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Chandrayaan-2: भारत के चंद्र मिशन के पीछे है इन 7 लोगों का बड़ा योगदान, दो महिलाओं का जिक्र बेहद जरूरी

By आदित्य द्विवेदी | Updated: September 8, 2019 08:52 IST

चंद्रयान-2 मिशन से भले ही अपेक्षित 100 प्रतिशत सफलता ना मिली हो लेकिन इस बेहद मुश्किल मिशन के पीछे कई लोगों ने दिन-रात एक कर दिए। हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के चंद्र मिशन से जुड़े सात लोगों के नाम...

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ठळक मुद्देचंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की असफलता के बाद इसरो के अध्यक्ष के. सिवन रो पड़े थे।एम. वनिता इसरो के किसी प्लानेटरी मिशन की पहली महिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं।

चंद्रयान -2 के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया। संपर्क तब टूटा, जब लैंडर चांद की सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर था। चंद्रयान-2 के लैंडर ‘विक्रम’ का चांद पर उतरते समय जमीनी स्टेशन से संपर्क टूटने पर इसरो के पूर्व अध्यक्ष जी. माधवन नायर ने शनिवार को कहा कि चंद्रयान-2 अपने मिशन के 95 प्रतिशत उद्देश्यों में सफल रहा है। चंद्रयान-2 मिशन से भले ही अपेक्षित 100 प्रतिशत सफलता ना मिली हो लेकिन इस बेहद मुश्किल मिशन के पीछे कई लोगों ने दिन-रात एक कर दिए। हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के चंद्र मिशन से जुड़े सात लोगों के नाम जिसमें दो महिलाओं का जिक्र करना बेहद जरूरी है।

1. डॉ के. सिवन, चेयरमैन (इसरो)

चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम के चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की असफलता के बाद इसरो के अध्यक्ष के. सिवन रो पड़े। इससे पहले सिवन ने रुंधे गले से घोषणा की कि लैंडर का जमीनी स्टेशन से संपर्क टूट गया है और आंकड़ों का विश्लेषण किया जा रहा है। सिवन के सहकर्मी उन्हें कठिन काम को पूरा करने में माहिर लेकिन सादा और हंसमुख व्यक्ति बताते हैं।

2. एस सोमनाथ, निदेशक (विक्रेम साराभाई स्पेश सेंटर)

इसरो के दिग्गज जो 30 सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। एस सोमनाथ ने आईआईएससी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। वो चंद्रयान-2 के लॉन्च व्हिकल टीम के मुखिया थे।

3. वी नारायनन, निदेशक (लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर)

लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर के निदेशक वी नारायनन क्रायोजेनिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी के एक्सपर्ट हैं। जीएसएलवी मार्क3 रॉकेट ने जैसे ही चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष के ऑर्बिट में पहुंचाया एलपीएसी ने वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए सफल लॉन्चिंग का संदेश जारी किया था।

4. पी कुन्नीकृष्णन, निदेशक (यू आर राव सैटेलाइट सेंटर)

चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट के कंपोनेंट बनाने में सैटेलाइट सेंटर ने बेहद अहम योगदान दिया। इसमें ऑर्बिटर, विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर शामिल था। इसरो के दिग्गज वैज्ञानिक उन्नीकृष्णन पीएसएलवी रॉकेट प्रोग्राम के भी डायरेक्टर रह चुके हैं और 2010 से 2015 के बीच 13 पीएसएलवी मिशन को सफल बना चुके हैं इसमें मार्स ऑर्बिटर मिशन भी शामिल था।

5. वीवी श्रीनिवासन, निदेशक (इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क)

चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट की लॉन्चिंग के बाद उसकी हेल्थ, परफॉर्मेंस और ट्राजेक्ट्री को मॉनिटर और कंट्रोल करने की जिम्मेदारी बेंगलुरु के ISTRAC के पास ही थी। श्रीनिवासन ने इसरो सैटेलाइट सेंटर में कई सालों तक कम्यूनिकेश इंजीनयर के तौर पर काम किया। उन्होंने चंद्रयान-1 मिशन के लिए भी अहम योगदान दिया था।

6. एम. वनिता, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, चंद्रयान-2 मिशन

एम. वनिता इसरो के किसी प्लानेटरी मिशन की पहली महिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं। उन्होंने 20 महीने पहले चंद्रयान-2 मिशन को बतौर प्रोजेक्ट डायरेक्टर ज्वॉइन किया था। वो कम्यूनिकेशन सिस्टम इंजीनयर हैं। सिस्टम के जुड़े सभी प्रकार के ऑपरेशन के लिए निर्णय लेने का अधिकार उन्हीं के पास था। एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की तरफ से 2006 में उन्हें बेस्ट महिला वैज्ञानिक का अवार्ड भी मिल चुका है।

7. रितु करिधल, मिशन डायरेक्टर, चंद्रयान-2

एक एयरोस्पेस इंजीनियर के तौर रितु करिधन को को चंद्रयान-2 स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में दिशा दिखाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने स्पेसक्राफ्ट को चंद्रमा के ऑर्बिट में पहुंचाने और चांद पर उतारने की जिम्मेदारी थी।

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