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अमित शाह दिल्ली में पकाएंगे समरसता खिचड़ी, दलित वोटों को जोड़ने के लिए ये है मेगा प्लान

By विकास कुमार | Updated: January 2, 2019 12:39 IST

दिल्ली भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष मोहनलाल गिहारा ने मीडिया से कहा, ‘हमने अभी तक दो लाख दलित घरों को कवर किया है और आगामी दिनों में लक्षित तीन लाख घरों में 90 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है.

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लोकसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों को साधने में जूट गए हैं. दलित वोटों को भाजपा से जोड़ने के लिए शाह दिल्ली में एक बड़ा रैली करने जा रहे हैं, जिसे भीम महासंगम नाम दिया गया है. इसके लिए पार्टी ने तैयारियां भी शुरू भी कर दी है. यह रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में होने जा रही है.

आम चुनाव से पहले दलित समुदाय से जुड़ाव को मजबूत करने के लिए भाजपा का यह प्रयास काफी महत्त्वपूर्ण समझा जा रहा है. भाजपा अपनी रैली में तीन लाख दलित परिवारों से जुटाए गए चावल-दाल से 3,000 किलोग्राम खिचड़ी पकाएगी. रामलीला मैदान में होने वाली भीम महासंगम रैली को पार्टी प्रमुख अमित शाह संबोधित करेंगे.

समरसता खिचड़ी के सहारे दलित वोट 

दिल्ली भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष मोहनलाल गिहारा ने मीडिया से कहा, ‘हमने अभी तक दो लाख दलित घरों को कवर किया है और आगामी दिनों में लक्षित तीन लाख घरों में 90 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है. साथ ही, हम इस कार्य को विश्व रिकार्ड के तौर पर दर्ज करने के लिए गिनीज बुक से भी संपर्क में हैं.’ 

गिहारा ने कहा कि नागपुर के शेफ विष्णु मनोहर और उनकी टीम को रैली में समरसता खिचड़ी पकाने के लिए आमंत्रित किया गया है. गिहारा ने बताया कि खास तौर पर तैयार बरतन का व्यास 20 फुट है और इसकी गहराई छह फुट होगी. इसमें चावल, दाल, नमक और पानी डालकर 3,000 किलोग्राम खिचड़ी बनायी जाएगी.

2014 में भाजपा को दलित वोटों का अच्छा साथ मिला था, जिसके कारण भाजपा ने उत्तर प्रदेश में उन सीटों पर भी जीत हासिल की थी जहां दलित वोटों की संख्या बहुतायत में थी. हाल के दिनों में भाजपा के कई दलित नेताओं ने पार्टी के ऊपर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया है. जिसके कारण पार्टी अब समरसता खिचड़ी के सहारे सीधे दलितों से जुड़ाव करना चाहती है. उदित राज ने भी हाल में कई मौकों पर पार्टी पर निशाना साधा है, अभी तक इसकी कोई खबर नहीं है कि उन्हें इस रैली में न्योता दिया गया है या नहीं. 

भाजपा को 2014 में लगभग 28 फीसदी दलित वोट मिले थे जो किसी भी दलित हितैषी पार्टी से ज्यादा थी. इसके कारण भी बीजेपी इस बार दलित वोटों को अपने साथ जोड़ना चाहती है. एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के कारण भी दलितों में भाजपा की छवि पहले से ज्यादा अच्छी हुई है. 

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