बैठे-बैठे पैर हिलाने वालों में हो सकता है हार्ट अटैक का ज्यादा खतरा, 35 साल से ज्यादा उम्र वाले रहे बेसी सावधान, जानें रेस्टलेस सिंड्रोम की समस्या-इलाज

By आजाद खान | Published: July 23, 2022 04:52 PM2022-07-23T16:52:53+5:302022-07-23T17:00:01+5:30

जानकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ज्यादा शराब का सेवन करता है या एलर्जी व जुकाम की दवाइ खाता है तो उन में भी रेस्टलेस सिंड्रोम के होने का खतरा बना रहता है।

move their legs while sitting may be higher risk heart attack 35 years old be careful know restless syndrome treatment | बैठे-बैठे पैर हिलाने वालों में हो सकता है हार्ट अटैक का ज्यादा खतरा, 35 साल से ज्यादा उम्र वाले रहे बेसी सावधान, जानें रेस्टलेस सिंड्रोम की समस्या-इलाज

फोटो सोर्स: Wikipedia CC (Both)

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Highlightsरेस्टलेस सिंड्रोम समस्या देखने में काफी आम लगती है। लेकिन हाल के स्टडी में यह पता चला है कि इससे दिल का दौरा भी आ सकता है।इस समस्या से परेशान लोगों के अन्दर आइरन की भारी मात्रा में कमी पाई जाती है।

Restless Syndrome: क्या आपको भी पैर हिलाने की आदत है, अगर हां तो यह आपके लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकता है। अक्सर आपने देखा होगा कि लोग बैठे-बैठे पैर हिलाते रहते है, इन लोगों के शरीर में आइरन की कमी होती है। 

आइरन की कमी के कारण ऐसे लोग पैर हिलाते है, उनके पैरों में झनझनाहट व चीटिंयों के चलने जैसा महसूस होता है। इस परेशानी को मेडिकल भाषा में रेस्टलेस सिंड्रोम कहते हैं। 

ऐसे में आज के इस पोस्ट में हम यही जानेंगे कि यह रेस्टलेस सिंड्रोम क्या होता है, इसके कौन-कौन से लक्षण और इसके इलाज में क्या किया जाता है। आइए इसे जानने की कोशिश करते है। 

क्या है यह रेस्टलेस सिंड्रोम ( What is Restless Syndrome)

 रेस्टलेस सिंड्रोम उस बीमारी को कहते है जिसमें कोई एक जगह बैठे-बैठे अपने पैरों को हिलाता रहता है। यह समस्या ज्यादातर 35 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को होती है। 

हाल ही में हुए एक शोध में यह पता चला है कि इस तरीके से पैर हिलाने वालों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा बना रहता है जो आपके शरीर के लिए अच्छी बात नहीं है। यही नहीं इस सिंड्रोम के कारण आपको कई और समस्याएं भी हो सकती है। 

क्या है रेस्टलेस सिंड्रोम के कारण (Restless Syndrome Reasons)

इस समस्या का मुख्या कारण आपके शरीर में आइरन की कमी है। यही नहीं किडनी, पार्किंसंस से जूझ रहे मरीजों व गर्भवतियों में डिलिवरी के अंतिम दिनों में हार्मोनल बदलाव के कारण भी आपको यह समस्या हो सकती है। 

इसके अलावा ऐसा कोई है जो ज्यादा शराब पिता हो या एलर्जी व जुकाम की दवाएं खाता हो, उन में भी रेस्टलेस सिंड्रोम के होने का खतरा बना रहता है। इन सब के अलावा शुगर, बीपी व दिल की बीमारी से परेशान लोगों में भी यह समस्या हो सकती है। 

इस समस्या का लक्षण (Restless Syndrome Symptoms)

जिन लोगों के पैरों में झनझनाहट महसूस होता है या उन्हें ऐसा लगता है कि उनके पैरों में चीटिंयां चल रही है, ऐसे लोगों में यह समस्या पाई जाती है। इसके अलावा जो लोग चिंता ज्यादा करते है या जो तनाव में है, उन में भी यह समस्या पाई जाती है। 

रेस्टलेस सिंड्रोम का क्या है इलाज (Restless Syndrome Treatment)

जब कभी भी किसी को यह समस्या होतो उन्हें आइरन वाले चीजे ज्यादा खाना चाहिए। उन्हें उन सब्जियों को या फलों को ज्यादा अपने डाइट में शामिल करना चाहिए जिन में भरपूर मात्रा में आइरन पाई जाती है। आप कुछ खास व्यायाम करके भी इस समस्या को बहुत हद तक दूर कर सकते है। 

इसके अलावा आप डॉक्टर को भी देखा सकते है, ऐसी हालत में आपको डॉक्टर को दिखाना ही चाहिए। वे आपका चेकअप करके आपको कुछ दवाइयां भी दे सकते है जिससे आप इस समस्या से जल्दी आराम पा सकते है। 

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं। Lokmat Hindi News इनकी पुष्टि नहीं करता है। इन पर अमल करने से पहले या इसके बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए डॉक्टरों से जरूर संपर्क करें।)

Web Title: move their legs while sitting may be higher risk heart attack 35 years old be careful know restless syndrome treatment

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