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भगवान विष्णु के 'स्नान' के लिए पांच घंटे बंद रहेगा केरल का ये हवाई अड्डा, दशकों से चली आ रही है प्रथा

By भाषा | Updated: November 1, 2022 14:19 IST

तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को पांच घंटे के लिए आज बंद किया जाएगा। सदियों पुरानी इस परंपरा के लिए हर साल दो बार ये हवाई अड्डा अपनी उड़ानों के कार्यक्रम में परिवर्तन करता है।

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ठळक मुद्दे तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को पांच घंटे के लिए किया जाएगा बंद।सदियों पुरानी परंपरा, हर साल दो बार उड़ानों के कार्यक्रम में परिवर्तन करता है हवाई अड्डा।कम से कम 10 उड़ानों के कार्यक्रम में बदलाव किया गया है, रनवे से गुजरता है जुलूस।

तिरुवनंतपुरम: तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ‘भगवान विष्णु को स्नान कराने’ के लिए रनवे से गुजरने वाले जुलूस के कारण मंगलवार दोपहर को पांच घंटे के लिए अपनी उड़ान सेवाओं को रोकेगा। हवाई अड्डा मशहूर पद्मनाभ स्वामी मंदिर की सदियों पुरानी इस परंपरा के लिए हर साल दो बार अपनी उड़ानों के कार्यक्रम में परिवर्तन करता है। मंदिर का यह जुलूस यहां रनवे के पास से गुजरता है।

शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक बंद रहेगा हवाई अड्डा

मंदिर के ‘‘अरट्टू’’ जुलूस के साथ ही मंगलवार को अलपसी उत्सव संपन्न हो जाएगा। हवाई अड्डा प्राधिकारियों ने यहां बताया कि उड़ान सेवाएं शाम चार बजे से रात नौ बजे तक पांच घंटे के लिए निलंबित रहेगी। इस परंपरा के लिए हवाई अड्डे को बंद करने की यह प्रथा दशकों से चली आ रही है और पिछले साल अडानी समूह द्वारा इस हवाई अड्डे का प्रबंधन अपने हाथ में लेने के बावजूद भी यह रुकी नहीं है।

हवाई अड्डा प्रबंधन ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘अलपसी अरट्टू जुलूस के तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे से गुजरने के लिए श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के सुचारू संचालन के वास्ते उड़ान सेवाएं एक नवंबर 2022 को शाम चार बजे से रात नौ बजे तक स्थगित रहेंगी।’’

कम से कम 10 उड़ानों के कार्यक्रम में बदलाव

इस दौरान घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवाओं के कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। हवाई अड्डे के एक सूत्र ने बताया कि कम से कम 10 उड़ानों के कार्यक्रम में बदलाव किया गया है। सूत्र ने कहा, ‘‘रनवे के समीप अरट्टू मंडपम है जहां मंदिर की प्रतिमाओं को जुलूस के दौरान एक रस्म के तौर पर कुछ देर के लिए रखा जाता है। हम पूरी पवित्रता के साथ यह निभा रहे हैं। हम पारंपरिक जुलूस के लिए व्यवस्था कर रहे हैं। विमानन कंपनियां भी पूरा सहयोग दे रही हैं।’’

मंदिर की परंपरा के अनुसार, मंदिर के देवताओं की प्रतिमाओं को साल में दो बार स्नान के लिए समुद्र में ले जाया जाता है जो हवाई अड्डे के पीछे है। 1992 में हवाई अड्डे के बनने से पहले से ही यह जुलूस इस मार्ग से गुजरता रहा है।

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