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बिहार में कांग्रेस कराएगी ’जय बापू-जय भीम-जय संविधान’ सम्मेलन, प्रदेश अध्यक्ष ने किया ऐलान

By एस पी सिन्हा | Updated: January 19, 2025 16:03 IST

प्रदेश कांग्रेस ने अब राज्य में ’जय बापू-जय भीम-जय संविधान’ सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। फरवरी के दूसरे सप्ताह से इस सम्मेलन की शुरुआत चम्पारण से होगी।

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ठळक मुद्देफरवरी के दूसरे सप्ताह से इस सम्मेलन की शुरुआत चम्पारण से होगीकांग्रेस ने आरोप लगाया कि नीतीश सरकार जातीय सर्वे की रिपोर्ट पर अमल नहीं कर पा रही हैकहा- आरक्षण का दायरा नहीं बढ़ाया गया और न हीं उसे नौवी अनुसूची में शामिल कराया गया

पटना: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बिहार दौरे बाद अब प्रदेश कांग्रेस ने अब राज्य में ’जय बापू-जय भीम-जय संविधान’ सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया है। फरवरी के दूसरे सप्ताह से इस सम्मेलन की शुरुआत चम्पारण से होगी। इसमें केंद्रीय नेताओं को भी बुलाया जाएगा। रविवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने जानकारी देते हुए कहा कि नीतीश सरकार जातीय सर्वे की रिपोर्ट पर अमल नहीं कर पा रही है। 

उन्होंने कहा कि आरक्षण का दायरा नहीं बढ़ाया गया और न हीं उसे नौवी अनुसूची में शामिल कराया गया। 95 लाख गरीबों को भी दो-दो लाख नहीं दिए गए। मतलब साफ है कि नीतीश सरकार भाजपा के दबाव में काम कर रही है। अखिलेश सिंह ने कहा कि कांग्रेस का यह सम्मेलन बिहार में पार्टी को मजबूत करने और भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। 

पार्टी इस सम्मेलन के माध्यम से महात्मा गांधी, भीमराव अंबेडकर और भारतीय संविधान के आदर्शों को जनता के बीच ले जाना चाहती है। जातीय सर्वे रिपोर्ट पर नीतीश सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि सरकार इस रिपोर्ट पर अमल नहीं कर रही है और आरक्षण का दायरा नहीं बढ़ाया जा रहा है। 95 लाख गरीबों को भी दो-दो लाख नहीं दिए गए। नीतीश सरकार भाजपा के दबाव में काम कर रही है। 

बता दें कि इससे पहले  राहुल गांधी ने शनिवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से इंडिया’ गठबंधन के घटक दलों के साथ मिलकर बिहार में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विचार को हराने का आह्वान किया था। संविधान की रक्षा सिर्फ कांग्रेस पार्टी का कार्यकर्ता कर सकता है। कांग्रेस पार्टी की विचारधारा नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान वाली विचारधारा है और दूसरी तरफ भाजपा-आरएसएस की विचारधारा नफरत व हिंसा की विचारधारा है। 

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