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जानिए, जम्मू कश्मीर में सरकार बनाने का गणित, कैसे दो-दो पार्टियों ने पेश कर दिया दावा 

By सुरेश डुग्गर | Updated: November 22, 2018 06:52 IST

जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग कर दी गई है। यह कदम राज्यपाल सत्यापाल मलिक ने तब उठाया, जब पीडीपी और सज्जाद लोन के सरकार बनाने के दावे कर दिए।

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ठळक मुद्देइस साल 16 जून को पीडीपी-भाजपा गठबंधन से भाजपा अलग हो गई थी। 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे हो जाएंगे। इसे और अधिक बढ़ाया नहीं जा सकता है।

जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने एक चौंकाने वाले फैसले में जम्मू कश्मीर विधानसभा को भंग कर दिया। राज्य में सियासी घटनाक्रम जितनी तेजी से बदला उससे सब हैरान हैं। पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती द्वारा चिट्ठी लिखने के कुछ देर बाद ही गवर्नर सत्यपाल मलिक ने विधानसभा भंग करने का शासनादेश जारी कर दिया। बुधवार शाम में ही पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी की चीफ महबूबा मुफ्ती ने राज्यपाल को पत्र लिखकर सरकार बनाने का दावा पेश करने की बात कही थी। और उनके दावा पेश किए जाने के तंुरंत बाद ही सज्जाद गनी लोन ने भाजपा समेत पीडीपी के 18 विधायकों का समर्थन होने का दावा करते हुए सरकार बनाने का दावा भी पेश किया था।

महबूबा मुफ्ती ने दावा पेश करने के पत्र को शेयर करते हुए ट्वीट किया था कि इसे राजभवन भेजने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा था कि जल्द ही आपसे (गवर्नर) मुलाकात होगी। गवर्नर को भेजे पत्र में महबूबा ने लिखा था कि जैसा कि आपको पता है पीपुल्स डेमोक्रैटिक पार्टी राज्य की विधानसभा में 29 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। आपको मीडिया रिपोर्टों से पता चल गया होगा कि कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रैंस ने राज्य में सरकार बनाने के लिए हमारी पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया है।

महबूबा ने आगे लिखा था कि नैशनल कान्फ्रैंस के पास 15 और कांग्रेस के पास 12 सदस्य हैं और ऐसे में कुल संख्या 56 हो जाती है। चूंकि मैं श्रीनगर में हूं, तत्काल आपसे मुलाकात करना संभव नहीं है और इसलिए यह आपको सूचना देने के लिए है कि हम आपकी सुविधानुसार जल्द ही राज्य में सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए मिलना चाहते हैं।

हालांकि राज्य में तीन राजनीतिक दलों द्वारा मिलकर सरकार बनाए जाने की कवायद के बीच चर्चा यह भी गर्म थी कि राज्यपाल केंद्र के इशारों पर विधानसभा को भंग कर सकते हैं। और अंततः हुआ भी वही है।

पीडीपी ने राज्यपाल आफिस में फैक्स भेजा था, इस फैक्स में 56 विधायकों के समर्थन का दावा किया गया था। राज्य में सरकार बनाने की भाजपा की कोशिशों को झटका देते हुए पीडीपी और कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया था। वहीं उमर अब्दुल्ला की नेशनल कांफ्रेंस इस महागठबंधन को बाहर से समर्थन दे रही थी। इस दावे के साथ ही सज्जाद गनी लोन ने भी सरकार बनाने का दवा किया था।

इससे पहले दिन में खबर आई थी कि पीडीपी नेता अल्ताफ बुखारी को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है। जम्मू कश्मीर में नई सरकार के गठन को लेकर महबूबा मुफ्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), उमर अबदुल्ला की अध्यक्षता वाली नेश्नल कॉन्फ्रेंस (एनसी) और कांग्रेस साथ आ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राज्य की सियासत में धुर विरोधी मानी जाने वाली एनसी और पीडीपी ने भाजपा को रोकने के लिए साथ आने का फैसला किया है।

सूत्रों ने साथ ही बताया कि तीनों दलों की बैठक में मुख्यमंत्री पद के लिए अल्ताफ बुखारी के नाम पर सहमति बनी थी। जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 89 सीटें हैं। मार्च 2015 में पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार बनी थी। तब मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद बने थे, उनके निधन के बाद महबूबा मुफ्ती सीएम बनीं थीं।

इस साल 16 जून को पीडीपी-भाजपा गठबंधन से भाजपा अलग हो गई थी। जिसके बाद से यहां राज्यपाल शासन लगा हुआ है। 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे हो जाएंगे। इसे और अधिक बढ़ाया नहीं जा सकता है। 19 दिसंबर तक यदि कोई पार्टी सरकार बनाने पर सहमत नहीं होती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लाया जा सकता है।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरमहबूबा मुफ़्तीजम्मू कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी
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