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न्यायालय ने डॉक्टर को एम्स के पीजी और पोस्ट डॉक्टरल पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु काउंसलिंग की अनुमति दी

By भाषा | Updated: August 28, 2021 16:14 IST

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उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को निर्देश दिया कि वह एक याचिकाकर्ता डॉक्टर को 31 अगस्त को स्नातकोत्तर और पोस्ट डॉक्टरल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए होने वाली काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दे। न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस मामले में यह आदेश विशेष तथ्यों और परिस्थितियों पर गौर कर पारित किया गया है। इस पर विचार किया गया कि परीक्षा कोविड-19 के अचानक बढ़े मामलों की वजह से समय पर नहीं हुई और इस पर विचार किया गया है कि ऋषिकेश एम्स में अब भी सीट बची हैं। दिल्ली एम्स द्वारा स्नातकोत्तर और पोस्ट डॉक्टरल पाठ्यक्रम के लिए अधिसूचना जारी की गई थी जिसके लिए याचिकाकर्ता विजय कुमार वरादा जो मुंबई स्थित नौसेना चिकित्सा संस्थान, आईएनएचएस अश्विनी में जनरल मेडिसिन में एमडी पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष के छात्र हैं, ने जुलाई 2021 में डॉक्टर ऑफ मेडिसिन पाठ्यक्रम के लिए आवेदन किया था। याचिकाकार्ता वरादा सफलतापूर्वक ऑनलाइन चयन प्रक्रिया में शामिल हुए। इसके अलावा उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये हुए विभागीय नैदानिक/ प्रायोगिक/प्रयोगशाला आधारित आकलन में भी हिस्सा लिया था। उनका चयन ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित एम्स में कार्डियोलॉजी विषय में डॉक्टर ऑफ मेडिसिन पाठ्यक्रम के लिए हुआ था और उनसे एक से 15 जुलाई के बीच अपनी सीट सुरक्षित कराने को कहा गया था। ऐसा नहीं करने पर सीट से वंचित करने की बात कही गई थी। हालांकि, नासिक स्थित महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय राज्य में कोविड-19 के बढ़ते मामलों की वजह से एमडी जनरल मेडिसिन पाठ्यक्रम के अंतिम वर्ष की परीक्षा समय पर नहीं करा पाया। एम्स के दिशानिर्देश के मुताबिक 31 जुलाई तक सीट आरक्षित नहीं कराने पर संस्थान में प्रवेश लेने के लिए अयोग्य ठहराने का प्रावधान है। अदालत में जब 19 जुलाई को सुनवाई हुई तो एम्स दिल्ली और भुवनेश्वर ने बताया कि काउंसलिंग का पहला चरण पहले ही पूरा हो गया है लेकिन सीट आवंटित करने की तरीख पांच अगस्त तक बढ़ाई गई है और पहली काउंसलिंग में उत्तीर्ण छात्र इस तारीख तक प्रवेश ले सकते हैं। अदालत को चार अगस्त को बताया गया कि महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ने एमएस/एमडी पाठ्यक्रम की परीक्षा के लिए 16 से 23 अगस्त की तारीख निर्धारित की है जबकि प्रायोगिक परीक्षाएं 24 और 25 अगस्त को कराई जाएंगी। विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील ने बताया कि याचिकाकर्ता के परिणाम 27 अगस्त तक घोषित कर दिए जाएंगे। शीर्ष अदालत ने पूर्व में निर्देशिका में 31 जुलाई तक प्रवेश की अर्हता रखने संबंधी शर्त पर कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया। अदालत ने मामले की सुनवाई 27 अगस्त के लिए सूचीबद्ध करने के साथ मौखिक टिप्पणी की कि अगर याचिककर्ता इस बीच आवश्यक अर्हता प्राप्त कर लेता है और कोई सीट खाली होती है तो उसे प्रवेश दिया जा सकता है। उच्चतम न्यायालय में शुक्रवार को जब सुनवाई हुई तो महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय द्वारा याचिकाकर्ता के अंतरिम डिग्री प्रमाण पत्र की छाया प्रति अदालत के समक्ष पेश की गई। विश्वविद्यालय की ओर से पेश वकील ने छायप्रति सत्यापित की। वहीं, एम्स की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि एम्स ऋषिकेश में कार्डियोलॉजी विषय में पोस्ट डॉक्टरल पाठ्यक्रम की दो सीटें खाली हैं लेकिन एम्स भुवनेश्वर में कार्डियोलॉजी में डीएम पाठ्यक्रम में कोई सीट नहीं बची है। एम्स के जवाब पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने प्रतिवादी को निर्देश दिया कि अगर याचिकाकर्ता की रुचि है तो उसे 31 अगस्त को निर्धारित काउंसलिंग में शामिल होने की अनुमति दी जाए जो ऋषिकेश एम्स में डीएम पाठ्यक्रम की सीटों के लिए होने वाली है। पीठ ने कहा, ‘‘अगर याचिकाकर्ता को मेरिट लिस्ट में उससे कम रैंक वालों के मुकाबले प्राथमिकता मिले तो यह उचित ही होगा।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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