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2019 में दर्ज हुए 86 रेप और 185 यौन उत्पीड़न के मामले, उन्नाव बना यूपी का 'रेप कैपिटल': रिपोर्ट

By अभिषेक पाण्डेय | Updated: December 7, 2019 09:10 IST

Unnao: आरोपियों द्वारा जला दी गई उन्नाव की रेप पीड़िता की शुक्रवार को दिल्ली में मौत हो गई, उन्नाव में इस साल दर्ज हुए रेप के 86 मामले

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ठळक मुद्देउत्तर प्रदेश के उन्नाव में 2019 में दर्ज हुए 185 यौन शोषण के मामलेआरोपियों द्वारा जला दी गई उन्नाव की रेप पीड़िता की दिल्ली में हुई मौत

उन्नाव रेप पीड़िता की शुक्रवार को दिल्ली के सफदजंग अस्पताल में मौत हो गई। रेप पीड़िता को आरोपियों ने गुरुवार को जलाकर मारने की कोशिश की थी, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में उन्नाव से दिल्ली लाया गया था। 

उन्नाव के लिए इस घटना समेत इस साल महिलाओं के खिलाफ अपराध की कई वारदातें सामने आई हैं, जिससे जिले में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

उन्नाव में इस साल जनवरी से नवंबर तक 86 रेप के मामले दर्ज किए हैं, जिससे ये जिला उत्तर प्रदेश का 'रेप कैपिटल' बन गया है। 31 लाख की आबादी वाला उन्नाव, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 63 किमी और कानपुर से 25 किमी दूर स्थित है।

2019 में उन्नाव में दर्ज हुए रेप के 86 मामले

आईएएनस के मुताबिक, पुलिस रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्नाव में इस साल जनवरी से नवंबर के दौरान महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न के 185 केस दर्ज किए गए हैं। 

उन्नाव के कुछ चर्चित मामलों में कुलदीप सेंगर और गुरुवार की उस घटना जिसमें रेप पीड़िता को जला दिया गया था, जिसकी शुक्रवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मौत हो गई, के अलावा पुरवा में एक महिला से रेप का भी मामला शामिल है, जिसमें 1 नवंबर को एफआईआर दर्ज की गई थी। 

इनके अलावा उन्नाव में असोहा, अजगैन, माखी और बंगरमऊ में रेप और छेड़छाड़ के मामले दर्ज किए गए हैं। ज्यादातर मामलों में, अभियुक्तों को या तो गिरफ्तार कर लिया गया है और वे जमानत पर रिहा हैं या फरार हैं।

स्थानीय लोगों ने अपराध बढ़ने के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराया

स्थानीय लोग मौजूदा मामलों के लिए पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हैं। अजगैन के राघव राम शुक्ला कहते हैं, 'उन्नाव में पुलिस का पूरी तरह से राजनीतिकरण हो गया है। वे अपने राजनीतिक आकाओं की इजाजत के बिना एक इंच भी आगे नहीं बढ़ते हैं। ये रवैला अपराधियों का मनोबल बढ़ा रहा है।'  यहां के एक वकील ने कहा, 'यहां राजनीति से अपराध को बढ़ावा मिलता है। राजनेता अपराध का इस्तेमाल राजनीतिक विवाद को निपटाने के लिए कर रहे हैं और पुलिस उनके हितैषी बने हुए हैं। यहां तक कि जब किसानों ने हाल ही में एक नई टाउनशिप के लिए भूमि अधिग्रहण पर हिंसा का सहारा लिया, तो वे रक्षात्मक बने रहे। यहां एक भी ऐसी घटना नहीं हुई है जिसमें पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की हो।'

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