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आखिर क्यों कहा जाता है एडल्ट फिल्मों को ब्लू फिल्म , जानिए क्या है पोर्न मूवीज का इतिहास ?

By ऐश्वर्य अवस्थी | Updated: August 2, 2018 15:33 IST

दुनिया में पोर्न फिल्मों का कारोबार बहुत बड़ा है और हर साल इन फिल्मों से करोड़ों-अरबों रूपये कमाए जाते है। लेकिन सवाल ये भी है कि आखिर पहली बार इस तरह की फिल्म कब बनीं और इसको ब्लू फिल्म का नाम क्यों दिया गया ।

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विदेश से लेकर देश की जमीं तक जो फिल्में तेजी से अपने कदम बढ़ा रही हैं वह हैं पार्न फिल्में। पार्न फिल्में जिनको ब्लू फिल्म भी कहा जाता है आज हर वर्ग में देखे जाने की संख्या बढ़ रही है। एडल्ट कंटेंट पर आधारित इन फिल्में को खुल्लम खुल्ला देखना भले मना हो लेकिन देखने फिर भी इनको देखने में कोी भी पीछे नहीं है।

वहीं, दुनिया में पोर्न फिल्मों का कारोबार बहुत बड़ा है और हर साल इन फिल्मों से करोड़ों-अरबों रूपये कमाए जाते है। लेकिन सवाल ये भी है कि आखिर पहली बार इस तरह की फिल्म कब बनीं और इसको ब्लू फिल्म का नाम क्यों दिया गया । ऐसे में आज हम आपको ब्लू फिल्म के इतिहास से रुबरु करवाते हूं।

कैसे बनी पहली फिल्म

एडल्ट कंटेंट से बनी फिल्म की दुनिया की पहली पोर्न स्टार का नाम लिंडा सुजन बोरमैंन यानि लिंडा लवलेस था। ये वो अभिनेत्री थी जिसने इस तरह की फिल्मों को करने की सबसे पहले हिम्मत की थी। कहते हैं बात 1972 की है जब एक पोर्न फिल्म आई थी इसका नाम 'डीप थ्रोट' था। कहा जाता है कि ये पहली ही फिल्म सुपर-डुपर हिट हुई थी। ये फिल्म यूएस में बनी थीं। कहते हैं कि न्यूयोर्क में ये फिल्म इतनी चली की उस जमाने की 'पुसी कैट थिएटर' चेन में दिन में इसके 10-10 शो चलाये गये थे।

पहली फिल्म की कमाई

इस फिल्म की कमाई उस जमाने में बेहद चौंकाने वाली थी। कहते हैं इस पहली पार्न फिल्म ने 600 मिलियन डॉलर कमाए थे जो आज के समय में 4 हजार करोड़ रूपये होते हैं। मगर इस फिल्म की एक्ट्रेस लिंडा लवलेस को इस फिल्म के लिए 1250 डॉलर यानि आज की तारीख में सिर्फ 70 हजार रूपये मिले थे।

क्यों करते हैं ब्लू 

इन फिल्मों को ब्लू फिल्म का नाम मिलेने के पीछे बेहद अजीब सी बजह है। कहते हैं इस नाम के पीछे पहली वजह यह बताई जाती है कि इन फिल्मों के पोस्टर ब्लू यानी आसमानी-नीले बैकग्राउंड के साथ बनाए जाते थे। ऐसे में सवाल ये भी है कि आखिर नीले रंग को क्यों चुना जाता है। ऐसे में कहा जाता है कि नीला रंग रोगों को आसानी से अपनी तरफ खींच लेता है जिस कारण से इस रंग का इस्तेमाल एडल्ट फिल्मों में किया जाता है। वैसे साइंस की मानें तो सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला रंग लाल है लेकिन पोस्टर बनाते हुए नीला रंग सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया भी जाता है तो इसकी वजह यह जरूर हो सकती है कि इस रंग के साथ बाकी रंगों के इस्तेमाल करने की गुंजाइश सबसे ज्यादा होती है।

 ब्लू लॉ में इन फिल्मों के नाम को बेहद अलग तरीके से पेश किया गया है। इसके मुताबिक करीब एक सदी पहले पश्चिमी देशों में ब्लू लॉ एक धार्मिक कानून था। इसको चर्च के द्वारा पेश किया गया था। जिसके मुताबिक रविवार के दिन  हर तरह की विशेष गतिविध पर रोक लगाई गई थी।  कहते हैं यह वह दौर था जब भारत में अंग्रेजों का शासन था, इसलिए हमारे देश का प्रबुद्ध और शहरी तबका ब्लू लॉ और इसके प्रतिबंधों से परिचित थे। ऐसे में जो भी उस समय रविवार को फिल्म देखते थे उनको ब्लू कहा जाता था।ब्लू लॉ के विरुद्ध होने के चलते ही इन्हें ब्लू फिल्म कहा जाने लगा होगा। समय के साथ ब्लू लॉ का अस्तित्व तो खत्म हो गया लेकिन पोर्न फिल्मों को मिला यह नाम अब भी चलन में है।

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