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अगर आपका बच्चा कोरोना से संक्रमित हो जाए तो ऐसे में क्या करें? क्या अस्पताल ले जाना है जरूरी, डॉक्टर से कब करें कंसल्ट, यहां जानें सभी सवालों के जवाब

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: May 26, 2022 13:24 IST

जानकारों के अनुसार, करीब 25 प्रतिशत शिशुओं के कोरोना संक्रमित होने पर उन में बीमारी के लक्षण नजर नहीं आते है।

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ठळक मुद्देजानकारों की माने तो बच्चों में कोरोना के लक्षण आसानी से नहीं दिखते है। उनके अनुसार, बच्चों में कोरोना के लक्षण पाए जाने पर अस्पताल ले जाने की जरूरत नहीं है। कुछ खास और गंभीर परिस्थिति में डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।

Coronavirus Infected Child: माता-पिता का इस बात को लेकर चिंतित होना जायज है कि यदि उनका शिशु कोरोना वायरस से संक्रमित हो गया, तो क्या होगा। कमजोर रोग प्रतिरोधी क्षमता और बच्चों के लिए टीकाकरण अभी उपलब्ध नहीं होने के कारण ऐसा माना जा सकता है कि शिशुओं के संक्रमित होने का खतरा अधिक है। अच्छी बात यह है कि अधिकतर शिशुओं में कोरोना संक्रमण के मामूली लक्षण ही दिखाई देते हैं। 

यदि आपका बच्चा संक्रमित पाया जाता है, तो क्या हो सकता है?

यदि आप संक्रमित पाए जाते हैं और आपके घर में कोई नवजात या शिशु है, तो आप कुछ एहतियाती कदम उठा सकते हैं। बच्चे की देखभाल करने से पहले हाथ धोएं और माताएं शिशु को स्तनपान कराते समय या उसके निकट होने पर मास्क पहनें। मौजूदा साक्ष्य बताते हैं कि कोविड-19 स्तनपान से नहीं फैलता है। 

इसके साथ यह भी करें

इसके अलावा बड़े भाई-बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों का टीकाकरण कराके संक्रमण की दर को कम किया जा सकता है। इसमें पर्याप्त सावधानी बरतना और साफ-सफाई अत्यंत महत्वपूर्ण है। घर के बड़े सदस्य संक्रमित होने पर स्वयं ही बच्चों से दूरी बना लें तो ज्यादा बेहतर है। 

कोरोना से संक्रमित होने पर बच्चों को अस्पताल ले जाना जरूरी नहीं

वैश्विक महामारी के दौरान सभी आयुवर्ग के बच्चों में वयस्कों की तुलना में संक्रमण के लक्षण मामूली पाए गए हैं। हमारे नैदानिक अनुभव और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान के अनुसार भी शिशुओं में कोविड-19 के अधिकतर मामूली लक्षण ही देखने को मिलते हैं। 

कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर शिशुओं को अस्पताल में भर्ती कराने या आईसीयू में रखने की आवश्यकता आमतौर पर नहीं पड़ती। अध्ययनों के अनुसार, शिशुओं में कोविड-19 होने पर उनमें इन्फ्लूएंजा और आरएसवी जैसी श्वांस की मामूली बीमारियां ही होती हैं और मौत की दर बहुत कम है। 

हालांकि शिशुओं के लिए अभी कोई टीका उपलब्ध नहीं है, लेकिन टीकाकरण करा चुकी गर्भवती महिला से बच्चे में भी एंटीबॉडी चली जाती हैं, जिसके कारण उसे सुरक्षा मिल सकती है। 

बच्चों में कोरोना के लक्षण आसानी से नहीं दिखते

करीब 25 प्रतिशत शिशुओं में संक्रमित होने पर बीमारी के लक्षण नजर नहीं आते है। बुखार, नाक बंद होना, दूध पीने में कठिनाई और खांसी सामान्य लक्षण हैं, लेकिन सांस लेने में तकलीफ, सुस्ती और लगातार बुखार गंभीर बीमारी के लक्षण हो सकते हैं। 

किन हालातों में डॉक्टरों से करें कंसल्ट

बुखार या बेचैनी होने पर आप अपने बच्चे को पैरासिटामोल या आइबुप्रोफेन दे सकते हैं। यदि शिशु की आयु तीन महीने से कम है, तो दवा देने से पहले कृपया अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। 

यदि आपके शिशु को सांस लेने में कठिनाई है, लगातार बुखार से दूध पीने में कठिनाई होने के कारण पानी की कमी हो रही है और सामान्य की तुलना में आधे डायपर इस्तेमाल हो रहे हैं, तो भी आप अपने चिकित्सक से बात करें। 

मुझे और क्या जानकारी होनी चाहिए?

खासकर, सर्दियों का मौसम शुरू होने पर इन्फ्लूएंजा जैसे अन्य वायरस से भी शिशुओं की सुरक्षा करना अहम है। ऐसे में छह महीने से अधिक आयु के बच्चे को इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाया जा सकता है। 

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