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चार साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न, जुर्म में 52 वर्षीय दिव्यांग को 38 साल कैद की सजा

By भाषा | Updated: February 15, 2022 21:56 IST

बच्ची के माता-पिता ने महिला थाने में शिकायत दर्ज करायी थी। जांच के बाद अब्बास को पॉक्सो कानून के तहत 10 जनवरी, 2019 को गिरफ्तार किया गया था।

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ठळक मुद्देमुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सी. संजई बाबा ने अब्बास को 38 साल कैद और 3,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनायी।मामले में नीलगिरि जिले के गुडालूर इलाके के दिहाड़ी मजदूर अब्बास ने बच्ची का यौन उत्पीड़न किया था।

उदगमंडलमः एक महिला अदालत ने चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के जुर्म में 52 वर्षीय दिव्यांग व्यक्ति को मंगलवार को 38 साल कैद की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, करीब तीन साल पुराने इस मामले में नीलगिरि जिले के गुडालूर इलाके के दिहाड़ी मजदूर अब्बास ने बच्ची का यौन उत्पीड़न किया था।

इस संबंध में बच्ची के माता-पिता ने महिला थाने में शिकायत दर्ज करायी थी। जांच के बाद अब्बास को पॉक्सो कानून के तहत 10 जनवरी, 2019 को गिरफ्तार किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद सजा सुनाते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सी. संजई बाबा ने अब्बास को 38 साल कैद और 3,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनायी।

इस बीच जयपुर की विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को साढ़े चार वर्षीय बालिका के अपहरण और बलात्कार के बाद उसकी हत्या करने के जुर्म में 25 वर्षीय व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई है। अभियोजन के अनुसार जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के नरेना कस्बे के निवासी सुरेश कुमार बलाई ने 11 अगस्त 2021 को साढ़े चार वर्षीय बालिका का अपहरण कर बलात्कार के बाद हत्या कर दी थी।

विषिष्ठ न्यायालय (पोक्सो एक्ट) ने कुमार को फांसी की सजा सुनायी और उसपर दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। जिला पुलिस अधीक्षक जयपुर ग्रामीण मनीष अग्रवाल ने बताया कि 11 अगस्त 2021 को कस्बा नरेना में साढे चार वर्षीय बालिका का अपहरण कर बलात्कार के बाद हत्या कर दी गई थी।

उन्होंने बताया कि करीब 700 पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों को अज्ञात आरोपी की तलाशी के लिये लगाया गया था। तलाशी में लगे पुलिस दलों ने मात्र 15 घण्टे में ही अज्ञात आरोपी की सुरेश कुमार बलाई (25) के रूप में पहचान की और उसे गिरफ्तार कर जघन्य वारदात का खुलासा किया था।

उन्होंने बताया कि मामले में सुरेश कुमार के खिलाफ विभिन्न भारतीय दंड संहिता की धाराओं और पोक्सो अधिनियम के तहत न्यायालय में मात्र 8 कार्यदिवस में चालान प्रस्तुत किया गया। विशेष लोक अभियोजक महावीर सिंह ने बताया कि मामले में 41 गवाहों को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया और कोई भी गवाह बयान से नहीं पलटा।

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