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दस पड़ोसी देशों को भारत देगा कोरोना वैक्सीन, भूटान बना पहला देश, कोविड-19 टीके की पहली खेप भेजी

By एसके गुप्ता | Updated: January 20, 2021 18:34 IST

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने ट्वीट किया, ‘भारत ने पड़ोसी एवं सहयोगी देशों को कोविड-19 के टीके की आपूर्ति शुरू कर दी। पहली खेप भूटान के लिये रवाना हो गई।’ प्रवक्ता ने ट्वीट के साथ चित्र भी साझा किया।

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ठळक मुद्देमालदीव के लिये कोविड टीके की खेप रवाना हुई।भारत सहायता अनुदान के तहत भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमा, सेशेल्स को कोविड-19 के टीके की आपूर्ति करेगा।पड़ोसी एवं सहयोगी देशों को कोविड-19 के टीके की आपूर्ति बुधवार को शुरू कर दी।

नई दिल्लीः कोरोना काल में पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने की कड़ी में भारत उन्हें कोरोना वैक्सीन दे रहा है।

सबसे पहले भारत की ओर से भूटान, मालदीव, नेपाल, बंग्लादेश, म्यांमार और सेशेल्स देश को वैक्सीन की आपूर्ति की जा रही है। इनके अलावा श्रीलंका, अफगानिस्तान, कंबोडिया, मॉरिशीस और दक्षिण अफ्रीका ने भी भारत से वैक्सीन की मांग की है।

भारत में दो वैक्सीन को आपातकाल मंजूरी मिली है। इसमें कोविशील्ड और कोवाक्सीन शामिल हैं। लेकिन अन्य देशों से कोविशील्ड वैक्सीन की ज्यादा मांग की जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सबसे पहले मालदीव और भूटान को सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड वैक्सीन की खेप भेजी जा रही है।

मालदीव सरकार ने अपने स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों और कोरोना की जंग में लगे योद्धाओं को टीका लगाने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा कि बुधवार यानि आज भूटान, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश और सेशेल्स को भी कोविशील्ड वैक्सीन भेजी जा रही है।

कोविशील्ड की 20 लाख डोज गुरुवार को बांग्लादेश पहुंच जाएगी। विदेश मंत्रालय लगातार हमारे संर्पक में है जिसे हम यह अपडेट दे रहे हैं कि कितनी अतिरिक्त वैक्सीन दूसरे देशों के लिए भेजी जा सकती है।ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत में अभी वैक्सिनेशन अपने शुरुआती दौर में है, लेकिन फिर भी भारत ने अपने पड़ोसी देश की मदद करने का बड़ा कदम उठाया है।

भारत और भूटान के बीच खास रिश्ते को ध्यान में रखते हुए भारत ने कोरोना काल में हर जरूरी सामान की सप्लाई  भूटान के लिए सुनिश्चित की है। भूटान पहला देश है, जिसे भारत की तरफ से कोरोना वायरस वैक्सीन की 1.5 लाख डोजेज तोहफे के रूप में भेजी गई हैं। अन्य देशों से कोविशील्ड की मांग ज्यादा है। इसके पीछे वजह बताई जा रही है कि कोवाक्सीन का फेज-3 ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। इसलिए पड़ोसी देश तीनों ट्रायल पूरी कर चुकी कोविशील्ड की ही मांग कर रहे हैं।

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