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Video: लेडी किलर संतोख बेन कैसे बनी बापू को जन्म वाले पोरबंदर की पहली महिला विधायक

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: September 7, 2022 17:02 IST

अंडरवर्ल्ड की मशहूर लेडी किलर संतोख बेन पर बॉलीवुड में 'गॉड मदर' के नाम से बायोपिक बन चुकी है। माफिया संतोख बेन महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर की पहली महिला विधायक भी रहीं।

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ठळक मुद्देपोरबंदर की रहने वाली संतोख बेन को गुजरात की लेडी किलर कहा जाता थासंतोख बेन ने पति सरमनभाई जडेजा की हत्या का बदला लेने के लिए उठाया था हथियार संतोख बेन साल 1989 में जनता दल के टिकट पर पोरबंदर से पहली महिला विधायक बनी थीं

पोरबंदर: गॉड मदर के नाम से मशहूर संतोख बेन जडेजा किसी जमाने में महाराष्ट्र और गुजरात के अंडरवर्ल्ड का जानी मानी शख्सियत हुआ करती थीं। अंडरवर्ल्ड के कई मशहूर माफिया डॉन की तरह संतोख बेन पर भी बॉलीवुड में बायोपिक बन चुकी है। फिल्म का नाम था 'गॉड मदर'। फिल्म में संतोख का किरदार मशहूर एक्ट्रेस शबाना आजमी ने निभाया था। अब इसे विडंबना ही कहेंगे माफिया संतोख बेन महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर की पहली महिला विधायक भी बनीं।

संतोख बेन को गुजरात की उस लेडी किलर कहा जाता था। अपराध कि दुनिया में पूरी ठसक के साथ अपना मुकाम बनाने वाली संतोख ने राजनीति में किस्मत आजमाई, पोरबंदर की पहली महिला विधायक भी बनी। पोरबंदर को खून से लाल करने वाली संतोख बेन जडेजा के नाम का सिक्का पूरे इलाके में चलता था। कहते हैं जो भी संतोख बेन के रास्ते में आया दर्दनाक मौत उसे मिली।

एक साधारण औरत देखते ही देखते जरायम की दुनिया में लेडी किलर के नाम से मशहूर हो गई। जैसा कि अक्सर कहा जाता है क्रिमिनल कोई शौक से नहीं बनता, बल्कि हालात उसे क्राइम की दुनिया में खुद ब खुद पहुंचा देते हैं। न चाहते हुए भी हालात किसी-किसी को इस कदर मजबूर कर देता है कि वो हथियार उठा लेते हैं। पोरबंदर में जन्में महात्मा गांधी ने अंग्रेजों को इस देश से भगाने के लिए अपने सबसे खतरनाक हथियार अहिंसा का प्रयोग किया, वहीं इसी पोरबंदर की रहने वाली संतोख बेन ने पति सरमनभाई मुंजाभाई जडेजा की हत्या का बदला लेने और बच्चों की सलामती के लिए अपराध का दामन थाम लिया।

दरअसल 80 के दशक में संतोख बेन के पति सरमन मुंजा जडेजा महाराजा मिल में मजदूर हुआ करते थे। मिल में हड़ताल हो गई और उसे खत्म कराने के लिए मिल के मालिक नानाजी कालिदास मेहता ने गैंगस्टर देवू वाघेर को लाखों रुपये का ठेका दे दिया। मिल मालिक से पैसा लेकर देवू वाघेर हड़ताल खत्म करवाने के लिए मिल पर पहुंचा। जहां उसके और सरमन के बीच झगड़ा हो जाता है और इसी दौरान सरमन के हाथों वाघेर का कत्ल हो जाता है। चंद सेकेंड पहले मिल का साधारण सा मजदूर सरमन अब कत्ल का आरोपी हो गया था। उस एक कत्ल ने सरमन को जुर्म की राह पर लाकर खड़ा कर दिया।

सरमन जल्दी ही पोरबंदर में अपराध का बेताज बादशाह बन जाता है लेकिन धीरे-धीरे सरमन को अपने किये काम से नफरत होने लगी और वो अपराध कि दुनिया से निकलना चाहता था। वोपत्नी संतोख के साथ मिलकर वह भी आम इंसान की तरह जिंदगी गुजारना चाहता था। लेकिन सरमन के दुश्मनों को यह बात रास नहीं आई और सरमन की हत्या हो गई। पोरबंदर में अपराध के जिस सिलसिले को सरमन ने शुरू किया था वो उसकी मौत से भी नहीं थमा। दुश्मनों ने पत्नी संतोख बेन और उसके बच्चों को खत्म करने की धमकी देनी शुरू कर दी। बच्चों की जिंदगी को बचाने के लिए आखिरकार संतोख बेन को भी हथियार को उठाना पड़ा और वो भी कूद गईं पति के बनाये अपराध के पेशे में।

संतोख बेन ने पति सरमन के वफादारों के साथ मिलकर गैंग को फिर से खड़ा किया और पति का हत्या का बदला लेने के लिए एक के बाद एक कुल 14 हत्याएं करवाईं। मारे गये सभी 14 लोगों पर सरमन की हत्या करवाने का शक था। पति के मौत का बदला लेने के बाद संतोख बेन को न केवल पोरबंदर, न केवल गुजरात बल्कि मुंबई में भी सभी जानने लगे।

संतोख ने अपने रसूख पर अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन बना लिया। मुंबई के कुख्यात डॉन करीम लाला संतोख बेन का बेहद नजदीकी थे। संतोख बेन ने अपराध की दुनिया में बादशाहत कायम करने के बाद राजनीति में भी उतरने का फैसला किया। इसी बीच साल 1989 में संतोखबेन को जनता दल ने पोरबंदर से विधानसभा चुनाव का टिकट दे दिया। 89 के चुनाव में बंपर जीत दर्ज करके संतोख पोरबंदर की पहली महिला विधायक बनीं। सोचिए ये वही पोरबंदर शहर है, जहां कभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्म हुआ था।

वैसे समय का चक्र हर वक्त एक जैसा नहीं रहता, 90 के दशक में संतोख बेन की गैंग पर पकड़ कमजोर होने लगी। संतोख बेन के घर में उनकी सत्ता पाने के लिए टकराव होने लगा। साल 2006 में संतोख के बेटे करन जडेजा ने अपने भाई कंधल जडेजा की पत्नी रेखा की हत्या कर दी। रेखा की हत्या के बाद संतोख का पूरा परिवार बिखर गया और संतोख बेन का सितारा भी धीरे-धीरे डूब गया। 18 हत्याओं के आरोपी संतोख बेन 5 अप्रैल 2011 को हार्ट अटैक के कारण 65 साल की उम्र में हमेशा के लिए खामोश हो गईं।

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