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2014 की तुलना में पीएम मोदी की लोकप्रियता हुई कम, राहुल की बढ़ी, आज चुनाव हो जाएं तो UPA की सीटें हो जाएंगी 4 गुना अधिक

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: May 26, 2018 09:39 IST

सीएसडीएस-लोकनीति ने यह सर्वे देश की 543 लोक सभा क्षेत्रों में किया। सर्वे के अनुसार पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता दलितों और आदिवासियों के बीच भी कम हुई है।

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केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के चार साल पूरे होने से ठीक पहले आए एक सर्वे में दावा किया गया है कि पीएम नरेंद्र मोदी 2018 में भी देश के सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री उम्मीद हैं। हालाँकि साल 2014 की तुलना मेंं उनकी लोकप्रियता में गिरावट आयी है। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की लोकप्रियता साल 2014 की तुलना में बढ़ी है। सीएसडीएस-लोकनीति द्वारा किए गये सर्वे में शामिल लोगों में 34 प्रतिशत ने कहा कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में उनकी पहली पसंद होंगे। वहीं 24 प्रतिशत लोगों ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में अपना फेवरेट उम्मीदवार बताया। सीएसडीएस-लोकनीति ने यह सर्वे पूरे देश में किया।

साल 2014 में सीएसडीएस-लोकनीति के ऐसे ही सर्वे में 36 प्रतिशत लोगों ने नरेंद्र मोदी को अपना फेवरेट उम्मीदवार बताया था। साल 2014 में 20 प्रतिशत लोगों ने राहुल गांधी को अपना पसंदीदा पीएम उम्मीदवार बताया था। साल 2014 में राहुल गांधी कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे। राहुल को पिछले साल गुजरात चुनाव के नतीजे आने से ठीक पहले पार्टी का अध्यक्ष चुना गया था। उन्होंने अपनी माँ सोनिया गांधी की जगह ली। 

सीएसडीएस-लोकनीति ने देश के अलग-अलग राज्यों में बीजेपीनीत गठबंधन एनडीए और कांग्रेसनीत गठबंधन यूपीए की लोकप्रियता का भी सर्वे किया। सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 35 प्रतिशत लोगों ने एनडीओ को वोट देने की बात कही, जबकि साल 2014 में करीब 43 प्रतिशत लोगों ने एनडीओ को वोट दिया था। यूपी में करीब 28 प्रतिशत लोगों ने यूपीए को वोट देने की बात कही, जबकि साल 2014 में केवल 24 प्रतिशत लोगों ने यूपीए को अपना पसंदीदा विकल्प बताया था। साल 2014 के लोक सभा चुनाव में एनडीए ने यूपी की 80 संसदीय सीटों में से 73 पर रिकॉर्ड जीत हासिल की थी। 

सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे के अनुसार एनडीए को बिहार में 60 प्रतिशत लोगों ने पसंद किया, जबकि साल 2014 में 51 प्रतिशत ही लोगों ने एनडीओ को चुना था। बिहार में यूपीए की भी लोकप्रियता बढ़ी है। साल 2014 के 28 प्रतिशत की तुलना में 2018 में 34 प्रतिशत लोगों ने यूपीए को पसंद किया। बिहार में इस समय बीजेपी और जदयू की गठबंधन सरकार है। हालांकि विधान सभा चुनाव में जदयू ने राजद और कांग्रेस के साथ गठबंधन करके बीजेपी को चुनाव हराया था। लेकिन डेढ़ साल बाद ही जदयू ने राजद-कांग्रेस का साथ छोड़कर बीजेपी से दोबारा हाथ मिला लिया। 

हैरत की बात है कि पिछले दो दशकों से बीजेपी के शासन वाले राज्य गुजरात में भी एनडीए की लोकप्रियता कम हुई है। साल 2018 में 54 प्रतिशत गुजरातियों ने कहा कि एनडीए उनका पसंदीदा है। साल 2014 में एनडीए 59 प्रतिशत गुजरातियों की पहली पसंद था। गुजरात में यूपीए की लोकप्रियता में नौ प्रतिशत का इजाफा हुआ है। साल 2018 में 42 प्रतिशत गुजरातियों ने कांग्रेस को अपनी पसंद बताया। 

मध्य प्रदेश में भी एनडीए की लोकप्रियता गिरी है। साल 2018 में मध्य प्रदेश के 40 प्रतिशत वोटरों ने एनडीए को अपनी पहली पसंद बताया। साल 2014 में मध्य प्रदेश में 54 प्रतिशत वोटरों ने एनडीओ को अपनी पहली पसंद बताया था। वहीं यूपीए की मध्य प्रदेश में लोकप्रियता काफी बढ़ी है। साल 2014 के 35 प्रतिशत वोटरों की तुलना में 2018 में 50 प्रतिशत मतदाताओं ने यूपीए को अपनी पहली पसंद बताया।

सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे के अनुसार पीएम मोदी की लोकप्रियता दलितों और आदिवासियों के बीच भी कम हुई है। सर्वे में शामिल 25 प्रतिशत दलितों ने ही पीएम मोदी को पसंदीदा पीएम कैंडिडेट बताया, जबकि साल 2014 में 35 दलितों ने उन्हें अपनी पहली पसंद बताया था। सर्वे में शामिल आदिवासियों में 37 प्रतिशत ने पीएम मोदी अपना फवेरेट बताया, जबकि साल 2014 में 42 प्रतिशत आदिवासियों ने उन्हें पहली पसंद बताया था। वहीं 25 दलितों और 30 प्रतिशत आदिवासियों ने राहुल गांधी को पीएम के तौर पर अपनी पहली पसंद बताया।

सीएसडीएस-लोकनीति सर्वे मे इस बात का भी अनुमान लगाया गया है कि अभी चुनाव हो जाएं तो क्या होगा? सर्वे के अनुसार, अभी चुनाव हो जाएं तो बीजेपीनीत एनडीए 274 सीटें जीतेगा, जो बहुमत से दो ज्यादा हैं। वहीं कांग्रेसनीत यूपीए 164 सीटें जीतेगा। साल 2014 के लोक सभा चुनाव में एनडीए को 323 और यूपीए को 60 सीटें मिली थीं। 

सीएसडीएस-लोकनीति ने यह सर्वे देश की 543 लोक सभा क्षेत्रों में किया जिसमें करीब 15000 लोग शामिल हुए। सीएसडीएस-लोकनीति ने यह सर्वे टीवी चैनल इंडिया टुडे के लिए किया था। भारतीय लोक सभा में कुल 545 सीटें हैं जिनमें से दो सीटें मनोनीत सदस्यों के लिए आरक्षित हैं।

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