How to see Buddha relics in Delhi: दिल्ली में पिपरहवा के अवशेषों की प्रदर्शनी इतिहास और आध्यात्मिकता में रुचि रखने वालों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अवसर है। ये अवशेष भगवान बुद्ध से जुड़े सबसे प्रामाणिक साक्ष्यों में से एक माने जाते हैं। आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का उद्घाटन होने वाला है जिसके बाद यह हर कोई आकर इस प्रदर्शनी को देख सकते हैं।
इन अवशेषों की खोज 1898 में हुई थी और प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में इनका अहम स्थान है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि ये अवशेष भगवान बुद्ध से सीधे तौर पर जुड़े सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण संग्रहों में से हैं।
इसमें कहा गया है कि पुरातात्विक साक्ष्य पिपरहवा स्थल को प्राचीन कपिलवस्तु से जोड़ते हैं, जिसे व्यापक रूप से उस स्थान के रूप में पहचाना जाता है जहां भगवान बुद्ध ने संन्यास लेने से पहले अपना प्रारंभिक जीवन व्यतीत किया था।
इस भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का नाम ‘द लाइट एंड द लोटस: रेलिक्स ऑफ द अवेकन्ड वन’ है। इसमें पहली बार एक साथ वे पिपरहवा अवशेष प्रदर्शित किए जाएंगे जिन्हें सौ साल से ज्यादा समय बाद भारत लाया गया है। बयान में कहा गया है कि पिपरहवा अवशेष प्रारंभिक बौद्ध धर्म के पुरातात्विक अध्ययन में एक केंद्रीय स्थान रखते हैं।
इसके मुताबिक, इस प्रदर्शनी में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के साथ भारत के गहरे और निरंतर सभ्यतागत संबंध को रेखांकित किया गया है और यह भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बयान में कहा गया कि सरकार के निरंतर प्रयासों, संस्थागत सहयोग और अभिनव सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम हाल में इन अवशेषों को स्वदेश लाया जा सका।
प्रदर्शनी की खासियत
भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष (Holy Relics): पिपरहवा (उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर जिला) को प्राचीन कपिलवस्तु माना जाता है। यहाँ हुई खुदाई में अस्थि कलश मिले थे, जिनके बारे में माना जाता है कि ये भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद उनके शाक्य वंश के लोगों को मिले उनके अवशेषों का हिस्सा हैं।
ऐतिहासिक प्रमाण: खुदाई में मिले कलशों पर ब्राह्मी लिपि में लेख खुदे हैं, जो इस स्थान के कपिलवस्तु होने की पुष्टि करते हैं। यह इतिहास प्रेमियों के लिए एक 'टाइम मशीन' जैसा अनुभव है।
थाईलैंड का स्वर्ण कलश: वर्तमान में ये पवित्र अवशेष राष्ट्रीय संग्रहालय में एक शानदार सोने के बने कलश (Casket) में रखे गए हैं, जो थाईलैंड सरकार द्वारा भेंट किया गया था।
बौद्ध कला का संगम: इस प्रदर्शनी में केवल अवशेष ही नहीं, बल्कि उस काल की मूर्तियाँ, सिक्के और मिट्टी के बर्तन भी देखने को मिलते हैं, जो 2500 साल पुरानी सभ्यता की झलक दिखाते हैं।
क्या आम लोग इसे देख सकते हैं?
जी हाँ, यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए पूरी तरह खुली है। यह दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय की स्थायी दीर्घा का हिस्सा है, जिसे 'बुद्ध अवशेष गैलरी' के नाम से जाना जाता है।
कब, कहाँ और कैसे देखें?
विवरण जानकारी
स्थान राष्ट्रीय संग्रहालय , जनपथ, नई दिल्ली (इंडिया गेट के पास)।
समय सुबह 10:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।
कार्य दिवस मंगलवार से रविवार (यह सोमवार और राष्ट्रीय छुट्टियों पर बंद रहता है)।
टिकट भारतीयों के लिए मामूली शुल्क (लगभग ₹20-₹30) और विदेशियों के लिए अलग दरें। टिकट ऑनलाइन या काउंटर से ले सकते हैं।
कैसे पहुँचें नजदीकी मेट्रो स्टेशन 'सेंट्रल सेक्रेटेरिएट' (येलो/वॉइलेट लाइन) या 'उद्योग भवन' है। वहाँ से आप ऑटो या पैदल जा सकते हैं।