिका में कहा गया कि इस अदालत ने 2020 में दंगों को रोकने में विफल रहने पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई।

याचिका में कहा गया है कि यह दूसरी बार है जब राजधानी में दंगे भड़के हैं, और दोनों ही मौकों पर केवल अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को दोषी ठहराया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा करते हुए पत्र याचिका में आरोप लगाया गया कि हनुमान जयंती शोभा यात्रा जुलूस में शामिल कुछ सशस्त्र सदस्यों ने मस्जिद में प्रवेश किया और भगवा झंडा लगाया और उसके बाद दोनों समुदायों द्वारा पथराव किया गया।

याचिका में कहा गया कि इस पूरी घटना में दिल्ली पुलिस के  7 से 8 कर्मी और नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचा। ये दंगे पहले से ही एक सांप्रदायिक निशान हैं, इसे और भी बदतर बनाने के लिए दिल्ली पुलिस ने शुरू में 7 युवकों को गिरफ्तार किया, जिनमें से सभी मुस्लिम थे।

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