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भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड, कोवैक्सीन दुनिया में धूम मचाने को तैयार, चीनी वैक्सीन केवल 50% असरदार

By हरीश गुप्ता | Updated: January 15, 2021 08:22 IST

कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन को लेकर चीन पर भरोसा दुनिया को नहीं हो रहा है। चीनी वैक्सीन कोरोनावैक के केवल 50% असरदार होने की बात सामने आने के बाद भारतीय वैक्सीन की ओर दुनिया देखने लगी है।

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ठळक मुद्दे चीनी वैक्सीन कोरोनावैक 50% असरदार, अब कई देशों को भारतीय वैक्सीन से ही आसब्राजील, इंडोनेशिया सहित 10 अन्य देशों के लिए बड़ी मुश्किल, चीन से वैक्सीन के लिए पहले किया था अनुबंध ब्राजील सहित अब दूसरे देश भारत से चर्चा में जुटे, भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड, कोवैक्सीन की मांग

चीन की कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर उठती आशंकाओं के बीच भारतीय वैक्सीन कोविशील्ड, कोवैक्सीन पूरी दुनिया में धूम मचाने की तैयारी में है.

चीनी वैक्सीन कोरोनावैक के केवल 50% असरदार होने की बात सामने आने के बाद ब्राजील सहित ट्रायल में भाग लेने वाले अनेक देश अब भारतीय वैक्सीन से आस लगाए बैठे हैं. वैक्सीन आपूर्ति के मामले में भारत दुनिया में नंबर वन है.

वैसे भी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के तत्वावधान में गेवि-कोवैक्स के साथ अनुबंध किया है. इसके तहत बांग्लादेश को चालीस करोड़ डोज की आपूर्ति की जा रही है.

कोरोना वायरस वैक्सीन पर ब्राजील से चर्चा

चीन की वैक्सीन पर पूरी तरह से निर्भर ब्राजील, इंडोनेशिया सहित 10 अन्य देशों के सामने चीनी वैक्सीन की नाकामी के कारण गंभीर समस्या उठ खड़ी हुई है. इन देशों ने कोरोनावैक के साथ चालीस करोड़ डोज का अनुबंध किया था. सूत्रों के मुताबिक कोवैक्सीन की आपूर्ति के लिए भारत बायोटेक की ब्राजील के साथ चर्चा शुरू हो चुकी है.

सशर्त निर्यात की अनुमति भारत सरकार ने घरेलू जरूरतों की पूर्ति के बाद वैक्सीन निर्माता कंपनियों को वैक्सीन निर्यात की मंजूरी दे रखी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद डॉ. वी.के. पॉल के नेतृत्व वाले टास्क फोर्स और विदेश मंत्रालय के साथ मिलकर वैश्विक जरूरतों की पूर्ति की दिशा में काम कर रहे हैं.

Corona Vaccine सीरम इंस्टट्यूट की 10 करोड़ की क्षमता

सीरम की क्षमता इस वक्त प्रति माह 10 करोड़ वैक्सीन उत्पादन की है. उसे बिल गेट मेलिंडा फाउंडेशन की ओर से गेवी को वैक्सीन की आपूर्ति के लिए 300 मिलियन डॉलर की मदद भी मिल चुकी है. भारत बायोटेक भी अपनी सालाना 10 करोड़ वैक्सीन की क्षमता को बढ़ाकर 20 करोड़ वैक्सीन प्रति वर्ष कर सकता है.

सरकार कह चुकी है कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन को पड़ोसी देशों श्रीलंका, मालदीव के अलावा अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी देशों को निर्यात किया जा सकता है.

अगले चरण में भूटान, नेपाल, अफगानिस्तान, म्यांमार को वैक्सीन भेजी जाएगी. कई नेताओं से बात प्रधानमंत्री मोदी ने सार्क देशों से इस संबंध में पहले ही चर्चा कर ली है. पिछले सप्ताह केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा था कि भारतीय प्राथमिकताओं की पूर्ति होने के बाद वैक्सीन के निर्यात पर कोई पाबंदी नहीं होगी.

टॅग्स :कोरोना वायरसकोविड-19 इंडियाचीन
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