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बिहार चुनाव: राजद 130, कांग्रेस 55-60, वीआईपी 25 और वाम दल को 30 सीट?, सीट पर अंतिम मुहर राजद प्रमुख लालू यादव लगाएंगे

By एस पी सिन्हा | Updated: October 10, 2025 17:45 IST

Bihar Elections: सूत्रों के मुताबिक इस बार सीट शेयरिंग का फार्मूला तय हो गया है। राजद इस बार भी बड़े भाई की भूमिका में होगी।

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ठळक मुद्देसंसदीय दल फिर केंद्रीय संसदीय दल की बैठक हुई।लालू यादव और तेजस्वी यादव शामिल हुए।चयन के लिए अधिकृत करने का प्रस्ताव दिया।

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर शुक्रवार को हुई राजद के केंद्रीय संसदीय दल की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आगामी चुनाव के लिए सीटों और उम्मीदवारों का चयन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ही करेंगे। तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में हुई राजद संसदीय दल की बैठक में लालू यादव को आगामी चुनाव में पार्टी का चिह्न बांटने के लिए चुना गया। बैठक के बाद लालू यादव ने कहा कि इस बार बिहार की जनता बदलाव के लिए वोट करेगी और प्रदेश में तेजस्वी सरकार बनेगी। इसके साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारी को अंतिम रूप देने के लिए राबड़ी देवी के आवास पर बैठकों का दौर चला। पहले प्रदेश संसदीय दल फिर केंद्रीय संसदीय दल की बैठक हुई। इसमें लालू यादव और तेजस्वी यादव शामिल हुए।

पार्टी के राज्य संसदीय दल ने लालू यादव को सीट और उम्मीदवारों के चयन के लिए अधिकृत करने का प्रस्ताव दिया। फिर इस प्रस्ताव को केंद्रीय संसदीय दल से भी पारित कराया गया। बता दें कि महागठबंधन में सीट शेयरिंग की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक इस बार सीट शेयरिंग का फार्मूला तय हो गया है। राजद इस बार भी बड़े भाई की भूमिका में होगी।

लालू यादव की पार्टी सबसे अधिक 130 सीट, कांग्रेस 55 से 60 सीट, मुकेश सहनी की वीआईपी 25 सीट और वाम दल 30 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। वहीं, पशुपति कुमार पारस की पार्टी के लिए राजद और कांग्रेस रास्ता बनाएगी। ऐसे में इस पार्टी को 4 से 5 सीट मिलने की बात कही जा रही है। ये सीट राजद और कांग्रेस से कोटे से दी जा सकती है।

सियासी हलचल के बीच जदयू के कई नेताओं ने थामा राजद का दामन, नीतीश कुमार को लगा बड़ा झटका

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर जारी सियासी हलचल के बीच नेताओं के दल-बदल का खेल भी शुरू हो गया है। विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन से ठीक पहले जदयू को बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को जदयू के कई प्रमुख नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बड़ा झटका देते हुए राजद का दामन थाम लिया।

जदयू छोड़ने वाले नेताओं में दो बार के पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा के साथ-साथ जहानाबाद के पूर्व सांसद जगदीश शर्मा के बेटे और पूर्व विधायक राहुल शर्मा भी शामिल हैं। इसके अलावा बांका से वर्तमान जदयू सांसद गिरधारी यादव के छोटे बेटे चाणक्य प्रकाश राजद में शामिल हों गए।

नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले संतोष कुशवाहा का यह फैसला न सिर्फ जदयू बल्कि पूरे एनडीए खेमे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। शुक्रवार को राजद संसदीय दल की बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने जदयू समेत अन्य दलों के चार बड़े नेताओं को राजद में शामिल करा लिया। इस दौरान तेजस्वी यादव ने कहा कि हमारी पार्टी में चार प्रमुख चेहरे सदस्यता ग्रहण कर रहे हैं।

इन नामों में संतोष कुशवाहा, राहुल शर्मा, अजय कुशवाहा (लोजपा के पूर्व प्रत्याशी) और चाणक्य प्रकाश शामिल हैं। इनके पार्टी में शामिल होने से दल और सामाजिक न्याय मजबूत होगा। तेजस्वी यादव ने कहा कि अब बिहार सरकार नीतीश कुमार नहीं चला रहे हैं, बल्कि दिल्ली के लोग चला रहे हैं। वर्तमान में साढ़े तीन लोग सरकार के फैसले लेते हैं।

नीतीश कुमार का यह आखिरी चुनाव है और वे अब मुख्यमंत्री नहीं बनने जा रहे हैं। भाजपा अब जदयू को खत्म करने की दिशा में अग्रसर है। ऑपरेशन लोटस के जरिए भाजपा महाराष्ट्र, झारखंड और बिहार में सक्रिय है। सीमांचल, पूर्णिया और बांका में जो चुनौतियां थीं, वे अब मजबूत हो गई हैं। आज का दिन शुभ संकेत है कि 14 नवंबर का दिन गठबंधन के पक्ष में होगा।

चर्चा है कि संतोष कुशवाहा धमदाहा विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। यह वही सीट है, जहां से जदयू की वरिष्ठ नेत्री और मंत्री लेसी सिंह चुनाव लड़ती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि उनके लिए पूर्व सांसद कुशवाहा सीधी राजनीतिक चुनौती बन सकते हैं। राबड़ी आवास पर हुई राजद संसदीय दल की बैठक में करीब डेढ़ घंटे तक उम्मीदवारों के नामों पर मंथन चला।

बैठक के बाद भाई वीरेंद्र ने कहा कि सभी नेताओं ने लालू यादव को अधिकृत कर दिया है और राष्ट्रीय अध्यक्ष जो भी फैसला लेंगे, पार्टी पूरी तरह उसके साथ खड़ी रहेगी। सूत्रों के मुताबिक 12 अक्टूबर से पहले राजद अपने पहले चरण के उम्मीदवारों को सिंबल सौंप देगी।

इस बीच, राबड़ी आवास के बाहर लालू यादव की गाड़ी को समर्थकों ने घेर लिया। समर्थक आरा के बड़हरा विधानसभा से सरोज यादव को टिकट देने की मांग कर रहे थे। उनका कहना था कि अगर सरोज यादव को टिकट नहीं मिला तो हम लोग पार्टी का झंडा नहीं उठाएंगे।

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