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Bihar: प्रशांत किशोर के बयान पर सीएम नीतीश कुमार ने दिया जवाब, कहा-कौन क्या बोलता है उसका कोई महत्व नहीं

By एस पी सिन्हा | Updated: May 6, 2022 15:54 IST

सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में बहुत काम हुआ है और लोग इस बात को जानते हैं। 'कौन क्या बोलता है इसका महत्व नहीं है। महत्व सत्य का है।

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ठळक मुद्देसीएए लागू करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कोरोना से निपटना हैकोयला संकट पर बोले सीएम- संकट से निपटने के लिए हम प्रयास कर रहे हैं

पटना: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के द्वारा बिहार में लालू और नीतीश राज में विकास नहीं होने के आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि कौन क्या बोलता है उसका कोई महत्व नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार में बहुत काम हुआ है और लोग इस बात को जानते हैं। 'कौन क्या बोलता है इसका महत्व नहीं है। महत्व सत्य का है।

बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के भवनों का शिलान्यास एवं कार्यारंभ समारोह में शामिल होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सब जानते हैं कि क्या हुआ है, कितना काम किया गया है। इन सब चीजों का तो हम आपसे आग्रह करेंगे कि खुद ही देखिए। 

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कोरोना थमने के बाद सीएए लागू करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कोरोना से निपटना है। सबसे बड़ी बात है कि अभी कोरोना के केस बढ़ रहे हैं। हमको ज्यादा चिंता है कोरोना से लोगों की रक्षा करने की। पॉलिसी की बात होगी तो उसको अलग से देखेंगे। हमने बाकी चीजों को अभी देखा नहीं है। 

देश में कोयला संकट पर उन्होंने कहा कि संकट की स्थिति में जो भी राज्य सरकार से संभव है, काम करने की कोशिश करेगी। आप तो जानते हैं कि संकट तो एक जगह पर होता नहीं है अनेक जगह पर होता है जो भी हमलोग कर सकते हैं वो करने का प्रयास करेंगे। 

यहां बता दें कि प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार के साथ व्यक्तिगत रिश्तों का हवाला दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि नीतीश कुमार उनके पिता तुल्य हैं। लेकिन साथ ही साथ पीके ने नीतीश सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि लालू यादव से लेकर नीतीश कुमार तक के शासनकाल में बिहार के अंदर आधारभूत विकास की संरचना विकसित नहीं की गई। पीके का कहना है कि आज भी बिहार सबसे पिछड़ा और गरीब राज्य है। विकास के ज्यादातर मानकों में बिहार सबसे निचले पायदान पर खड़ा है। यह मेरा नहीं, बल्कि नीति आयोग का आंकलन है।

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