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भाजपा विधायक विश्वजीत दास तृणमूल कांग्रेस में हुए शामिल

By भाषा | Updated: August 31, 2021 21:29 IST

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बागदा से भाजपा विधायक विश्वजीत दास मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये। वह मई में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद ऐसा करने वाले तीसरे भाजपा विधायक हैं। तृणमूल के टिकट पर दो बार विधायक रहे दास 2019 में भाजपा में शामिल हुए थे। वह 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीते थे। उन्होंने यहां तृणमूल महासचिव पार्थ चटर्जी की उपस्थिति में पार्टी में शामिल होने के बाद कहा, ‘‘ मुझे भाजपा में कभी भी सुखद अनुभूति नहीं हुई। मैं बहुत पहले ही तृणमूल में लौटना चाहता था। भाजपा ने बंगाल के लिए कुछ नहीं किया। यह बाहरियों का दल है और उसे राज्य के लोगों के नब्ज की समझ नहीं है।’’ दास ने कहा कि उन्होंने गलतफहमी के चलते 2019 में तृणमूल कांग्रेस छोड़ी थी। उन्होंने कहा, ‘‘ तब पार्टी (तृणमूल) के साथ कुछ गलतफहमी थी। यदि मैं पार्टी नहीं छोड़ता तो बेहतर होता। लेकिन यह मेरे लिए घरवापसी जैसा है।’’ दास का तृणमूल में स्वागत करते हुए पश्चिम बंगाल के उद्योग मंत्री चटर्जी ने कहा कि भाजपा विधानसभा चुनाव में बुरी तरह विफल रही इसलिए वह चुनाव के बाद ‘बदला लेने का प्रयास कर रही है।’ उन्होंने कहा, ‘‘ हम राजनीतिक ढंग से भाजपा का मुकाबला करेंगे। वह पश्चिम बंगाल के लोगों को छोटा दिखाने का प्रयास कर रही है। लेकिन राज्य के लोग इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’ सोमवार को एक अन्य भाजपा विधायक तन्मय घोष तृणमूल में लौट गये थे। बिष्णुपुर से नेता घोष विधानसभा चुनाव से पहले पाला बदलकर भाजपा में चले गये थे। जून में भाजपा विधायक और पार्टी उपाध्यक्ष मुकुल रॉय तृणमूल में लौट आए थे। उन्होंने चार साल पहले ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। वैसे तृणमूल में लौटे तीनों ही नेता--दास, राय और घोष आधिकारिक रूप से भाजपा के ही विधायक हैं। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में 292 में से 77 सीटें जीती थीं। तृणमूल कांग्रेस 213 सीटों पर विजयी रही थी। फिलहाल सात सीटों पर उपचुनाव होने हैं। तृणमूल सूत्रों ने बताया कि भगवा खेमे के कई नेता तृणमूल कांग्रेस के संपर्क में हैं और सत्तारूढ़ दल में आने को इच्छुक हैं। पिछले दो दिनों में विधायकों के दल-बदल करने पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि जिन्होंने पाला बदला है, वे वाकई कभी उनकी पार्टी की विचारधारा एवं सिद्धांतों को अपना ही नहीं पाये। उन्होंने कहा, ‘‘ हमने उन सभी का स्वागत किया जो तृणमूल के खिलाफ लड़ने को इच्छुक थे। चूंकि हम सत्ता में नहीं आये इसलिए शायद, उन्होंने महसूस किया कि उन्हें तृणमूल में लौट जाना चाहिए। यह उन्हें तय करना है कि वे किसका हिस्सा रहना चाहते हैं लेकिन पाला बदलने के बाद भाजपा विधायक के तौर पर इस्तीफा दे देना चाहिए।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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