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बिहार: दुर्गा जी की प्रतिमा का गंगा-सहायक नदियों में नही होगा विसर्जन, एनजीटी ने जारी किया आदेश

By एस पी सिन्हा | Updated: October 7, 2019 19:02 IST

एनजीटी के आदेश और लोगों को बदली विसर्जन व्यवस्था की जानकारी देने के लिए शहर के प्रमुख पूजा पंडालों और घाटों की ओर जाने वाले रास्ते में जगह जगह होर्डिंग लगाए गये हैं जिनमें जानकारी दी गई है. बताया जाता है राजधानी पटना शहर में करीब 12 सौ से अधिक पूजा पंडाल हैं.

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ठळक मुद्देविसर्जन गंगा और उसकी सहायक नदियों में करने पर रोक लगा दी गई है.गंगा में विसर्जन करने वाले पूजा समितियों से प्रशासन जुर्माना वसूली जायेगी.

बिहार में इस वर्ष मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन गंगा और उसकी सहायक नदियों में करने पर रोक लगा दी गई है. इस संबंध में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने एक विशेष दिशा निर्देश जारी कर इसपर प्रतिबंध लागाने का आदेश दिया है. ऐसे में एनजीटी के दिशा-निर्देश के आलोक में सरकार ने पूजा समिति के सदस्यों को अवगत कराते हुए कहा है कि दुर्गा जी की प्रतिमा को तालाब एवं अन्य जलाशयों में हीं करें. आदेश का पालन नही कर गंगा में विसर्जन करने वाले पूजा समितियों से प्रशासन जुर्माना वसूली जायेगी.

प्राप्त जानकारी के अनुसार जो लोग इस नियम का उल्लंघन करेंगे और नदी में विसर्जन करने का प्रयास करेंगे, उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उनसे 50 हजार रुपये जुर्माना राशि वसूली जायेगी. दंड की ये राशि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिया जायेगा. ट्रिब्यूनल के इस विशेष दिशा-निर्देश के बाद पटना के सिटी इलाके में भद्र घाट के पास प्रशासन द्वारा दो तालाब बनाए जा रहे हैं, जिसमें मूर्तियों का विसर्जन किया जाएगा. गंगा के किनारे पर बसे अन्य शहरों में भी प्रतिमा विसर्जन के लिए शहर के गंगा घाटों पर अस्थायी तालाब बनवाये जा रहे हैं. मंगलवार को विसर्जन होने के कारण आज ही इन जगहों पर अस्थायी तालाबों का निर्माण कर लिया गया  है. आज नवमी है और मंगलवार को मूर्ति विसर्जन हो जाएगा. इस बार ज़िला प्रशासन ने मूर्ति पंडाल आयोजकों को निर्देश दिया है कि मूर्ति गंगा की बजाए बनाये गये तालाबों में हीं विसर्जित किया जाए. 

एनजीटी के आदेश और लोगों को बदली विसर्जन व्यवस्था की जानकारी देने के लिए शहर के प्रमुख पूजा पंडालों और घाटों की ओर जाने वाले रास्ते में जगह जगह होर्डिंग लगाए गये हैं जिनमें जानकारी दी गई है. बताया जाता है राजधानी पटना शहर में करीब 12 सौ से अधिक पूजा पंडाल हैं. हालांकि इस बार विजयादशमी मंगलवार को है, इस कारण कई पूजा पंडाल विसर्जन नहीं करेंगे. 

लेकिन पटना समेत अन्य शहरों में मूर्ति विसर्जित करने की तिथि का उल्लेख पूजा समितियों को लाइसेंस लेते समय ही करना पडता है. ऐसे में जिन पूजा समितियों ने मंगलवार का उल्लेख अपने मूर्ति विसर्जन के तिथी में किया है, उनकी बाध्यता होगी कि वे उसी दिन मुर्ति का विसर्जन कर दें. वहीं, प्रशासन के इस निर्देश को आयोजक भी पसंद कर रहे हैं और साथ ही इस बात से खुश भी है की इससे गंगा प्रदूषण मुक्त होगा. यही नही कईबार मुर्ति विसर्जन के दौरान हादसे भी हो जाया करते थे, जिसमें कई उत्साही युवाओं की जान भी चली जाती थी.

 

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