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पश्चिम बंगाल सरकार का निजी अस्पतालों को सामान्य सेवा बहाल करने का निर्देश, कहा- नहीं मानी गई बात तो...

By भाषा | Updated: May 2, 2020 08:51 IST

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ने निजी अस्पतालों को सामान्य सेवा बहाल करने का निर्देश दे दिया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा है कि निर्देशों का पालन न करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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ठळक मुद्देपश्चिम बंगाल में निजी अस्पतालों को सामान्य सेवा बहाल करने का निर्देश'अस्पतालों में कोविड-19 संक्रमण से मुक्त होने का प्रमाणपत्र मांगने जैसी परिस्थिति से भी निपटने की जरूरत'

पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों को योजनाबद्ध तरीके से सामान्य सेवाओं को बहाल करने का निर्देश जारी किया है। उसने शुक्रवार को बताया कि इन केंद्रों में काम कर रहे चिकित्साकर्मियों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

विभाग ने एक अधिसूचना में कहा, ‘ऐसी रिपोर्टें हैं कि जिन मरीजों को ब्लड ट्रांसफ्यूजन, डायलिसिस, कीमोथेरैपी, प्रसूति देखभाल, प्रसव, प्रतिरक्षा से संबंधित नियमित देखभाल की जरूरत है, वे मुश्किलों का सामना कर रहे हैं क्योंकि निजी अस्पताल और स्वास्थ्य देखभाल केंद्र कोविड-19 की चपेट में आने के डर से या तो काम नहीं कर रहे या मरीजों को वापस लौटा रहे हैं।’ 

उसने कहा, ‘कुछ अस्पताल मरीजों को भर्ती करने से पहले उनसे कोविड-19 संक्रमण से मुक्त होने का प्रमाणपत्र मांग रहे हैं। ऐसी स्थिति से तत्काल निपटने की आवश्यकता है।’ इसमें कहा गया है कि निर्देशों का पालन न करने पर संबंधित स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

केंद्र और ममता सरकार में तनातनी

बता दें केंद्र सरकार ने देश में लॉकडाउन को दो हफ्ते के लिए बढ़ाने की घोषणा शुक्रवार को कर दी। लॉकडाउन अब 17 मई तक जारी रहेगा। इस फैसले को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल भी उठाए।

तृणमूल कांग्रेस ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थिति का लेखा-जोखा दिए बिना और कोरोना लॉकडाउन से खराब हो रही अर्थव्यवस्था के पुनरुद्धार के लिए बिना रोडमैप पर बात किए ये फैसला क्यों लिया गया। साथ ही टीएमसी ने केंद्र पर पश्चिम बंगाल के ‘रेड जोन’ के त्रुटिपूर्ण आकलन का आरोप भी लगाया। पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को केंद्र को पत्र लिख कर जोर देते हुए कहा कि राज्य में 10 नहीं, बल्कि चार ही जिले ‘रेड जोन’ हैं।

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