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यूपी में मदरसों के मौलवियों और प्रबंधकों का ब्यौरा जुटा रही एटीएस, बाहरी छात्रों पर भी जांच एजेंसियों की नजर

By राजेंद्र कुमार | Updated: November 20, 2025 18:23 IST

जिलों में तैनात अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से कहा गया है कि मदरसों में पढ़ाने वाले टीचरों की पूरी डिटेल और उनके मोबाइल नंबर और मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों तथा उनके अभिभावकों (गार्जियन) के मोबाइल नंबर एटीएस मुख्यालय को उपलब्ध कराएं.

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लखनऊ: दिल्ली में हुए का ब्लास्ट के बाद आतंकवाद निरोधी दस्ता यानी एटीएस ने राज्य में चल रहे मदरसों पर अपनी निगाह जमा दी है. जिसके चलते अब एटीएस ने मदरसों में रह रहे छात्रों, इन्हें पढ़ाने वाले मौलवियों के साथ ही मदरसों के प्रबंधकों का भी ब्यौरा जुटाना शुरू कर दिया है. इसके लिए हर जिले में तैनात अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से इस संबंध में एटीएस मुख्यालय ने जानकारी मांगी है. 

जिलों में तैनात अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से कहा गया है कि मदरसों में पढ़ाने वाले टीचरों की पूरी डिटेल और उनके मोबाइल नंबर और मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों तथा उनके अभिभावकों (गार्जियन) के मोबाइल नंबर एटीएस मुख्यालय को उपलब्ध कराएं. यह जानकारी मांगने के साथ ही सूबे में एटीएस के अफसर कश्मीर से राज्य के शिक्षण संस्थाओं में पढ़ रहे छात्रों का ब्यौरा एकत्र कर रहे हैं. 

बताया जा रहा है कि गत 10 नवंबर को दिल्ली में लालकिला के पास हुए कार में ब्लास्ट में वॉइट कॉलर आंतकी मॉड्यूल के शामिल होने की मिली जानकारी के बाद यह पड़ताल प्रदेश में शुरू की गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वॉइट कॉलर आंतकी मॉड्यूल की पैठ मदरसों में हो नहीं हो गई है.

इसलिए शुरू की गई यह कवायद :

एटीएस के अफसरों के अनुसार, देश में सक्रिय आतंकी संगठन कुछ वर्ष पहले तह कम पढ़े लिखे और बेरोजगार युवाओं को अपने नापाक मंसूबों में शामिल कर उनसे ब्लास्ट आदि को अंजाम देते थे, लेकिन अब आतंक का नया वॉइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल के तौर पर उभर कर आया है. इस नए मॉड्यूल में आतंकी संगठन पढ़ें लिखे डॉक्टर,प्रोफेसर और इंजीनियर आदि को शामिल कर उनके जरिए आतंकी साजिश को अंजाम देने लगे हैं. दिल्ली में हुआ कार ब्लास्ट इसी साजिश का नतीजा है और इस साजिश में यूपी के कई पढ़े-लिखे लोग शामिल पाए गए. 

इस वजह से मदरसों पर निगाह जमाई गई है क्योंकि प्रदेश भर में 16,000 से अधिक मदरसे हैं. इनमें से अधिकांश मदरसों की गतिविधियों पर जिला प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है. जबकि दो साल पहले नेपाल सीमा से सटे कई जिलों में संचालित हो रहे मदरसों में संदिग्ध गतिविधियों को पकड़ा गया था. इसके बाद कराई गई जांच से यह पता चला था कि नेपाल सीट से सटे राज्य में 111 मदरसे ऐसे हैं, जिनके पास किसी तरह की मान्यता नहीं थी. इसके बावजूद इन मदरसों का संचालन किया जा रहा था. 

बगैर पंजीकरण के चल रहे इन 111 मदरसों को अलग-अलग धार्मिक संस्थाओं और संगठनों से फंडिंग मिल रही है. फिर भी इन मदरसों ने अपनी आय और खर्च का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं कराया. यह भी नहीं बताया कि इन मदरसों में कुल कितने बच्चे पढ़ते हैं और उन्हें पढ़ाने वाले मौलवी कौन है? 

इस सारी खामियों का संज्ञान लेते हुए ही एटीएस ने नेपाल सीमा से सटे आठ जिलों के 111 मदरसो सहित प्रदेश के अन्य जिलों में संचालित हो रहे मदरसों की जानकारी एकत्र करने की कवायद शुरू की है.ताकि किसी भी तरफ मदरसों के जरिए आतंकी संगठनों में शामिल लोग प्रदेश में अपनी गतिविधियों को बढ़ाने में सफल ना हो सके.

टॅग्स :उत्तर प्रदेश समाचारउत्तर प्रदेशMinority Welfare and Development Department
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