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Azadi Ka Amrit Mahotsav: भारत के सामने खड़़ी हैं आज ये तीन बड़ी चुनौतियां, हर हाल में इनसे पार पाना है जरूरी

By विनीत कुमार | Updated: June 6, 2022 15:42 IST

भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर देश अमृत महोत्सव मना रहा है। देश ने 75 सालों में कई चुनौतियों को पार किया है और आगे बढ़ा है पर कई चुनौतियों से मुकाबला अभी बाकी है।

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भारत आज आर्थिक विकास और अपने एक अरब से अधिक नागरिकों के जीवन में बदलाव लाने के मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाले इस देश की आजादी के 75 साल होने जा रहे हैं। इस दौरान भारत अपने सफर में कई ऊंची-नीची राहों से गुजरा और कई चुनौतियों को भी पार करने में कामयाब रहा। हालांकि कई चुनौतियों से पार पाना बाकी है। ऐसे में भारत के सामने तत्काल नजर आ रही तीन चुनौतियां बेहद अहम हैं, जिससे पार पाना होगा।

1. स्किल डेवलपमेंट और रोजगार

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट 'द फ्यूचर ऑफ जॉब्स 2018' के अनुसार भविष्य की मांगों को पूरा करने के लिए आधे से अधिक भारतीय श्रमिकों को 2022 तक रीस्किलिंग यानी अपने कौशल में सुधार की आवश्यकता होगी। सबसे पहले शिक्षा प्रणाली की बात करें तो आज भी रोजगार हासिल करने के लिए काम आने वाली शिक्षा की बजाय पुराने ढर्रे पर बहुत हद तक पूरी प्रणाली निर्भर है। इसमें बदलाव की जरूरत है। दूसरी अहम बात ये भी कि भारत में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में औपचारिक अर्थव्यवस्था की तुलना में अधिक नौकरियां हैं। रोजगार के अवसरों के मामले में भी भारत में अलग-अलग राज्यों में बड़ी क्षेत्रीय असमानताएं हैं। वहीं, भारत में श्रम शक्ति में कामकाजी महिलाओं की भागीदारी भी बेहद कम है। इन सबमें बदलाव आ रहा है पर गति और तेज करने की जरूरत है। दो साल में कोरोना ने अर्थव्यवस्था से लेकर रोजगाज पर गंभीर असर डाला। इससे निपटने की जरूरत है।

2. ग्रामीण भारत पर ज्यादा जोर और आर्थिक समावेश

आंकड़ों के मुताबिक साल 2030 तक 40% भारतीय शहरी निवासी हो जाएंगे। इसके बावजूद गांवों की अनदेखी नहीं की जा सकती है। ये सही है कि ग्रामीण भारत में आय में वृद्धि हुई है, पर ये उत्पादकता और समावेश के अनुरूप तबतक विकास में तब्दील नहीं हो सकता है जब तक कि शहर और गांव के बीच अंतर या विभाजन कम नहीं हो जाते। देश के हर गांव और कस्बे की शहरों से कनेक्टिविटी, डिजिटल कनेक्टिविटी और आर्थिक स्थिरता जैसे विषय अहम हैं। मौजूदा केंद्र सरकार ने इन क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम करने का दावा किया है पर बहुत कुछ किया जाना बाकी है।

3. बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थिरता

भारत के सामने अपने लोगों को और बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सुविधाओं सहित आर्थिक स्थिरता देने की भी चुनौती शेष है। देश ने भले ही पोलियो उन्मूलन जैसे प्रमुख लक्ष्यों को हासिल कर लिया हो पर कोरोना ने दिखाया कि आपात स्थिति में हालात काबू से बाहर भी हो सकते हैं। ये सच है कि कोरोना ने कमोबेश दुनिया के सभी बड़े देशों में स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित चुनौतियां पेश की पर इसके बावजूद भारत को ऐसी स्थितियों से भविष्य में निपटने के लिए और बेहतर तैयारी की जरूरत है। इसके अलावा भीड़भाड़ और प्रदूषण की खतरनाक दरों से जूझ रहे शहरों को व्यवस्थित रखने की भी चुनौती हमारे सामने है।

बड़े स्तर पर भारत के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य की गुणवत्ता और शहरी जीवन के परिवेश में सुधार के लिए दो प्रमुख चुनौतियों का समाधान किया जाना चाहिए। सबसे पहले स्वास्थ्य सेवाओं की समग्र पहुंच जरूरी है। इसमें शहर से लेकर गांव तक शामिल हैं। साथ ही नॉन कम्यूनिकेबल डिजिज (एनसीडी) के गंभीर परिणामों से निपटने के रास्ते खोजने होंगे जो वर्तमान में भारत में सभी मौतों की वजह का 63% है। इन दिनों शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में और सभी आय वर्गों के लोगों में कम पौष्टिक भोजन और खराब जीवनशैली के कारण एनसीडी के मामले बढ़ रहे हैं। दूसरा, सबसे जरूरी ये है कि वायु और जल प्रदूषण सहित कचरा प्रबंधन और शहरी भीड़भाड़ बढ़ने से आने वाले संकटों को तत्काल हल किया जाना चाहिए।

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