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"संविधान उनके खिलाफ एक्शन लेने की इजाजत देता है, जो देश की अखंडता को खतरा पहुंचाते हैं", मनोज सिन्हा ने कहा

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: August 21, 2023 12:23 IST

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रशासन आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा क्योंकि संविधान भी इसकी इजाजत देता है।

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ठळक मुद्देमनोज सिन्हा ने सरकारी कर्मचारियों के कथित आतंकी कनेक्शन पर दी सख्स एक्शन की चेतावनी सरकार आतंकी गतिविधियों में शामिल सरकारी कर्मचारियों पर एक्शन लेने में संकोच नहीं करेगी संविधान ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त होने की अनुमति देता है, जो देश के खिलाफ काम करते हैं

जम्मू: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रशासन आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने में संकोच नहीं करेगा क्योंकि संविधान भी इसकी इजाजत देता है।

उपराज्यपाल सिन्हा ने बीते रविवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि देश का संविधान अधिकारियों को उन लोगों के खिलाफ सख्त होने की अनुमति देता है, जो अवैध तरीकों से सरकारी नौकरियों का आनंद लेते हैं और आतंकवाद का समर्थन करते हैं। ऐसे लोग राष्ट्रीय अखंडता के लिए खतरा पैदा करते हैं। इसलिए आवश्यक है कि इनके साथ सख्ती से निपटा जाए।

उन्होंने कहा, "ऐसा हमारे संविधान में प्रावधान है कि राज्य या राष्ट्र की अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आतंकी गतिविधियों में शामिल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना हमारी सरकार की प्राथमिकता है, जिन्होंने अवैध तरीकों से सरकारी नौकरियां हासिल की हैं।”

उपराज्यपाल सिन्हा ने यह बात विशेष रूप से संविधान का अनुच्छेद 311 के तहत संघ या राज्य सरकारों में कार्य करने वाले सिविल कर्मचारियों की बर्खास्तगी, निष्कासन या उनकी रैंक में कमी के संबंध में कही।

मनोज सिन्हा का यह बयान जम्मू-कश्मीर बैंक के मुख्य प्रबंधक सज्जाद बजाज के कथित आतंक कनेक्शन के बाद किये गये बर्खास्तगी के एक दिन बाद आया है।

इससे पहले पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कश्मीरी कर्मचारियों को "आतंकवादी समर्थक" बताकर सेवा से "चुनिंदा तरीके से बर्खास्त करने" के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन की आलोचना की थी।

महबूबा मुफ्ती ने कहा था, "कश्मीरी कर्मचारियों को गलत तरीके से आतंकवादी समर्थक और आईएसआई समर्थक बताकर चुनिंदा तरीके से बर्खास्त करना सामान्य बात हो गया है। आरोपी को जज और जूरी के रूप में काम करने वाली सरकार के साथ अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका नहीं दिया जाता है। यह गुंडागर्दी कश्मीरियों को डराने के लिए है।"

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