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फतेहपुर में पराली जलाने के आरोप में किसानों पर मामला दर्ज, मायावती ने की निंदा

By भाषा | Updated: November 7, 2020 18:40 IST

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फतेहपुर/लखनऊ सात नवम्बर फतेहपुर जिले में कथित रूप से पराली (पुआल) जलाने के आरोप में दो दिनों के भीतर दर्जनों किसानों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर उनके खिलाफ पुलिस निरोधात्मक कार्रवाई की है।

पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि "फतेहपुर जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में फसल के अवशेष या धान की पराली (पुआल) जलाने के आरोप में पिछले दो दिनों के भीतर दर्जनों किसानों के खिलाफ अभियोग (मुकदमा) दर्ज किए गए हैं और राजस्व अधिकारियों ने उनसे जुर्माना वसूला है।"

उधर, उत्तर प्रदेश में पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ हो रही कार्रवाई की बहुजन समाज पार्टी (बसपा)सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को निंदा की।

हालांकि, शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के अधिकारियों को आगाह कर चुके हैं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि पराली जलाने को लेकर किसानों के साथ कोई दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न न हो।

पराली जलाने के मामले में किसानों पर दर्ज मुकदमों के बारे हुसेनगंज थाने के प्रभारी निरीक्षक सत्येन्द्र सिंह भदौरिया ने शनिवार को बताया, "बृहस्पतिवार को थाना क्षेत्र के भैरमपुर कठेरवां गांव के किसान क्षत्रपाल, इन्द्रपाल व बृजेश लोधी के अलावा बसोहनी गांव के अचल सिंह, अशोक पटेल, मवई गांव के रहने वाले किसान मेवालाल, संग्रामपुर के सियाराम, ऊंचाबेरा के शिवराम मौर्य व रुस्तम सिंह और बेरागढ़ीवा गांव में कुल आठ किसानो के खिलाफ मुकदमा दर्जकर कार्रवाई की गयी।"

उन्होने कहा कि "जुर्माना वसूलने की कार्रवाई उपजिलाधिकारी के स्तर से हुई है, सभी किसानों के खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की गई है।"

इसी प्रकार मलवां थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) शेर सिंह राजपूत ने बताया कि " पराली जलाने पर कोराई गांव के पंकज सिंह, जगदीश, हरिबक्श सिंह, धीरेन्द्र, अनिल, अभिलाष सिंह, तेज बहादुर (निवासी दीवान का पुरवा मजरा अस्ता) के अलावा सहिली चौकी क्षेत्र के रावतपुर गांव निवासी अनिल पटेल के खिलाफ मुकदमा दर्जकर उन्हें गिरफ्तार कर निरोधात्मक कार्रवाई की गयी है।"

उन्होंने बताया कि "उपजिलाधिकारी के जमानत न दिए जाने पर आठ किसानों को जेल भेज दिया गया है। इन किसानों से 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी वसूला गया है।"

सदर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रवीन्द्र श्रीवास्तव ने बताया, "मदारीपुर कला गांव के राम सेवक, मऊ गांव के राज बहादुर तथा मिट्ठनपुर गांव के किसान बाबूलाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है और इन किसानों से 10-10 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया है।"

थरियांव थाने के प्रभारी निरीक्षक उपेन्द्रनाथ राय ने बताया, "शुक्रवार देर रात तक कई गांवों के 14 किसानों के खिलाफ पराली जलाने के मुकदमे दर्ज किए गए हैं, इनमें शंकरपुर-हसवा की सावित्री देवी, पृथ्वीपाल, अस्वाबख्शपुर गांव के गुलाब सिंह, मनोज सिंह, कपूर सिंह व गिरिजा शंकर, वीर बुद्दनपुर गांव के कालीचरण, धर्म सिंह व शिव सिंह, आकूपुर गांव की रामरानी, रामआसरे, सन्तोष, नन्दकिशोर, रामकिशोर शामिल हैं।"

इससे करीब एक पखवारा पहले खखरेरू थाना में छह और खागा कोतवाली क्षेत्र में चार किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्जकर जुर्माना वसूला गया है।

पुलिस विभाग के आंकड़ों से राजस्व विभाग के आंकड़े अलग हैं। जिला कृषि अधिकारी बृजेश कुमार सिंह कहते हैं, "अब तक जिले में कुल 28 किसानों के खिलाफ पराली जलाने पर कार्रवाई की गई है और उनसे जुर्माना वसूला गया है।"

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर कहा,"एक पखवाड़े के भीतर 100 से ज्यादा किसानों के खिलाफ पराली जलाने के मुकदमे लेखपालों की तहरीर पर दर्ज की गई है और उनसे जुर्माना वसूला जा चुका है।"

उन्होंने कहा,"कृषि विभाग शासन को पूरे आंकड़े नहीं भेज रहा है, इससे तस्वीर साफ नहीं हो पा रही।"

बुंदेलखंड़ किसान यूनियन के अध्यक्ष विमल कुमार शर्मा ने इसे किसानों का दमन करार देते हुए कहा,"फतेहपुर जिले में ईंट-भट्ठे की कई चिमनियां दिन-रात धुंआ उगल रही हैं, उनके मालिकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि लेखपालों की तहरीर पर किसानों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्जकर उन्हें जेल भेजा जा रहा है।"

शर्मा ने कहा,"किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस न लिए गए तो उनका संगठन प्रदेश स्तर पर एक बड़ा आंदोलन शुरू करेगा।"

बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को ट्वीट किया, ''यू.पी. में फैले प्रदूषण को लेकर खासकर यहां पराली जलाने की आड़ में किसानों के साथ हो रही जुल्म-ज्यादती अति निन्दनीय, जबकि इस मामले में सरकार को कोई भी कार्यवाही करने से पहले, उन्हें जागरूक व जरूरी सहायता देने की भी जरूरत। बीएसपी की यह मांग।''

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को कहा था कि पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण के दुष्प्रभाव से किसानों को निरन्तर जागरूक किया जाए। उन्होंने कृषि विभाग को निर्देशित किया कि वह इस सम्बन्ध में किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करे।

एक सरकारी बयान के मुताबिक उन्होंने कहा था कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पराली जलाने के खिलाफ कार्रवाई के दौरान किसानों के साथ कोई दुर्व्यवहार अथवा उत्पीड़न नहीं हो।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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