नई दिल्लीः कोरोना का सबसे ज्यादा शिकार 45 साल से अधिक उम्र वाले लोग हो रहे हैं। मृतकों में इनकी संख्या 85 फीसदी है। अच्छी बात यह है कि देश का कोरोना डबलिंग रेट बढ़कर 30 दिन हो गया है।
जहां तक रोजाना कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात है तो मौजूदा स्थिति में कोरोना के एक्टीव केसों से ज्यादा संख्या उन लोगों की है जो कोरोना से जंग जीतकर अपने घर लौट गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के ओएसडी राजेश भूषण ने गुरुवार को मीडिया से मुखातिब होते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना वैक्सीन पर बहुत तेजी से काम चल रहा है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के ओएसडी राजेश भूषण ने कहा कि देश के 733 जिलों में से 49 जिलों में ही कोरोना के 80 फीसदी रोगी हैं। इससे जाहिर होता है कि देश में कोरोना कम्युनिटी ट्रांसफर के फेज में नहीं है। जिसे जिले में एक्टीव केस होते हैं। वहां निर्धारित 72 घंटों में ट्रेस और ट्रैक कर लोगों को क्वारंटाइन कर संक्रमण को फैलने से रोकने का प्रोटकॉल अमल में लाया जाता है। जिससे स्थिति में सुधार हुआ है।
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आयु वर्ग –आबादी प्रतिशत में –कोरोना से मौत का प्रतिशत
0-14 आयु -35 फीसदी-01 फीसदी
15-29 आयु -18 फीसदी –03 फीसदी
30-44 आयु – 22 फीसदी –11 फीसदी
45-59 आयु -15 फीसदी -32 फीसदी
60-74 आयु -08 फीसदी-39 फीसदी
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वैक्सीन जल्द तैयार करने की कोशिश :
स्वास्थ्य मंत्रालय के ओएसडी राजेश भूषण ने कहा कि जहां तक कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन बनाने की बात है तो उस पर तेजी से काम चल रहा है। भारत बायोटेक और कैडिला ने एनिमल (चूहें, गिनी) पर वैक्सीन की स्टडी के बाद डीसीजीआई से इसके ह्यूमन ट्रायल की अनुमति मांगी थी।
डीसीजीआई ने इसके फेज-एक और फेज-दो ट्रायल की अनुमति दी है। जिसकी अनुमति मिलने के बाद आईसीएमआर ने कुछ संस्थानों को अधिसूचित किया है। जहां वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल होगा और उसके परिणाम से देश को अवगत कराया जाएगा।