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बकरीद: उत्तराखंड हाई कोर्ट ने खुली जगह पर कुर्बानी देने पर लगाई पाबंदी, यूपी की योगी सरकार पहले ही लगा चुकी है रोक

By लोकमत समाचार हिंदी ब्यूरो | Updated: August 21, 2018 18:08 IST

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कहीं पर भी जानवरों का सार्वजनिक जगहों और खुले में बलि ना दिया जाए। 

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नैनीताल, 21 अगस्त (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ईद-उल-अजहा के मौके पर खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर बकरे की कुर्बानी देने पर आज रोक लगा दी।

मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंड पीठ ने आदेश दिया कि बकरीद के त्योहार के दौरान खुले में या सार्वजनिक स्थानों पर बकरे की कुर्बानी नहीं दी जाए और कुर्बानी सिर्फ बूचड़खानों में ही दी जानी चाहिए।

अदालत ने यह भी निर्देश दिए कि खून खुली नालियों और नालों में नहीं बहना चाहिए।

अदालत ने कहा कि आदेश सबके लिए हैं भले ही वे किसी भी धर्म से हो।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कहीं पर भी जानवरों का सार्वजनिक जगहों और खुले में बलि ना दिया जाए। 

सीएम योगी ने यह भी सुनिश्चत करने को कहा है कि कहीं खुले में मांस के टुकड़े नहीं दिखने चाहिए और ना ही किसी नाली में खून बहा दिखना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इसके पीछे सांप्रदायकि सौहार्द को बनाए रखने का मकसद बताया जा रहा है। 

इधर गौतम बुद्ध नगर जिला प्रशासन ने आज कहा कि बकरीद पर पशुओं की कुर्बानी केवल निर्धारित स्थलों पर ही दी जाए। बुधवार को बकरीद से पहले जिला मजिस्ट्रेट ब्रजेश नारायण सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा के साथ सुरक्षा इंतजामों पर समीक्षा बैठक की।सिंह ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में प्रशासन और पुलिस विभागों के अधिकारियों से कहा, ‘‘मुस्लिम बहुल इलाकों में विशेष ध्यान दिया जाए। पहले से क्षेत्रों का दौरा किया जाए ताकि नमाज स्थलों पर बिना रूकावट बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो।’’ आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि पशुओं की कुर्बानी केवल निर्धारित स्थलों पर दी जाए और अगर कोई सार्वजनिक स्थलों पर यह करता हूआ पाया जाए तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कुर्बानी वाले पशुओं के कंकाल तालाबों, नदियों, नालों या खुले इलाके में नहीं फेंके जाएं।

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