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Post Partum Psychosis:'पोस्टपार्टम साइकोसिस' से मां बन सकती है 'कातिल', नवजात शिशु से ऐसे खत्म होता है संबंध, जानिए क्यों

By धीरज मिश्रा | Updated: July 11, 2024 16:26 IST

Post Partum Psychosis: मां बनने का खुशी एक औरत को शानदार अनुभव देती है। मां अपने नवजात बच्चे का विशेष तौर पर ख्याल रखती है।

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ठळक मुद्देपोस्टपार्टम साइकोसिस बीमारी कैसे मां के लिए बन जाती है खतरनाक जर्मनी में 28 वर्षीय महिला ने नवजात बेटी को खिड़की से बाहर फेंक दिया इस बीमारी में महिलाएं ऐसी चीजें देखती हैं और सुनती हैं जो वास्तविक नहीं है

Post Partum Psychosis: मां बनने का खुशी एक औरत को शानदार अनुभव देती है। मां अपने नवजात बच्चे का विशेष  तौर पर ख्याल रखती है। इसी दौरान मां को कई तरह की मानसिक स्थिति से होकर गुजरना पड़ता है। ऐसे में कई मानसिक रोग हो सकते हैं। पोस्टपार्टम साइकोसिस एक प्रकार का ऐसा रोग है जो एक मां और उसके शिशु के बीच खलनायक का रोल निभाता है।

आसान, शब्दों में समझिए तो यह बीमारी अगर किसी महिला को है तो वह अपने बच्चे की हत्या करने से भी गुरेज नहीं करती है। दरअसल, हाल ही में जर्मनी में एक ऐसी घटना सामने आई। जहां एक 28 वर्षीय महिला द्वारा अपनी नवजात बेटी को खिड़की से बाहर फेंक दिया गया। क्योंकि महिला को लगा कि उसका बच्चा उसके कैरियर को बर्बाद कर देगा।

महिला की पहचान कैटरीना जोवानोविक के तौर पर हुई है। उसे अपने नवजात शिशु की मौत के लिए साढ़े सात साल की जेल की सजा सुनाई गई है। हालांकि, सोशल मीडिया पर एक वैकल्पिक कहानी भी चल रही है। कुछ उपयोगकर्ताओं का सुझाव है कि जोवानोविक प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित हो सकती है, जो एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जो नई माताओं को प्रभावित कर सकती है।

हैरान करने वाला इसी तरह का मामला कोच्चि से इसी साल के शुरुआत में आ चुका है। इस मामले में एक महिला पर अपने नवजात शिशु का दम घोंटकर हत्या करने और शव को सड़क पर फेंकने का आरोप लगा था।

मानसिक स्वास्थ्य आपातकाल माना जाता है

प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ, डॉ. ईशा वधावन ने इंडिया टुडे को बताया कि प्रसवोत्तर मनोविकृति को मानसिक स्वास्थ्य आपातकाल माना जाता है। उन्होंने कहा कि यह जन्म देने वाली 1,000 महिलाओं में से 1 से 2 में होता है और आमतौर पर जन्म के बाद के दिनों में या 6 सप्ताह तक देखा जाता है। उन्होंने कहा कि प्रसवोत्तर अवसाद जन्म देने के बाद एक उदास, अलग-थलग महसूस करने की भावना को संदर्भित करता है और यह बहुत आम है (20-25 प्रतिशत महिलाएं इससे गुजरती हैं)।

लेकिन जब रोने का दौर जारी रहता है और दो सप्ताह से ज़्यादा समय तक मूड खराब, भूख न लगना और नींद न आना जैसी समस्या बनी रहती है, तो यह प्रसवोत्तर अवसाद का रूप ले सकता है। लगभग 5-10 प्रतिशत महिलाएँ इस स्थिति से जूझती हैं। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि 22 प्रतिशत भारतीय माताएँ प्रसवोत्तर अवसाद से पीड़ित हैं।

बीमारी के लक्षण

भ्रम और मतिभ्रम: ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तविक नहीं हैं, या ऐसी दृढ़ धारणाएँ रखना जो वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं। अत्यधिक मूड स्विंग: मूड में अचानक और तीव्र बदलाव, उत्साह से लेकर उत्तेजना या गंभीर अवसाद तक। भ्रम और संज्ञानात्मक अव्यवस्था: स्पष्ट रूप से सोचने में कठिनाई, अव्यवस्थित विचार या भाषण, और बिगड़ा हुआ निर्णय। व्यामोह और विचित्र व्यवहार: बिना किसी कारण के संदिग्ध या भयभीत महसूस करना, और असामान्य या चरित्र से अलग तरीके से व्यवहार करना।

डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें

शुरुआती लक्षणों की पहचान के साथ, औषधीय मदद के लिए मनोचिकित्सक से संपर्क करें। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होना ज़रूरी हो सकता है।

टॅग्स :Health Departmentजर्मनीGermany
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