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बिहार की सियासत में परिवारवाद की परंपरा रही है पुरानी, कई पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे बढ़ा रहे सियासी विरासत

By एस पी सिन्हा | Updated: March 8, 2026 16:18 IST

उल्लेखनीय है कि सूबे के सियासी इतिहास पर नजर डालें तो अब तक कई ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनके बेटे सक्रिय राजनीति में आए और कई ने राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान भी बनाई। इन नेताओं ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए अलग पहचान भी बनाने की कोशिश की। 

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पटना:बिहार की सियासत में लालू युग की समाप्ति के बाद अब नीतीश युग भी समाप्ति की ओर है। लंबे समय तक राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब राज्य की राजनीति को छोड़कर देश की सियासत की ओर कदम बढ़ाते हुए नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही सूबे की सियासत में पारिवारिक विरासत कोई नई बात नहीं रही है। यहां कई ऐसे बड़े राजनीतिक परिवार रहे हैं जिनकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी भी सक्रिय राजनीति में उतर कर अपनी पहचान बना चुकी है। समय-समय पर राज्य के कई प्रमुख नेताओं ने अपने बाद अपनी राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए अपने बेटों को राजनीति में उतारा है। 

अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने सियासत में कदम रख दिया है। उल्लेखनीय है कि सूबे के सियासी इतिहास पर नजर डालें तो अब तक कई ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, जिनके बेटे सक्रिय राजनीति में आए और कई ने राज्य तथा राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान भी बनाई। इन नेताओं ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए अलग पहचान भी बनाने की कोशिश की। 

बिहार की राजनीति में सबसे चर्चित राजनीतिक परिवार की बात करें तो इसमें राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम सबसे पहले आता है। राष्ट्रीय जनता दल के इस परिवार की राजनीतिक पकड़ लंबे समय से बिहार की राजनीति में दिखाई देती रही है। उनके दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सक्रिय राजनीति में हैं। 

तेजस्वी यादव आज बिहार की राजनीति के सबसे प्रभावशाली युवा नेताओं में गिने जाते हैं और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वहीं तेज प्रताप यादव भी लगातार राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हैं और अपनी अलग शैली के कारण अक्सर चर्चा में बने रहते हैं। इसी तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा के बेटे नीतीश मिश्रा ने भी राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है। 

नीतीश मिश्रा भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। वे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और राज्य की राजनीति में उनकी एक मजबूत पहचान है। पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद के बेटे कीर्ति झा आजाद का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। कीर्ति झा आजाद पहले भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी के रूप में देशभर में मशहूर हुए और बाद में राजनीति में सक्रिय हो गए। उन्होंने कई बार सांसद के रूप में संसद में बिहार का प्रतिनिधित्व किया और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। 

इसके साथ ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बेटे संतोष कुमार सुमन भी सक्रिय राजनीति में हैं। संतोष सुमन हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं और बिहार सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसी तरह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री सत्येंद्र नारायण सिन्हा के बेटे निखिल कुमार भी राजनीति में आए और कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। 

निखिल कुमार भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रहे और बाद में राजनीति में सक्रिय होकर सांसद भी बने। इसके अलावा वे राज्यपाल जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर भी रह चुके हैं। इसके अलावा कई ऐसे नेता हैं जिनके बेटे राजनीति में आए और अपने-अपने स्तर पर सफल भी हुए। हालांकि हर नेता के बेटे को राजनीति में उतनी ही सफलता मिले यह जरूरी नहीं होता, क्योंकि अंततः जनता ही तय करती है कि किसे स्वीकार करना है और किसे नहीं?

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