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आयुर्वेद: अगर जुकाम नहीं छोड़ रहा पीछा तो समझिये कौन सा है विकार, कैसे होंगे ठीक, क्या करने होंगे उपाय, यहा जानिए

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: July 7, 2023 12:52 IST

'कफ' शब्द की मूल उत्पत्ति 'स्लिश' शब्द से है, जिसका सीदा अर्थ है बांधना या जकड़ना। कफ में पृथ्वी और जल के तत्व समायोजित होते हैं।

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ठळक मुद्दे'कफ' शब्द की मूल उत्पत्ति 'स्लिश' शब्द से है, जिसका सीदा अर्थ है बांधना या जकड़नामानव शरीर पंच महाभूतों से बना है। जिसमें पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि और वायु शामिल हैंवहीं कफ में पृथ्वी और जल के तत्व समायोजित होते हैं, शरीर में शीत-उष्मा के टकराव से कफ होता है

दिल्ली: आयुर्वेद में शरीर के विकार को प्राकृतिक विधि से निरोग बनाने का प्रयास किया जाता है। आयुर्वेद सदैव कहता है मानव की निरोग काया की उसकी असली संपत्ति है। इसलिए आयुर्वेद कहता है कि तन को स्वस्थ्य रखन के लिए वात, पित्त और कफ के संयोग को सदैव संतुलित करके रखें। ये तीन ऐसे विकार हैं, जिन्हें त्रिदोष भी कहा जाता है, जो मानव की जीवन शैली और खानपान के कारण शरीर में स्वंय जन्म लेते हैं।

आयुर्वेद कहता है कि मानव शरीर में वात, पित्त और कफ का निर्माण न हो ऐसा कभी नहीं हो सकता है और ये ही विकार पैदा करते हैं। इसलिए सदैव प्रयास करें कि इनका संतुलन शरीर में बना रहे ताकि तन निरोग रहे। आज हम यहां पर इन तीन विकार में से एक कफ के विषय में बात कर रहे हैं। आयुर्वेदिक बताता है मानव शरीर पंच महाभूतों से बना है। जिसमें पृथ्वी, जल, आकाश, अग्नि और वायु शामिल हैं। शरीर में कफ की संरचना भी इन्हीं पांच तत्वों के संयोजन बनती है।

कफ शब्द की उत्पत्ति कहां से हुई

'कफ' शब्द की मूल उत्पत्ति 'स्लिश' शब्द से है, जिसका सीदा अर्थ है बांधना या जकड़ना। कफ में पृथ्वी और जल के तत्व समायोजित होते हैं। आयुर्वेद के अष्टांग हृदयं सूत्रस्थान में कफ के विषय में कहा गया है, "स्निग्धः सितो गुरुरमंडः स्लक्सनो म्रतस्नः स्थिरः कफः" अर्थात कफ तैलीय, ठंडे, भारी, शांत, लसदार और स्थिर होता हैं।

शारीरिक और मानसिक स्थिरता और शक्ति, दोनों ही कफ दोष द्वारा नियंत्रित होती हैं। शरीर की संरचनात्मक अखंडता में कफ मूल तत्व माना जाता है। कफ के नियंत्रण से ही रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।

कफ के असंतुलन से होने वाले विकार

शरीर में जब शीत और उष्मा के बीच टकराव होता है तो उस स्थिति में कफ का निर्माण होता है। इसके कारण अत्यधिक बलगम, शरीर का वजन बढ़ना, साइनस, ताकत का कम होना, धमनियों में वसा का जमा होना, मधुमेह, ज़ुकाम, खांसी, नाक का बहना, ज्यादा पेशाब आना, स्वाद और गंध की समस्या होना आम बात है।

किन कारणों से होता है कफ

शरीर में कफ असंतुलन के मुख्य कारण है कफ बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करना। इसमें दूध, दही, छांछ, वसायुक्त और तैलीय भोजन, ठंडे पेय, फ्रीज का भोजन, अत्यधिक मीठे और खट्टे फल को लेना। ठंडे और नम जलवायु में बहुत अधिक समय तक बिताने से या फिर दिन के समय में सोने से कफ की शिकायत हो सकती है।

कैसे करें कफ को संतुलित

कफ को नियंत्रित रखने के लिए पत्तेदार साग, हरी सब्जियां, कसैले और सूखे फल औक कच्चे शहद का सेवन होता है। इसके अलावा रात्रि में जल्दी सोये और जल्दी जागे। नियमित योग एवं व्यायाम करें। अपनी दिनचर्या में जॉगिंग और साइकिल चलाना शामिल करें।

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