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पूर्व IAF चीफ धनोआ बोले, 'राफेल पाकिस्‍तान में घुसकर हमला करने के लिए, दुश्‍मन जंग से पहले दो बार सोचेगा'

By भाषा | Updated: August 3, 2020 05:51 IST

Rafale fighter: पांच राफेल लड़ाकू विमान 29 जुलाई को अंबाला एयरबेस पर पहुंचे हैं। ये पांच राफेल 27 जुलाई को फ्रांसीसी शहर बोर्डो में मेरिनैक एयर बेस से उड़ान भरी थी। भारत ने 23 सितंबर 2016 को फ्रांसीसी एरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए 59,000 करोड़ रुपये का सौदा किया था।

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ठळक मुद्देराफेल विमान भारत द्वारा पिछले दो दशक से अधिक समय में लड़ाकू विमानों की पहली बड़ी खरीद है। इन विमानों के आने से भारतीय वायुसेना की युद्धक क्षमता में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (अवकाशप्राप्त) बी एस धनोआ ने राफेल सौदे का समर्थन करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया। बी एस धनोआ ने कहा कि हवाई युद्ध की स्थिति में तिब्बत में राफेल से भारत को काफी फायदा मिलेगा।

(मानस प्रतिम भुइयां) नयी दिल्ली, दो अगस्त (भाषा) वायु सेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल (अवकाशप्राप्त) बीरेंद्र सिंह धनोआ (B S Dhanoa) ने रविवार को कहा कि पहाड़ी तिब्बत क्षेत्र में चीन के साथ किसी हवाई संघर्ष की स्थिति में भारत को राफेल विमानों से सामरिक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में इस बेड़े का उपयोग अपने लाभ के लिए किया जा सकेगा और यह दुश्मन की हवाई रक्षा को नष्ट कर सकेगा तथा जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को निष्प्रभावी कर देगा।

बालाकोट हमले में अहम भूमिका निभाने वाले धनोआ ने कहा कि एस-400 मिसाइल प्रणाली के साथ राफेल जेट विमान भारतीय वायु सेना को पूरे क्षेत्र में एक बड़ी बढ़त देगा और भारत के विरोधी उसके खिलाफ युद्ध शुरू करने से पहले दो बार सोचेंगे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मामले में एस-400 और राफेल का मकसद पाकिस्तानी विमान पर पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के अंदर हमला करना है, न कि जब वे भारतीय क्षेत्र में अंदर आ जाएं। उन्होंने कहा कि अगर भारत के पास फ्रांस में बने जेट विमान पहले से होते तो पिछले साल पड़ोसी देश ने 27 फरवरी को बालाकोट का जवाब नहीं दिया होता।

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राफेल फाइटर जेट (फाइल फोटो)

अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक खूबियों से लैस राफेल को लेकर बी एस धनोआ ने जानिए क्या-क्या कहा? 

धनोआ ने पीटीआई-भाषा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक खूबियों से लैस राफेल तिब्बत के पहाड़ी क्षेत्र का उपयोग अपने लाभ के लिए कर सकेगा और भारतीय युद्धक विमान के दुश्मन के हवाई क्षेत्र में अपने मिशन को पूरा करने के लिए प्रवेश करने से पहले उसे भ्रमित कर देगा। पूर्व वायु सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना को मिल रहे राफेल विमान फ्रांसीसी वायु सेना द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले विमानों की तुलना में बहुत अधिक उन्नत हैं क्योंकि भारत ने लेह जैसी विशेष परिस्थितियों में परिचालन की आवश्यकता के कारण कुछ "अधिक" की जरूरत बतायी थी।

धनोआ ने कहा कि राफेल अपने लाभ के लिए इलाके का उपयोग करने और इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपनी रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि ऐसे में राफेल दुश्मन की वायु रक्षा को नष्ट करने तथा जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को निष्प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को निकाल लेते हैं, तो एसयू30, जगुआर, यहां तक ​​कि मिग 21 जैसे विमान भी बाहर जा सकते हैं और चीनी बलों पर बम गिरा सकते हैं।

बीएस धनोआ और पीएम नरेंद्र मोदी (पुरानी तस्वीर)

राफेल और चीन के जे -20 लड़ाकू जेट की तुलना के बारे जानिए बी एस धनोआ ने क्या कहा?

वायु सेना प्रमुख के रूप में धनोआ ने राफेल सौदे का उस समय जोरदार बचाव किया था जब विपक्षी दलों ने इस करार में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सरकार पर हमला बोला थ। धनोआ के नेतृत्व में वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने सौदे के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। राफेल और चीन के जे -20 लड़ाकू जेट के बीच तुलना के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि चीनी विमान नजर से ओझल होने वाले नहीं हैं और उनके मौजूदा इंजनों के साथ वे विमान भारतीय विमानों से बेहतर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि चीनी जे-20 में लगी प्रणालियों की तुलना में फ्रांसीसी राफेल "बहुत बेहतर" हैं। धनोआ पिछले साल 30 सितंबर को भारतीय वायुसेना प्रमुख पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

उन्होंने कहा कि राफेल के दो और स्क्वाड्रन होने से बल को बहुत ताकत मिलेगी। उन्होंने कहाा, "यदि आपके पास 72-80 विमान हैं, तो यह पाकिस्तान को जो भी एफ-16 मिला है, उससे मेल खाएगा। यह प्रतिरोधक होगा।’’ धनोआ ने राफेल सौदे का समर्थन करने वाले सभी लोगों को धन्यवाद दिया जिनमें रक्षा मंत्री, नौकरशाह, तत्कालीन रक्षा सचिव, महानिदेशक (खरीद) और सरकार में कई अन्य शामिल थे।

उन्होंने कहा, ‘‘आपको उन्हें पूरे अंक देने होंगे, क्योंकि वे कई आशंकाओं के बावजूद इसके पक्ष में खड़े थे। आम तौर पर हर कोई डर जाता है कि इस सौदे को बाद में घोटाला कहा जा सकता है और सेवानिवृत्ति के बाद जांच एजेंसियों की जांच में घिर सकते हैं... ये लोग इसके पक्ष में खड़े थे। हमने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।’’ धनोआ ने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व भी अपने रूख पर कायम रहा और उसने समझौते को विफल नहीं किया। भाषा अविनाश वैभव दिलीप दिलीप

टॅग्स :बीरेंद्र सिंह धनोआ (बीएस धनोआ)राफेल फाइटर जेटराफेल सौदा
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