महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और एनसीपी नेता शरद पवार के बीच कोरेगांव मामले को लेकर बढ़ रहे विवाद के बीच सीएम ठाकरे ने बयान दिया है। सीएम ने कहा है कि एलागर परिषद केस व कोरेगांव भीमा केस दो अलग-अलग मामला है।
इसका साथ ही उद्धव ठाकरे ने कहा कि मैंने नरेंद्र मोदी सरकार को जांच के लिए सिर्फ एलागार परिषद केस सौंपा है। इसके अलावा, ठाकरे ने यह भी कहा है कि कोरेगांव मामला दलित समाज के लोगों से जुड़ा है। इस मामले से जुड़ी किसी भी तरह की सबूत आदि को प्रदेश सरकार ने जांच के लिए केंद्र सरकार की संस्थाओं को नहीं सौंपा है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा कोरेगांव मामले में लिए गए फैसले से नाराज एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने अपनी पार्टी के सभी मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में पार्टी के सभी मंत्रियों के साथ बैठक करके बड़ा फैसला लिया था। बैठक के बाद एनसीपी के नेता व प्रदेश सरकार में मंत्री नवाब मलिक ने कहा था कि राज्य सरकार की एसआईटी सामानांतर रूप से मामले की जांच करेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रदेश सरकार की गृह मंत्रालय जल्द कोई फैसला लेगी।
बता दें कि बैठक की बात शरद पवार के माध्यम से मीडिया में आते ही तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। दरअसल, भीमा कोरेगांव मामले की जांच एनआईए को देने के बाद से माना जा रहा है कि पवार नाखुश हैं। पहले कहा गया था कि भीमा कोरेगांव मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस करेगी, लेकिन इसके बाद उद्धव ठाकरे ने एनआईए को इस मामले की जांच सौंपने का फैसला कर लिया था। इसके बाद से पवार और ठाकरे के बीच विवाद शुरू हो गया है।
मीडिया में आ रहे खबरों को देखें तो ठाकरे से शरद की नाराजगी सिर्फ कोरेगांव मामले पर नहीं है। इसके अलावा NPR को लेकर भी दोनों पार्टी के अलग-अलग स्टैंड रहे हैं। इसके अलावा उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को भी मंजूरी दे दी है।
दरअसल, भीमा कोरेगांव मामले की जांच एनआईए को देने के बाद से माना जा रहा है कि पवार नाखुश हैं। पहले कहा गया था कि भीमा कोरेगांव मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस करेगी, लेकिन इसके बाद उद्धव ठाकरे ने एनआईए को इस मामले की जांच सौंपने का फैसला कर लिया। इसके बाद से पवार और ठाकरे के बीच विवाद शुरू हो गया।