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World Cancer Day: कैंसर डे पर जानें ब्रेन ट्यूमर से जुड़ी बातें, जागरूकता ही सबसे बड़ा इलाज

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: February 4, 2020 13:55 IST

वर्ल्ड कैंसर डे २०२०: भारत में हर साल हजारों लोग इस जानलेवा बीमारी के चलते असमय ही मौत में मुंह में चले जाते हैं। हाल ही में नेशनल हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। कैंसर से होने वाली कुल मौतों में 2 प्रतिशत लोग ब्रेन ट्यूमर के मरीज होते हैं।

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ठळक मुद्देकैंसरस ट्यूमर जल्दी बढ़ता है और शरीर के दूसरे हिस्सों में तेजी से फैलता है70 प्रतिशत ब्रेन ट्यूमर नॉन-कैंसरस होते हैं

कैंसर एक ऐसी बीमारी है जो बहुत शांत तरीके से हमारे शरीर पर अपना कब्जा जमाना शुरू कर देती है और धीरे-धीरे हमें पूरी तरह अपने गिरफ्त में ले लेती है। कैंसर का नाम किसी भी इंसान में खौफ पैदा कर देता है।

भारत में हर साल हजारों लोग इस जानलेवा बीमारी के चलते असमय ही मौत में मुंह में चले जाते हैं। हाल ही में नेशनल हेल्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार, कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती ही जा रही है।

डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर की जानकारी प्रारंभिक चरण में होने पर इसक पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। वैसे तो कैंसर के सभी रूप जानलेवा हैं, लेकिन सबसे खतरनाक ब्रेन ट्यूमर को माना जाता है।

कैंसर से होने वाली मौत में 2 प्रतिशत ब्रेन ट्यूमर के मरीज

कैंसर से होने वाली कुल मौतों में 2 प्रतिशत लोग ब्रेन ट्यूमर के मरीज होते हैं। 2018 के एक ग्लोबल रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्रति वर्ष करीब 28142 लोग ब्रेन ट्यूमर से प्रभावित होते हैं। इस बीमारी के चलते मरीज के जीवन और उसके परिवार पर नकारात्मक असर होता है।

ब्रेन ट्यूमर के शुरुआत में ब्रेन का कुछ हिस्सा अचानक बढ़ने लगता है। जो ब्रेन के सेल्स और उसकी परतों और नसों में होता है। हालांकि ये सिल्स कैंसरस और नॉन कैंसर हो सकते हैं। नॉन कैंसरस ट्यूमर को आसानी से ऑपरेशन करके निकाला जा सकता है।

जबकि कैंसरस ट्यूमर जल्दी बढ़ता है और शरीर के दूसरे हिस्सों में तेजी से फैलता है। यह जानलेवा हो सकता है। हालांकि 70 प्रतिशत ब्रेन ट्यूमर नॉन-कैंसरस होते हैं।

ब्रेन ट्यूमर कैसे होता है

ब्रेन ट्यूमर कैसे होता है यह बताना थोड़ा मुश्किल है। हालांकि ब्रेन ट्यूमर के ज्यादातर मरीजों में जान का जोखिम नहीं होता है। सिर्फ कुछ घटनाओं में ही यह खतरनाक होता है।

- ब्रेन ट्यूमर को लेकर ऐसा देखा गया है कि यह बढ़ती उम्र के साथ बढ़ता जाता है।

- रेडिएशन के साथ ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है। खास तौर से बच्चों में इस बीमारी का खतरा बढ़ने की संभावना ज्यादा होती है।

- ब्रेन ट्यूमर का खतरा अनुवांशिक होता है। परिवार मे किसी व्यक्ति को अगर यह बीमारी हुई है तो आने वाले लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।

- ब्रेन ट्यूमर होने के दूसरे कारणों में मोबाइल फोन रेडिएशन, हार्मोनल फैक्टर, कम फ्रीक्वेंसी वाली चुंबकीय क्षेत्र और औद्योगिक इलाकों में इसका खतरा ज्यादा रहता है।

क्या है ब्रेन ट्यूमर के लक्षण

1- ब्रेन ट्यूमर के ज्यादातर मरीजों को सिर दर्द की शिकायत होती है। साथ ही उल्टी होने के भी शिकायत होती है।

2- शरीर के किसी हिस्से में गांठ का होना।

3- ब्रेन ट्यूमर के मरीज को देखने, बोलने और सिर के किसी हिस्से में अनियंत्रित रूप से किसी गांठ का विकसित होना आम है।

क्या है इसका इलाज

ब्रेन ट्यूमर का इलाज न्यूरोसर्जरी, रेडिएशन और दवाओं द्वारा किया जाता है। बीमारी के लक्षण के आधार पर ही इसके इलाज का तरीका चुना जाता है। शुरुआती चरण में कीमोथेरपी के जरिए इसका इलाज किया जाता है। जबकि विकसित चरण में ऑपरेशन और रेडियोथेरपी की जाती है।

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