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12वीं सदी में राम के अस्तित्व की पुष्टि वाला सिक्का चंद्रपुर में!

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: August 5, 2020 07:08 IST

नागपुर के दीपक संत के संग्रह में प्रभु श्रीराम के चित्र वाला दुर्लभ तांबे का सिक्का है. इसके एक ओर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, सीता व हनुमानजी के चित्र हैं.

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ठळक मुद्दे श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन के अवसर पर ठाकुर का यह दावा चर्चा का विषय बन गया है.सिक्के में श्रीराम के एक हाथ में धनुष व दूसरे हाथ में बाण है

अरुण कुमार सहाय

चंद्रपुर के इतिहासकार और भारतीय सांस्कृतिक निधि के संयोजक अशोक सिंह ठाकुर ने अपने पास 12वीं शताब्दी का सोने का सिक्का होने का दावा किया है. अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन के अवसर पर ठाकुर का यह दावा चर्चा का विषय बन गया है. इसी तरह नागपुर के दीपक संत के संग्रह में प्रभु श्रीराम के चित्र वाला दुर्लभ तांबे का सिक्का है. ठाकुर ने 'लोकमत' को बताया कि भारत में राज करने वाले साकंबरी (शांबर) चहमान राजवंश के राजा विग्रहराज-4 के कार्यकाल में यह सोने के सिक्के तैयार किए गए थे.

उनका कार्यकाल 1153 से 1163 तक रहा. इस सिक्के के एक तरफ प्रभु श्रीरामचंद्र का चित्र है. इसमें श्रीराम के एक हाथ में धनुष व दूसरे हाथ में बाण है. उस पर 'श्रीराम' अंकित है और फूलों के चित्र को उकेरा गया है. कमल के फूलों के साथ हंस पक्षी इस पर अंकित है. सिक्के की दूसरी ओर देवनागरी भाषा में 'श्रीमदविग्र/हराजदे/व' लिखा गया है. इसका वजन 4.02 ग्राम है.

ठाकुर ने बताया कि प्राचीनकाल के मंदिरों में जिस शिल्पकला का उपयोग किया जाता था, उसी का उपयोग सिक्के की सजावट में किया गया है. देश में केवल दो लोगों के पास यह सिक्के हैं, यह उत्तम अवस्था में हैं और दुर्लभ हैं. ऑर्कालॉजिकल विभाग के नियम के अनुसार दुर्लभ ताम्रपत्र और अतिप्राचीन प्रतिमा अपने पास रखने की मनाही है, लेकिन सिक्कों के संग्रह को अनुमति दी गई है. उन्होंने बताया कि 27 हजार दुर्लभ सिक्के और शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के अवसर पर तैयार की गई दो स्वर्णमुद्राएं उनके पास हैं.

नागपुर के दीपक संत के संग्रह में प्रभु श्रीराम के चित्र वाला दुर्लभ तांबे का सिक्का है. इसके एक ओर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, सीता व हनुमानजी के चित्र हैं. दूसरी ओर प्रभु श्रीराम और माता सीता का चित्र उकेरा गया है. दीपक संत को 50 वर्ष पहले यह सिक्का मिला था. उन्होंने बताया कि यह सिक्का राजा-महाराजाओं के काल का है. यह सिक्का चलन में नहीं था, बल्कि इसे राजा-महाराजा श्रद्धापूर्वक अपने पास रखते थे. दीपक संत को पुराने सिक्के संग्रह करने का शौक है. उनके संग्रह में यह सिक्का दुर्लभ है.

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