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केंद्र ने कहा, 'नहीं है कोविड से मरने वाले डॉक्टरों का डेटा', आईएमए ने कहा, '1600 से अधिक डॉक्टरों की हुई है मौत'

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: July 26, 2022 22:24 IST

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्यमंत्री डॉक्टर भारती प्रवीण पवार ने कहा कि सरकार के पास कोविड काल में मरने वाले डॉक्टरों की सही संख्या नहीं है। वहीं आईएमए दावा कर रहा है कि उसने स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर मनसुख मंडाविया को कोरोना काल में मरने वाले डॉक्टरों की सूची सौंपी है।

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ठळक मुद्देकेंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि कोरोना काल में मरने वाले डॉक्टरों की जानकारी उनके पास नहीं हैवहीं आईएमए दावा कर रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर मनसुख मंडाविया को पूरी जानकारी दी गई हैआईएमए का दावा है कि कोरोना काल में 1600 से अधिक डॉक्टरों की मौत हुई है

दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने संसद में जानकारी देते हुए कहा कि कोविड काल में मरने वाले डॉक्टरों की संख्या उसके पास नहीं है। राज्यसभा में सदस्यों के सामने जानकारी देते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्यमंत्री भारती प्रवीण पवार ने कहा कि सरकार के पास कोविड काल में मरने वाले डॉक्टरों की सही संख्या नहीं है।

वहीं इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि साल 2020 से 2022 तक इस घातक महामारी में मरने वाले डॉक्टरों की संख्या 1600 से अधिक है। संसद में एक लिखित उत्तर में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्यमंत्री डॉक्टर भारती प्रवीण पवार ने कहा, "केंद्र सरकार डॉक्टरी पेशे में शामिल चिकित्सकों की कोविड-19 या अन्य के कारणों से होने वाली मौतों का डेटा केंद्रीयकृत करके नहीं रखती है।"

समाचार वेबसाइट 'द न्यू इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने कहा कि 23 जुलाई तक देश में कोविड-19 के कारण मरने वाले कुल डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या 5,25,997 हैं। स्वास्थ्य राज्यमंत्री मार्च 2020 से मरने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या के लिखित प्रश्न पर जवाब दे रहे थे।

हालांकि, आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहा कि उन्होंने उन डॉक्टरों की सूची तैयार कर ली है। जिन्हें कोविड काल के दौरान अपनी जान गवांई है। आईएमए के मुताबिक कोविड की पहली लहर में कुल 757 डॉक्टरों की मौत हुई।

पहली लहर में सबसे ज्यादा डॉक्टरों की मौत तमिलनाडु में हुई, जिनकी संख्या 90 थी। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 80 डॉक्टरों ने, महाराष्ट्र में 74 डॉक्टरों ने, आंध्र प्रदेश में 70 डॉक्टरों ने, कर्नाटक में 68 डॉक्टरों ने, उत्तर प्रदेश में 66 डॉक्टरों ने, गुजरात में 62 डॉक्टरों ने और दिल्ली में 40 डॉक्टरों ने जान गंवाई।

आईएमए के मुताबिक दूसरी लहर ने देश में सबसे भयानक स्थिति उत्पन्न की है और उस दौरान फैले डेल्टा वेब के कारण सबसे अधिक डॉक्टरों की मौत दिल्ली में हुई थी। जहां कुल 128 डॉक्टरों की जान चली गई। उसके बाद दूसरे नंबर पर बिहार था, जहां 115 डॉक्टरों की मौत हुई। वहीं उत्तर प्रदेश में 79 डॉक्टरों ने, पश्चिम बंगाल में 65 डॉक्टरों ने, तमिलनाडु में 64 डॉक्टरों ने, आंध्र प्रदेश में 48 डॉक्टरों ने, ओडिशा में 46 डॉक्टरों ने, राजस्थान में 44 डॉक्टरों ने, तेलंगाना में 43 डॉक्टरों ने और गुजरात और झारखंड में 39-39 डॉक्टरों की मौतें हुईं।

यह जानकारी देते हुए आईएमए के के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहा कि उन्होंने स्वयं इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर मनसुख मंडाविया से मुलाकात की थी और मरने वाले डॉक्टरों की सूची उन्हें दी थी। सिंह ने कहा, "स्वास्थ्य मंत्री ने हमारी सारी बातों को बहुत विनम्रता और धैर्यपूर्वक सुना था। हमें उम्मीद है कि स्वास्थ्य मंत्रालय कोविड काल के दौरान लड़ी गई लड़ाई में डॉक्टरों के अमूल्य जीवन और उनके योगदान को सम्मान देगी।"

राज्यसभा में राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्र ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (पीएमजीकेपी) के तहत कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमा योजना के तहत सामुदायिक स्वास्थ्यकर्मियों और निजी सहित स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को 50 लाख रुपये का व्यापक बीमा प्रदान किया है।

टॅग्स :कोविड-19 इंडियास्वास्थ्य मंत्री भारत सरकारसंसदIndian Medical Association
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