नई दिल्लीः कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने लोकसभा और राज्यसभा में अपने सभी सांसदों को 16 से 18 अप्रैल तक सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन-पंक्ति का व्हिप जारी किया है। पार्टियों ने अपने सभी सांसदों को आगामी संसदीय सत्र के दौरान सदन में उपस्थित रहने और पार्टी के रुख का समर्थन करने का निर्देश दिया है।
संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र इसी महीने की 16 तारीख से शुरू होने वाला है, जिसमें महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे पहले, भाजपा ने भी लोकसभा और राज्यसभा में अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए तीन-पंक्ति का व्हिप जारी किया था।
कांग्रेस ने अपने लोकसभा सदस्यों को व्हिप जारी कर कहा है कि वे आगामी 16 से 18 अप्रैल तक होने वाली सदन की तीन दिवसीय बैठक के दौरान उपस्थित रहें तथा पार्टी के रुख का समर्थन करें। पार्टी ने अपने लोकसभा सदस्यों के लिए यह व्हिप उस वक्त जारी किया है, जब सरकार संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत हो रही इस तीन दिवसीय बैठक के दौरान महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने से संबंधित संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को लाने की तैयारी में हैं।
कांग्रेस नेता सुप्रिया सुनेत्र ने कहा कि आज से 30 महीने पहले सितंबर, 2023 में मोदी सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लेकर आई, जिसमें महिला आरक्षण की बात थी। मगर तब स्थिति ऐसी थी कि सरकार की मंशा साफ़ नहीं हो रही थी। सरकार ने संविधान संशोधन किया और इसमें शर्त डाली गई कि पहले सेंसस होगा, फिर डिलिमिटेशन होगा और इसके बाद महिला आरक्षण लागू होगा।
तब कांग्रेस अध्यक्ष और CPP चेयरपर्सन सोनिया गांधी जी ने कहा था कि महिला आरक्षण को बिना शर्त 2024 में ही लागू होना चाहिए, ताकि महिलाएं चुनकर सदन में आएं। लेकिन 30 महीने बाद नरेंद्र मोदी को जाने क्या हुआ- अब वो अपनी ही मर्जी से बनाया हुआ कानून बदलने जा रहे हैं। आज 'The Hindu' अखबार में CPP चेयरपर्सन सोनिया गांधी जी ने मोदी सरकार के जुमले की कलई खोल दी है।
सोनिया गांधी ने साफ कहा है-
⦿ महिला आरक्षण मुद्दा नहीं है, वो तो सदन में पास हो चुका है
⦿ कांग्रेस ने खुद कहा है कि महिला आरक्षण को बिना जाति जनगणना और डिलिमिटेशन की शर्त के तुरंत लागू कीजिए
⦿ असल मुद्दा 'महिला आरक्षण' का नहीं- 'डिलिमिटेशन' का है। मोदी सरकार महिला आरक्षण के पीछे छिपकर साजिश कर रही है।
आप सभी की याद ताजा करने के लिए बता दें कि जिस नींव पर महिला आरक्षण लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा में आएगा, उस नींव को डालने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया था। 73वें, 74वें संविधान संशोधन के चलते पंचायती राज में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने काम कांग्रेस पार्टी ने किया था और इसके सबसे बड़े समर्थक और जनक राजीव गांधी जी थे।
इस फैसले का नतीजा है कि आज 15 लाख से ज्यादा निर्वाचित महिलाएं पंचायती राज में सक्रिय हैं। इनकी कुल संख्या 40% से ज्यादा है। कांग्रेस पार्टी ने महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने का काम सर्वसम्मति से किया था। इसके लिए सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई थी और लंबे समय तक विचार-विमर्श किया गया था।