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राजस्थान में फोन टैपिंग को लेकर भाजपा विधायकों का विधानसभा में हंगामा, कार्यवाही चार बार स्थगित

By भाषा | Updated: March 16, 2021 21:16 IST

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जयपुर, 16 मार्च राजस्थान में कथित फोन टैपिंग मुद्दे को लेकर विपक्षी भाजपा विधायकों ने मंगलवार को विधानसभा में हंगामा व नारेबाजी की। इसके चलते सदन की कार्यवाही दिन में चार स्थगित करनी पड़ी जबकि भाजपा विधायक मदन दिलावर को सप्ताह भर के लिए सदन से निलंबित करने का प्रस्ताव पारित किया गया। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बयान जारी कर फोन टैपिंग विवाद को भाजपा का आपसी झगड़ा व वर्चस्व की लड़ाई बताया।

राजस्थान में फोन टैपिंग का मुद्दा भाजपा विधायकों ने शून्य काल में उठाना चाहा। उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ व विधायक कालीचरण सराफ ने इस मुद्दे को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया था जिसे विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने शून्य काल में खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वह हवा में कोई चर्चा नहीं करवा सकते, अगर विपक्ष चर्चा चाहता है तो तथ्य लिखित में दे।

इस पर प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि वह तो यह जानना चाहते हैं कि फोन टैपिंग किसके आदेश पर हुई और सरकार को इस मामले पर स्पष्टीकरण देना चाहिए।

विधानसभा अध्यक्ष ने इस बारे में सरकार द्वारा विधानसभा में दी गयी जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि इसमें फोन टैपिंग के बारे में कानून का जिक्र है और इसमें किसी व्यक्ति विशेष का फोन टैप किए जाने का जिक्र नहीं है और न ही स्थगन प्रस्ताव लाने वाले भाजपा विधायकों ने ऐसा कोई जिक्र किया है। इसलिए वह स्थगन प्रस्ताव खारिज करते हैं।

इस पर भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए आसन के सामने आ गए। अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष कटारिया से कहा, ‘'आप अध्यक्ष की व्यवस्था पर यह गलत परंपरा डाल रहे हैं। संसदीय व्यवस्था में आप काला अध्याय जोड़ रहे हैं।'’

भाजपा विधायकों ने आसन के सामने नारेबाजी जारी रखी और तय कार्यवाही में भाग नहीं लिया। इसके बाद जोशी ने सदन की कार्यवाही साढ़े बारह बजे आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद जब सदन बैठा तो भाजपा विधायकों ने नारेबाजी जारी रखी और अध्यक्ष के बार बार कहने के बावजूद सीटों पर नहीं लौटे तो सदन की कार्यवाही फिर आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई।

इसके बाद सदन 1:29 बजे पुन: बैठा तो उपनेता प्रतिपक्ष राठौड़ ने कहा, ‘‘राजस्थान की हुकूमत ने लोगों के फोन टैप करवाए हैं और हमारी एक ही मंशा है कि इस पर एक बार सदन में चर्चा हो।’’ उन्होंने कहा कि विधानसभा में मुख्य सचेतक ने कथित फोन टैप के आधार पर ही प्राथमिकी दर्ज करवाई थी।

इस बीच शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, ‘'राजेंद्र राठौड़, गजेंद्र सिंह को एक्सपोज करना चाहते हैं,'’ इसके साथ ही दोनों पक्षों के सदस्य बोलने लगे। अध्यक्ष जोशी ने कहा कि उपनेता प्रतिपक्ष ने जो बातें कहीं है उन पर तथ्य उन्हें दें, वे उस पर सरकार से जवाब दिलावाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रतिपक्ष उनके चैंबर में आकर तथ्य पेश करें उसके बाद वे सरकार से उसका पक्ष रखवाएंगे। इसके बाद सदन की कार्यवाही तीसरी बार आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गयी।

इसके बाद भी आसन व विपक्ष के बीच गतिरोध नहीं टूटा। डॉ. जोशी ने कहा कि वह स्थगन प्रस्ताव खारिज कर चुके हैं और अपने इस फैसले पर पुन: विचार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ विपक्ष अगर फोन टैपिंग पर चर्चा चाहता है तो बताए कि अमुक विधायक या मंत्री का फोन टैप हुआ है, कुछ लिखकर हमें दे उसके बाद उस पर विचार करेंगे और सरकार से उसका पक्ष जानेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘'सदन में ऐसा क्या है जिस पर चर्चा करवाऊं। आपका कोई प्वाइंट लिखा हुआ है, कोई तथ्य है तो मुझे दें मैं हवा में चर्चा नहीं करवाऊंगा। अगर आपके पास कोई तथ्य है जिस पर आप चर्चा चाहते हैं तो मुझे लिखकर दें मैं सरकार से तथ्य लेकर उस पर चर्चा करवाऊंगा।’' इसके बाद उन्होंने सदन में उच्च शिक्षा विषय पर चर्चा शुरू करवा दी।

इसी दौरान जब निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा बोल रहे थे तो भाजपा विधायक मदन दिलावर उनकी सीट के पास जाकर नारेबाजी करने लगे। इससे लोढ़ा व दिलावर में बहस हो गयी और सदन में हंगामा हो गया। संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने दिलावर को एक सप्ताह के लिए बाहर निकालने का प्रस्ताव रखा जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अध्यक्ष ने मार्शलों से दिलावर को सदन से बाहर ले जाने को कहा और सवा तीन बजे सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। इस तरह से सदन की कार्यवाही चार बार के लिए स्थगित हुई। भाजपा विधायक आसन के सामने बैठे रहे और नारेबाजी करते रहे लेकिन सदन में तय कार्यक्रम के अनुसार चर्चा हुई व सम्बद्ध मंत्रियों ने जवाब दिए।

वहीं शाम को मुख्यमंत्री गहलोत ने फोन टैपिंग को लेकर उठे विवाद में भारतीय जनता पार्टी पर पलटवार करते हुए इसे भाजपा का आपसी झगड़ा और वर्चस्व की लड़ाई करार दिया।

गहलोत ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘'राजस्थान विधानसभा में फोन टैपिंग को लेकर मैं 14 अगस्त, 2020 को ही पूरी बात रख चुका हूं। ऐसा लगता है कि ये भाजपा का आपसी झगड़ा है। वर्चस्व की लड़ाई है। जिसमें बेवजह मुद्दे बनाये जा रहे हैं। अनावश्यक रूप से सदन को बाधित किये जाने की कोशिश है।'’

उल्लेखनीय है कि पिछले साल जुलाई, अगस्त महीने में राज्य के कुछ जनप्रतिनिधियों के फोन टैप किए जाने के आरोपों के बीच भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने अगस्त में आहूत विधानसभा सत्र में एक तारांकित सवाल किया था। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि लोक सुरक्षा या लोक व्यवस्था के हित में सम्बद्ध कानूनों के तहत टेलीफोन अन्‍तावरोध (इंटरसेप्ट) सक्षम अधिकारी की स्‍वीकृति उपरान्‍त किया जाता है। हालांकि सवाल तथा जवाब में किसी व्यक्ति विशेष के फोन टैप किए जाने का उल्लेख नहीं है।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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