ठाणेः महाराष्ट्र में ठाणे की एक अदालत ने 2021 में अपनी पत्नी की हत्या के आरोपी 32 वर्षीय व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष उन "बुनियादी तथ्यों" को साबित करने में विफल रहा, जो परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित मामले में दोष सिद्ध करने के लिए आवश्यक हैं। परिस्थितिजन्य मामले वे होते हैं जिनमें कोई चश्मदीद गवाह नहीं होता और दोष केवल हालात व सबूतों की एक अटूट कड़ी (जैसे हत्या के वक्त घर में मौजूदगी या खून के निशान) के आधार पर सिद्ध किया जाता है।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस बी अग्रवाल ने शनिवार को दिए अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष की यह जिम्मेदारी है कि वह उन सभी तथ्यों को साबित करे जो परिस्थितियों की ऐसी कड़ी बनाते हैं "जो केवल आरोपी के दोषी होने की ओर इशारा करती हो और उसके निर्दोष होने की किसी भी उचित संभावना को खारिज करती हो।"
अभियोजन पक्ष का आरोप था कि नौ मई 2021 को शान मोहम्मद शबिद अली खान ने ठाणे जिले के दायघर स्थित अपने घर में अपनी चौथी पत्नी आरफा खान की हत्या कर दी थी। आरोप के अनुसार, खान को अपनी पत्नी के विवाहेतर संबंध होने का संदेह था। आरोप लगाया गया था कि उसने आरफा का सिर बाथरूम के फर्श पर पटक दिया था, जिससे सिर में गंभीर चोटें आईं और चेहरे की हड्डियां टूट गईं, जो जानलेवा साबित हुईं। कुछ पड़ोसियों ने आरफा को खून से लथपथ पड़ा पाया था, जबकि उसका दो साल का बच्चा शव के पास बैठकर रो रहा था।
खान पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत मामला दर्ज किया गया था और वह नौ जून 2021 से जेल में था। अदालत ने माना कि मेडिकल रिपोर्ट से यह तो स्पष्ट है कि महिला की हत्या हुई थी, लेकिन आरोपी को इस अपराध से सीधे तौर पर जोड़ने वाले सबूत नहीं मिले, इसलिए उसे बरी कर दिया गया।
न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत सिर्फ इसलिए किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि वह अपनी बेगुनाही का सबूत नहीं दे पाया। कानून के मुताबिक, दोष साबित करने की पूरी जिम्मेदारी सरकारी पक्ष की होती है और उसे अपने केस को अपने ठोस सबूतों के दम पर साबित करना चाहिए।
अदालत ने यह भी पाया कि मुख्य गवाहों ने हत्या के समय आरोपी की मौजूदगी घटनास्थल पर नहीं बताई थी। अंत में अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ गुनाह पूरी तरह साबित नहीं होता और संदेह की गुंजाइश बनी हुई है, इसलिए उसे बरी कर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया।